बंधुआ मजदूर की पुनर्वास योजना को केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के रूप में संचालित (Rehabilitation Scheme of bonded labors operated as Centrally Sponsored Scheme)

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सुर्खियों मेंं क्यों?

• केंद्र के दव्ारा बंधुआ मजदूर योजना को केंद्रीय क्षेत्र में प्रतिस्थापित करने हेतु इस य

• ाेजना में संशोधन किया जा रहा है।

प्रस्तावित परिवर्तन

§ योजना के अंतर्गत खर्च की जाने वाली कुल बजटीय राशि प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 47 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

§ संशोधन के पश्चात्‌ विकलांग, मानव-तस्करी के व्यापार से बचाए गए महिला और बच्चे, यौन-शोषण का शिकार और ट्रांसजेंडर जैसे सबसे वंचित वर्गो को 3 लाख रुपये प्रदान किये जायेंगे। महिलाओं और नाबालिगों की विशेष श्रेणी को अब 2 लाख रुपये और एक सामान्य व्यस्क पुरुष बंधुआ मजदूर को 1 लाख रुपये मिलेंगे।

§ इस नए पैकेज (प्रस्तावों/सुझावों का एक समुच्चय) के तहत पैसा डी.एम. दव्ारा नियंत्रित एक एन्युइटी खाते में रहेगा और इस धन से प्राप्त मासिक कमाई लाभार्थी के खाते में जमा हो जाएगी। खाते की मुख्य धनराशि जिलाधिकारी के निर्णय के बिना खर्च नहीं की जाएगी।

§ नई योजना का विशेष उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिला, विकलांग तथा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का भीख मांगने के संगठित समूहों के दव्ारा, जबरन वेश्यावृत्ति और बाल श्रम जैसे बंधुआ मजदूरी के नए रूपों में शोषण न किया जा सके।

§ कम से कम 10 लाख रुपये का एक स्थायी और नवीकरणीय जिला स्तरीय पुनर्वास कोष जिलाधिकारी को उपलब्ध कराया जायेगा जिसका सरकार दव्ारा डीबीटी प्रणाली के माध्यम से प्रतिपूर्ति से पहले कामचलाऊ व्यवस्था के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

§ कलेक्टर राज्य के कार्यक्रम के माध्यम से भूमि, घर, राशन और व्यावसायिक समर्थन के रूप में कई गैर-नकद लाभ प्रदान कर सकता है।

§ जिलाधिकारी उन परिस्थितियों में भी सहायता प्रदान करने के लिए स्वतंत्र है जबकि बंधुआ मजदूरी क मामला प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध न हो पाया किन्तु प्रभावित व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हो।

§ नाबालिग बच्चे और महिलाओं की निरंतर देखभाल राज्य के दव्ारा की जाएगी और उन्हें उनकी आवश्यकता अनुसार शिक्षित तथा कौशलयुक्त बनाया जाएगा। अनाथ लड़कियों की शादी भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी।

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