Science & Technology: Dhanush & Prithvi and Data Privacy Day

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अद्यतन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Latest Development in Science & Technology)

धनुष एवं पृथ्वी (Dhanush & Prithvi)

  • सशस्त्र बलों में और अधिक क्षमता विकसित करते हुए भारत ने स्वदेश में ही निर्मित बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-2 एवं धनुष का उड़ीसा के तट से प्रक्षेपण किया। जहाँ पृथ्वी-2, चांदीपुर के परीक्षण केन्द्र से सचल प्रमोचक दव्ारा प्रक्षेपित की गई। वहीं धनुष मिसाइल पुरी के निकट बंगाल की खाड़ी में आई. एन. एस. सुभद्रा से प्रक्षेपित किया गया। निम्न परास वाली सतह से सतह मार्ग वाली पृथ्वी-2 मिसाइल, जो पहले से ही सेना में शामिल है, का सेना दव्ारा यह प्रायोगिक परीक्षण था। इस मिसाइल को स्ट्रेटिजिक कमांड फोर्स दव्ारा निर्देशित किया जाता है। भारत की पहली बैलिस्टिक मिसाइल ‘पृथ्वी’ देश के इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (एकीकृत निर्देशित प्रक्षेप्रास्त्र विकास कार्यक्रम) के अंतर्गत निर्मित की गई है जिसमें 500किग्रा वारहैड़ ले जाने की क्षमता है और इसमें तरल नोदक (Liquid Propulsion) वाले दो इंजन हैं। 9मी. लंबाई एवं 1 मी. व्यास वाली पृथ्वी-2 मिसाइल एडवांस इनरिशयल गाइडेंस सिस्टम (Advanced Inertial Guidance System) को प्रयोग करते हुए स्वनिर्मित पथ पर सटीकता के साथ लक्ष्यों तक पहुंचती है। प्रक्षेपण के बाद के विश्लेषण हेतु प्रक्षेपास्त्र के संपूर्ण पथ की जानकारी उच्चस्तरीय रडारों के समूह से प्राप्त की गई है तथा ऐसे विश्लेषणों के लिए अलग-अलग स्थानों पर वैद्युत प्रकाशीय टेलीमेट्री केन्द्र बनाए गए हैं।
  • नाभिकीय क्षमता से युक्त धनुष जो पृथ्वी का नौसेनिक संस्करण है, ने पूर्व निर्धारित पथ का अनुसरण किया तथा लक्ष्य के निकट स्थापित दो नौ सैनिक पोतों ने इसकी सटीक जानकारी प्राप्त की। 350 किमी. मारक क्षमता वाली इस मिसाइल से नौसेना को अधिक यथार्थता के साथ शत्रु लक्ष्यों पर आक्रमण की क्षमता प्रदान होगी। तट के साथ स्थिति परिष्कृत रडार तंत्र ने इसके संपूर्ण पथ पर निगरानी रखी थी। एक चरण वाला यह प्रक्षेपास्त्र 6 टन का है यह द्रव प्रणोदक से संचालित है।

डाटा प्राइवेसी डे (Data Privacy Day)

