अधिकांश पारिस्थितिक रूप् से संवदेनशील क्षेत्र (ईएसजेड) अब तक चिन्हित नहीं (Most Ecologically Sensitive Areas Are Not Yet Marked – Environment And Ecology)

Get top class preparation for IAS right from your home: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 149K)

• भारत में राष्ट्रीय उद्यानों तथा वन्य जीव अभ्यारण्यों की कुल संख्या लगभग 526 है।

• इनमें से अब तक केवल 26 को ही पारिस्थितिक रूप से संवदेनशील क्षेत्र (ईएसजेड) के रूप में अधिसूचित किया गया हैं।

ईएसजेड और इसका महत्व

• राष्ट्रीय वन्य जीव संरक्षण नीति के अनुसार हर ईएसजेड के चारों ओर एक पारिस्थितिक रूप से संरक्षित क्षेत्र होना चाहिए, जहाँ प्रदूषणकारी तथा पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाली गतिविधियाँ वृर्जित होनी चाहिए।

• ईएसजेड संरक्षित क्षेत्रों को निर्मल बनाने और बफर क्षेत्र एवं इस क्षेत्र के आस-पास के गलियारों को सुदृढ़ बनाने के सिद्धांतों पर आधारित है।

• वाणिज्यिक या सार्वजनिक उद्देश्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सभी रूप जैसे कि खनन, उद्योग, और पन-बिजली आदि परियोजनाएँ ऐसे क्षेत्रों में निषिद्ध हैं।

ईएसजेड पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश

• सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के दव्ारा इन राज्यों की सीमा में आने वाले ईएसजेड के स्थान विशिष्ट भौगोलिक विस्तार का विवरण देने वाला प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा।

• जब तक स्थान विशेष ईएसजेडएस की घोषणा नहीं हो जाती तब तक प्रत्येक वन्य जीव क्षेत्रों के आस-पास के 10 किलोमीटर के क्षेत्र को ईएसजेड के रूप में माना जाना चाहिए।

Developed by: