कमजोर स्वास्थ्य सुरक्षा आवरण भारत में स्वास्थ्य विवरण (Weak health security cover in India Health Details – Social Issues)

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सुर्खियों में

• राष्ट्रीय प्रतिवर्ष सर्वेक्षण कार्यालय ने भारत में स्वास्थ्य नामक शीर्षक से एक रिपोर्ट (विवरण) जारी की है।

• इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय प्रतिवर्ष सर्वेक्षण के 71 वें दौरे के जनवरी से जून 2014 के बीच एकत्रित किए गए आंकड़े शामिल हैं।

विवरण के निष्कर्ष

• भारत की 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या किसी भी स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत शामिल नहीं है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का खराब प्रदर्शन-केवल 12 प्रतिशत शहरी तथा 13 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को ही बीमा कवर प्राप्त है।

बजट से बाहर व्यय में दवाओं का अत्यधिक योगदान-कुल स्वास्थ्य व्यय में से, ग्रामीण क्षेत्रों में 72 प्रतिशत और शहरी में 68 प्रतिशत व्यय गैर चिकित्सालय भर्ती उपचार के लिए दवाएं खरीदने हेतु किया गया था।

निजी चिकित्सक इलाज का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं- ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदान किये गए उपचार का 72 प्रतिशत तथा और शहरी क्षेत्रों में 79 प्रतिशत निजी क्षेत्र दव्ारा किया गया।

निजी क्षेत्र चिकित्सालयों में लोगों दव्ारा उच्च स्तर व्यय किया गया-ग्रामीण आबादी चिकित्सालय में भर्ती होकर इलाज के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के चिकित्सालय में औसतन 5,636 रुपये खर्च करती है जबकि निजी क्षेत्र के चिकित्सालय में 21,726 रुपये खर्च करती है।

कमजोर स्वास्थ्य सुरक्षा आवरण की पृष्ठभूमि में निहित कारण

वित्तीय बाधा-ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह सबसे बड़ी बाधा है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की अनुपलब्धता-यह ग्रामीण क्षेत्रों में निजी चिकित्सालय के क्रम घनत्व और सरकारी चिकित्सालयों की ख़राब स्थिति के कारण एक बड़ा कारक है।

• दवाओं की बढ़ती लागत और सरकारी चिकित्सालयों में बजटीय आवंटन में कटौती ने दवाओं पर व्यय को बढ़ा दिया है।

• सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में स्वास्थ्य हेतु सरकारी आवंटन 1986-87 में 1.47 प्रतिशत था जो 2015 में 1.05 प्रतिशत तक गिर गया है।

• कमजोर वित्तीय समावेशन और वित्तीय साक्षरता ने बीमा सुविधाओं की कवरेज (समाचार-पत्रादि में/ विषयवृत्तांत) को कम किया हैं।