  • अमेरिका, कनाडा एवं यूरोपीय संघ के 27 देशों दव्ारा 20 जनवरी को ‘डाटा प्राइवेसी डे’ के रूप में मनाया गया, जिसका महत्व सामान्य जीवन में निजता के ही समान निजी आंकड़ा सुरक्षा को महत्व देने में है। इस दिन कुछ बड़ी निर्गमित कंपनियों ने अपने लाखों उपभोक्ताओं के निजी आंकड़ों की सुरक्षा के संकल्प को भी दोहराया।
  • सूचनाओं की बढ़ी हुई आनलाइन हिस्सेदारी के परिदृश्य में, विशेषकर सोशल नेटवर्क के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि एक बार पीछे मुड़कर यह देखा जाए कि न केवल व्यक्तिगत सूचनाओं की सुरक्षा की जाए वरन यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सूचनाओं की आन लाइन हिस्सेदारी के लिए किस तरह उचित मर्यादाओं का पालन किया जाए।
  • पुनर्संशोधित सूचना तकनीक अधिनियम, 2008 में अमेरिका एवं यूरोपीय देशों के आंकड़ा सुरक्षा अधिनियम में विद्यमान अधिकांश नियमों व विनियमों को शामिल कर लिया गया है। चूँकि भारत के पास कोई प्रथक निजता संरक्षक कानून नहीं है अत: अधिकांश उपभोक्ता जो निजी आंकड़ों के दुर्पयोग से पीड़ित है उन्हें दूसरे अधिनियमों में ही न्याय खोजना होगा।
  • इस संबंध में काफी चिंता व्यक्त की गई है कि गूगल एवं फेसबुक जैसी कंपनियां आनलाइन आंकड़ों की सुरक्षा करने हेतु क्या करेंगे? किन्तु इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि उन लोगों के बारे में क्या कदम उठाया जाए जो जानूबूझ कर सोशल नेटवर्क साइटों पर अपनी निजी सूचनाएं रखना चाहते हैं। सामान्यत: फेसबुक एवं लिक्डइन पर लोग अपनी व्यवसायिक सूचनाएं प्रकाशित कर देते हैं जिनका दुरूप्योग हैकरों दव्ारा किया जा सकता है।

एडवांस टेक्नोलॉजी व्हीकल फ्लाईट का परीक्षण (Advanced Technology Vehicle Flight Test)

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 3 अप्रैल, 2010 को सफलतापूर्वक नई पीढ़ी के उच्च उत्पादकतापूर्ण सांउडिंग राकेट का श्री हरिकोटा स्थित स्पेसपोर्ट से प्रक्षेपण किया। एडवांस टेक्नोलॉजी व्हीकल (ATV-DOI) जिसका वजन 3 टन है, इसरो दव्ारा विकसित सबसे भारी साउंडिग रॉकेट है। इसमें एक सुपर सोनिक कम्बस्चन रैमजेट (स्क्रैमजेट) तथा वायु से आक्सीजन प्राप्त करने वाली तकनीक का प्रयोग किया गया है।
  • रॉकेट सफलतापूर्वक 6 मैक से अधिक गति से लगभग 7 सेकंड तक उड़ा था। स्थितियाँ एक्टिव स्कैमजेट इंजन कम्बस्चन माड्‌यूल के सतत दहन के लिए आवश्यक है जो अगले ए. टीवी. उड़ान के लिए निर्धारित हैं।
  • एयर ब्रीदिंग रॉकेट सिस्टम अपने आस-पास के वातावरण से आक्सीजन प्रयुक्त करता है और उड़ान अवस्था में ईंधन को जलाता है जिससे ऊपर उड़ान हेतु आवश्यक बल मिल सके। यह पारंपरिक रासायनिक रॉकेट तंत्र, जो अपने साथ उड़ान हेतु आक्सीजन एवं ईंधन दोनों ले जाता है, से भिन्न है। इस प्रकार एयर ब्रीदिंग रॉकेट पारंपरिक रॉकेट की तुलना में अधिक हल्के एवं अधिक कार्यकुशल होते हैं जिससे अंतरिक्ष परिवहन की लागत में कमी आती है। अत: उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने में लागत कम आएगी। स्क्रैमजेट इंजन का विकास अत्यंत जटिल था एवं इसमें कई तकनीकी चुनौतियां शामिल थी। अत्यंत तीव्र गति की हवा (1.5 किमी. /सेकंड) के ईंधन के साथ मिश्रण से दहन हेतु सततता प्राप्त होती है।

ब्रॉडबैंड हेतु स्पेशल परपज व्हीकल (Special Purpose Vehicle for Broadband (SPV) )

