निर्वाचन विधि (संशोधन) अधिनियम 2015 (Election Law Act, 2015 – Law)

Glide to success with Doorsteptutor material for IAS : Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 139K)

• इस विधेयक का उद्देश्य परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 11 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 9 में संशोधन करना है।

• उक्त विधेयक भारत और बांग्लादेश के बीच क्रमश: 51 बांग्लादेशी विदेशी अंत: क्षेत्रों और 111 भारतीय विदेशी अंत:क्षेत्रों के आदान-प्रदान के परिणामस्वरूप (जो 31 जुलाई 2015 से प्रभावी है।) पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का सीमित परिसीमन कार्य करने के लिए भारतीय निवार्चन आयोग को सक्षम बनाएगा।

परिसीमन

• वस्तुत: परिसीमन का अर्थ किसी देश या विधायिका युक्त राज्य में प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की सीमरेखा का निर्धारण करने की प्रक्रिया से है। परिसीमन का कार्य किसी उच्च शक्ति प्राप्त निकाय को ही दिया जाता है। ऐसे निकाय को परिसीमन आयोग या सीमा रेखा आयोग कहा जाता है।

• संविधान के अनुच्छेद 82 के अंतर्गत संसद विधि दव्ारा प्रत्येक जनगणना के बाद एक परिसीमन अधिनियम अधिनियमित करता है।

• भारत में ऐसे परिसीमिन आयोग का अब तक 4 बार गठन हो चुका है। परिसीमन आयोग अधिनियम, 1952 के तहत 1952 में, परिसीमन आयोग अधिनियम, 1962 के तहत 1963 में, परिसीमन आयोग अधिनियम, 1972 के तहत 1973 में तथा परिसीमन आयोग अधिनियम, 2002 के तहत 2002 में।

• निर्वाचन क्षेत्रों का वर्तमान परिसीमन 2001 के जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आयोग अधिनियम 2002 के अंतर्गत किया गया है।

• भारत में परिसीमन आयोग उच्च शक्ति प्राप्त निकाय है जिसके आदेश विधि की शक्ति रखते हैं एवं किसी भी अदालत के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती है। ये आदेश इस संबंध में भारत के राष्ट्रपति दव्ारा निर्दिष्ट एक तिथि से प्रवृत्त होते हैं। इसके आदेश की प्रतियां लोकसभा एवं सम्बद्ध राज्य विधान सभा के समक्ष रखी जाती हैं किन्तु उनके दव्ारा इन आदेशों में किसी भी प्रकार के संशोधन नहीं किया जा सकते हैं।

Developed by: