आरटीई के तहत ‘नो डिटेनशन’ (नहीं कैद) (अनुत्तीर्ण नहीं किये जाने) की नीति की समीक्षा (Review of ‘No Detention’ Policy under RTI – Governance and Governance)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दव्ारा पूछे गये एक प्रश्न के जवाब में कम से कम 18 राज्य सरकारों ने इस धारा को निरस्त करने की माग की।

• हाल ही में, शिक्षा नीति पर सुझाव देने के लिए नियुक्त टी. एस. आर. सुब्रमण्यम पैनल ने भी सरकार को छठी कक्षा से पास-फेल प्रणाली वापस लाने की सिफारिश की थी।

• राजस्थान और दिल्ली के दव्ारा ‘नो डिटेनशन’ नीति को समाप्त करने संबंधी विधेयक पहले ही पारित कर दिया है। ये राज्य राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

नो डिटेनशन (नहीं, नज़र बंदी) नीति क्या है?

• आरटीई अधिनियम की धारा 16 के तहत, आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को स्वत: ही अगली कक्षा में प्रोन्नत कर दिया जाता है भले ही वे अगली कक्षा में प्रवेश करने हेतु आवश्यक अंक प्राप्त कर पाए अथवा नहीं।

• यह प्रावधान आरटीई अधिनियम के तहत बालक के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के हेतु सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (सीसीई) की प्रक्रिया के तहत किया गया था।

पृष्ठभूमि

• डिटेनेशन प्रणाली से छात्रों में बीच में पढ़ाई छोड़ने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों में जो मंहगी निजी शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर सकते थे।

• विद्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण पाने के लिए नो डेटिनशन प्रणाली को लाया गया था ताकि जहां बच्चे भय, चिंता और तनाव से मुक्त वातावरण में विकास करें वहीं उनके दव्ारा विद्यालय छोड़ने की दर में कमी लायी जा सके।

• कई सरकारी विद्यालय के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने यह विचार व्यक्त किया है कि यह प्रणाली बच्चों में शिक्षा के न्यूनतम स्तर को सुनिश्चित करने के लिए भी एक चुनौती बन गयी है।

• इस प्रावधान के कारण छात्रों में अध्ययन के प्रति उपेक्षा का दृष्टिकोण विकसित हो गया है वही माता-पिता इस तथ्य से अवगत होने के कारण ही उनके बच्चों को असफल नहीं किया जाएगा बच्चों की शिक्षा पर ध्यान नहीं देते।

• एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (वार्षिक राज्यों के शिक्षा विवरण) (एएसईआर) 2014 इस तथ्य को प्रकट करती है कि ग्रामीण भारत में पांचवी कक्षा में पढ़ने वाला हर दूसरा छात्र कक्षा तीन के स्तर का पाठ नहीं पढ़ सकता है।

आगे की राह

• आरटीई अधिनियम में इस प्रावधान के अतिरिक्त बुनियादी ढांचे का उन्नयन, सीसीई के माध्यम से शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और नियमित मूल्यांकन जैसे विस्तृत प्रावधान भी शामिल थे। नो- डिटेनशन नीति के साथ ही इन सभी प्रावधानों को भी कार्यान्वित किया जाना चाहिए।

• विद्यालयों के दव्ारा सीखने के परिणामों का निम्न स्तर बहुत से कारकों जैसे छात्र-शिक्षक अनुपात, शिक्षकों प्रशिक्षण का अभाव, कमजोर निगरानी व्यवस्था, बुनियादी ढांचे का अभाव, विद्यालय और घर का माहौल आदि के सम्मिलित प्रभाव का परिणाम है।

• सरकार केवल नों-डिटेनशन प्रणाली को ही अक्षरश. लागू नहीं कर सकती उसे अन्य मानकों का भी पालन करना चाहिए।

• अन्य क्षेत्रों में बिना उचित सुधारों के पुरानी पास-फेल प्रणाली को वापस लाना समतामूलक समाज के विकास के, आरटीई के लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

• साथ ही सभी हितधारकों के लिए नीति को समझने के लिए पर्याप्त समय देने के लिए नो-डिटेनशन नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए ताकि सभी हितधारक इस नीति की शून्य मूल्यांकन के रूप में व्याख्या की बजाय इसमें निहित अवधारणा को समझ सके।

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