  • ब्रॉडबैंड आधारित संरचना को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार एक स्पेशल परपज व्हीकल (SPV) के गठन की योजना बना रही है ताकि पांच लाख किमी. लंबी प्रकाश तंतु नेटवर्क (Optical Fibre Network) बिछाकर देश के सभी ग्राम पंचायतों को जोड़ा सके। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जैसे भारत संचार निगम लिमिटेड, रेलटेल और पावर ग्रिड जिनके अपने प्रकाश तंतु केबल पहले से ही हैं, इस प्रोजेक्ट के भाग होंगे। नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेट्रिक्स भी इस प्रोजेक्ट के भाग होंगे एवं इस सेवा को उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक हार्डवेयर, अनुप्रयोग तथा साफ्टवेयर आदि के विकास हेतु उत्तरदायी होंगे। इस स्पेशल परपज व्हीकल (SPV) की स्थापना हेतु इसकी प्रक्रिया विधि तैयार करने के लिए किसी बाहरी परामर्शदाता को नुियक्त किया जाएगा।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पी. एस. यू.) के दव्ारा पहले से ही बिछाई गई प्रकाश तंतु (Optical Fibber) इस प्रोजेक्ट हेतु एकीकृत करके प्रयोग में लाई जाएगी।
  • सेवा प्रदान करने हेतु संरचना एवं लागत जानने हेतु एक पायलट परियोजना, जो 4 राज्यों के 100 ग्राम पंचायतों को जोड़ने हेतु अगले 3 महीने में प्रारंभ की जाएगी तथा इसमें राष्ट्रीय सूचना केन्द्र दव्ारा विकसित साफ्टवेयर राज्य सरकारी सेवाओं में परीक्षण हेतु प्रयुक्त किया जाएगा। सरकार ने इस संपूर्ण प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन हेतु यूनीवर्सल सर्विस आब्लीगेशन फंड (U. S. O. F. Universal Services Obligation Fund) से 18,000 करोड़ रु. आवंटित किए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर यूनीवर्सल अब्लीगेशन फंड प्रबंधक दो वर्षों में पूरे होने वाले संपूर्ण प्रोजेक्ट का निरीक्षण करेगा।
  • नेटवर्क स्थापित किए जाने के पश्चात्‌ दूरसंचार विभाग प्रत्येक ग्राम पंचायत को 3 ब्रॉडबैंड कनेक्शन शुल्क मुक्त अगले तीन साल के लिए, कम्प्यूटर एवं प्रिंटर की स्थापना के साथ, उपलब्ध कराएगा। यह भी प्रस्ताव है कि बिना किसी चार्ज के तीन टेलीफोन कनेक्शन और एक टी. वी. कनेक्शन ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराया जाएगा।

ई-कचरा (E-Waste)

इसे वेस्ट इलेक्ट्रीकल एंड इलेक्ट्रानिक इक्युप्मेंट भी कहा जाता है। जिसमें क्षतिग्रस्त कम्प्यूटर तथा उसके अवयव मोबाइल फोन C. D. , T. V. रेफ्रिजरेटर CFL, CRT, Picture Tube जैसे पदार्थ शामिल होते हैं। इन पदार्थों से भारी -धातुओं के अतिरिक्त कई अन्य हानिकारक तत्वों का उत्सर्जन होता है जैसे लेड, कैडमियम, एल्युमीनियम, मरकरी, वेरिलियम, कार्बन आदि। यह अनुमान लगाया गया है कि विश्व में लगभग 50 मिलियन टन ऐसे कचरे प्रतिवर्ष उत्सर्जित होते हैं। ई-कचरों में शामिल हानिकारक पदार्थो के निम्नांकित प्रमुख देखे जा सकते है:

  • पृष्ठ प्रवाह के कारण मृदा प्रदूषण में वृद्धि जिससे सूक्ष्म जीवों का विनाश हो जाता है और मृदा में उपस्थित हृयूमस की मात्रा घट जाती है।
  • जल में ऐसे पदार्थों के घुलने से जलीय पारिंतत्र में जैविक आक्सीजन की मांग बढ़ जाती है जो जलीय जीव जन्तुओं के लिए हानिकारक है।
  • भूमिगत जल के प्रदूषित हो जाने से पौधों में ऐसे प्रदूषक मुख्यत: श्वसन तथा प्रकाश संश्लेषण जैसी प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
  • मानव शरीर में ऐसे प्रदूषक कैंसर नेत्ररोग तथा स्नायु विकार जैसी समस्याएंँ उत्पन्न करते हैं।

इन कचरों का निस्तारण सामान्यत: भूमिगत किया जाता है लेकिन पुर्नचक्रण के बाद इनमें से कई दुबारा प्रयोग में लाए जाते हैं।

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