आर वी ईश्वर पैनल (RV Easwar Panel – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• प्रत्यक्ष कर कानूनों में बदलाव व उन्हें सरल बनाने के लिए केंद्र सरकार दव्ारा दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर.वी ईश्वर की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी सिफारिशें सौंप दी है।

प्रमुख सिफारिशें

• स्रोत पर कर कटौती (टी.डी.एस.), कर योग्य आय में व्यय के दावों तथा कर रिफंड (धन की वापसी) से संबंधित प्रावधानों सरल बनाना।

• इज (रहना/होना) ऑफ (का) डूइंग (काम) बिजनेस (कारोबार) में सुधार करने, मुकदमेबाजी को कम करने तथा कर विवादों के समाधान में तीव्रता लाने के लिए विभिन्न टैक्सपेयर्स (करदाता) फ्रेंडली (उपयोगी) उपायों को अपनाना।

• आय संगणना और प्रकटीकरण मानक (आईसीडीएस) के विवादास्पद प्रावधानों को स्थगित करना और रिफंड की प्रक्रिया को तीव्रतम करना।

• उस नियम/खंड को समाप्त करना, जो आयकर विभाग को करदाता के रिफंड (धन की वापसी) डयू (शेष) को छह महीने से आगे भी भुगतान करने की अनुमति देता है और टैक्स (कर) रिफंड (धन की वापसी) में देरी के लिए उच्च ब्याज का भुगतान।

• 5 लाख तक स्टॉक ट्रेडिंग (शेयर व्यापार) लाभ को पूंजीगत लाभ माना जाएगा न कि व्यापार आय। यह एक ऐसा कदम है, जो स्टॉक बाजार में और अधिक खुदरा निवेश को प्रोत्साहित कर सकता है।

• एकल व्यक्ति के लिए टी.डी.एस की दरों को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत तक किया जाना चाहिए। लाभांश आय, जिस पर लाभांश वितरण कर लगाया जा चुका है, कुल आय के एक हिस्से के रूप में व्यवह्नत किया जाना चाहिए।

प्रकल्पित आय योजना के अंतर्गत पेशेवरों या व्यवसायों को बही-खाता रखने की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन उन्हें अपने संभावित आय की गणना के आधार पर कर भुगतान करना होता है। जैसे-पेशेवरों के लिए यह प्रस्तावित है कि उनके पिछले साल के 33.3 प्रतिशत प्राप्तियों की आय के रूप में गणना की जाएगी, जिस पर उन्हें कर का भुगतान करना होगा। यदि उनके लाभ इससे बहुत कम है तो उन्हें बही-खाता रखने की आवश्यकता होगी जिसमें व्ययों का स्पष्ट वर्गीकरण समाहित होता है तथा उसी हिसाब से उन्हें कर का भुगतान करना होता है।

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