सीमा-पारीय मानस संरक्षण क्षेत्र (Border Cross Border Area – Environment)

Get top class preparation for CTET-Hindi/Paper-1 right from your home: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-1.

• भारतीय क्षेत्र के मानस राष्ट्रीय उद्यान (एमएनपी) और भूटान के रॉयल (राजकीय) मानस राष्ट्रीय उद्यान (आरएमएनपी) को समाहित करने वाले सीमा-पारीय मानस संरक्षण क्षेत्र (टीआरएएमसीए) में बड़ी बिल्लियों की दव्तीय निगरानी में कुल मिलाकर 21 अलग-अलग बाघ पाये गये।

• टीआरएएमसीए की 2011 - 12 की पहली निगरानी में क्षेत्र में 14 बाघ पाये गये थे।

• नवीनतम बाघ निगरानी में दो संरक्षित क्षेत्रों के 560 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र की कवर (आवरण) किया गया। पिछले साल यह एमएनपी, आरएमएनपी, राष्ट्रीय उद्यान संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) , डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और संरक्षण समूह आरण्यक दव्ारा क्रियान्वित किया गया।

• संख्या में वृद्धि के अलावा, इससे मिले परिणाम से यह संकेत भी मिलता है कि इस क्षेत्र में एक स्वस्थ कोर प्रजनन बाघों की आबादी की उपस्थिति है, जो भूटान के साथ-साथ भारत के पूवोत्तर क्षेत्र में बाघों की आबादी बढ़ने के स्रोत के रूप में कार्य कर सकता है।

• निष्कर्ष यह भी बताता है कि सीमा पार के जंगलों के गलियारों में बाघों और अन्य वन्य जीवों की निर्बाध आवाजाही है। यह बड़ी बिल्लियों की लंबी अवधि के संबंधित संरक्षण क्षेत्रों के बीच संपर्क बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करता है।

• सीमा-पारीय मानस संरक्षण क्षेत्र टीआरएएमसीए में भारत की ओर मानस राष्ट्रीय उद्यान (एमएनपी) और भूटान में रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान (आर एमएनपी) को शामिल किया गया है।

• 2008 में आरंभ टीआरएएमसीए, सीमा पार जैव विविधत संरक्षण के लिए भारत और भूटान की एक संयुक्त पहल है।