मणिपुर लोक संरक्षण विधेयक 2015 (Manipur Lock Protection Bill 2015)

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मुद्दा

मणिपुर विधानसभा दव्ारा तीन विधेयक-मणिपुर लोक संरक्षण विधेयक, 2015, मणिपूर भूमि राजस्व तथा भूमि सुधार (सातवाँ संशोधन) विधेयक, 2015 तथा मणिपुर दुकान तथा प्रतिष्ठान (दव्तीय संशोधन) विधेयक, 2015 पारित किये जाने के बाद जनजातीय जिलों में दंगे भड़क गए।

पृष्ठभूमि

• ये विधेयक अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम तथा नागालैंड की तर्ज पर कई संगठनों के दव्ारा इन (अंदर) लाइन (रेखा) परमिट (अनुमति देना) (आईएलपी) को लागू करने की मांग के लिए दो माह के विरोध प्रदर्शन के परिणाम हैं।

• मणिपुर का प्रभावी ‘मेइती समुदाय’ वर्षो से मुख्य भूमि के भारतीयों के मणिपुर में प्रवेश पर रोक लगाने के लिए परमिट (अनुमति देना) के कार्यान्वयन की मांग करता रहा है।

इन लाइन परमिट प्रणाली

• इन लाइन परमिट, गैर-अधिवासी नागरिकों के किसी प्रतिबंधित जोन में प्रवेश को विनियमित करता है।

• अंग्रेज इस प्रणाली का प्रयोग पहाड़ों से आने वाले हमलावर जनजातीय समुदायों से पूर्वोत्तर के अपने राजस्व क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए किया करते थे।

• वर्तमान समय में इन लाइन परमिट के प्रयोग को पहाड़ी राज्यों की छोटी जनजातीय आबादियों की जनसांख्यिकीय सांस्कृतिक राजनीतिक तथा सामाजिक एकता को सरंक्षण देने के एक तरीके के रूप में देखा जाता है।

• वर्तमान में, इसे अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम तथा नागालैंड में लागू किया गया है।

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