Science and Technology: Defense Production and Supply Department

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प्रतिरक्षा प्रौद्योगिकी (Defense Technology)

रक्षा उत्पादन एवं आपूर्ति विभाग (Defense Production and Supply Department)

1984 ई. में रक्षा उत्पादन विभाग और रक्षा आपूर्ति विभाग का विलय करके रक्षा उत्पादन एवं आपूर्ति विभाग की स्थापना की गई। देश की सशस्त्र सेनाओं को अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित करना व सेनाओं का आधुनिकीकरण करना इस विभाग का प्रमुख उद्देश्य है। इस विभाग के अंतर्गत 39 आयुध कारखाने तथा सार्वजनिक क्षेत्र के आठ संस्थान कार्यरत हैं।

ये आठ संस्थान निम्नलिखित हैं-

हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL- Hindustan Aeronautics Ltd.)

यह रक्षा उत्पादन एवं आपूर्ति विभाग के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। इसका मुख्यालय बेंगलुरू में है इसके अतिरिक्त छह राज्यों में इसके सोलह डिविजन भी हैं। एच. ए. एल. का प्रमुख कार्य लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों व हवाई इंजनों के उपकरणों का डिजाइन तैयार करना तथा उनका निर्माण करना है। जगुआर, डोर्नियर-228, मिग-27 तथा चीता, चेतक व ध्रुव हेलीकॉप्टर का विकास एच. ए. एल दव्ारा ही किया गया है। हेलीकॉप्टर पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए एच. ए. एल ने अपने विमानशाला में देश की पहली इकाई की स्थापना मई, 2000 में की थी। अब एच. ए. एल उपग्रह प्रक्षेपण के लिए ढापचा निर्माण व औद्योगिक तथा मेरीन गैस इंजन बनाने की ओर अग्रसर है।

भारत अर्थमूवर्स लिमिटेड (BEML-Bharat Earth Movers Ltd.)

इसकी स्थापना मई, 1964 में हुई तथा जनवरी, 1965 से इसने कार्य करना प्रारंभ कर दिया। इसका मुख्यालय बेंगलुरू में है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड की तीन उत्पादन इकाइयां बेंगलुरू, कोलार सोना खनन क्षेत्र एवं मैसूर में स्थित हैं जबकि सहायक ढलाई इकाई, तारीकेरे (कर्नाटक) में स्थित है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड की उत्पादन इकाइयों दव्ारा मुख्य रूप से मूविंग मशीनों, जैसे-भारी बोझ उठाने वाले ट्रक तथा डीजल इंजन आदि का निर्माण किया जाता है।

भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (BEL-Bharat Electronics Ltd.)

इसकी स्थापना 1954 में की गयी थी। इसका मुख्यालय बेंगलुरू में है तथा इसकी कुल नौ उत्पादन इकाइयां बेंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद, मछलीपट्‌टनम, पुणे, तलोजा, पंचकुला, गाजियाबाद और कोरदव्ार में स्थित हैं। बी. ई. एल. के सेना के अतिरिक्त आकाशवाणी, दूरदर्शन, दूरसंचार, पुलिस तथा मौसम विभाग आदि को उपकरणों की आपूर्ति की जाती है।

भारत डायनॉमिक्स लिमिटेड (BDL-Bharat Dynamics Ltd.)

इसकी सथापना 1970 में की गई। इसका मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है तथा तथा इसकी दो इकाइयाप कंचनबाग (हैदराबाद) और भानूर (मेडक जिले) में कार्यरत हैं। इस संस्थान पर देश के प्रमुख प्रक्षेपास्त्रों (Missiles) जैसे- पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल, नाग, धनुष आदि के उतपादन उत्तरदायित्व है। इस संस्थान दव्ारा देश के अर्द्ध-सैनिक बलों के लिए भी शास्त्रों का निर्माण किया जा रहा है।

मझगापव डॉक लिमिटेड (MDL- Manjhgaon Dock Ltd.)

जलपोत निर्माण के मामलों में यह देश का सबसे बड़ा यार्ड है। इसका मुख्यालय मुंबई में है तथा इसकी तीन इकाइयाप मुंबई, न्हावा और मंगलौर में कार्यरत हैं। मझगापव डॉक लिमिटेड दव्ारा भारतीय नौसेना के लिए पनडुब्बियों, नौकाओं, प्रक्षेपास्त्र, युद्धपोतों, विध्वसोंं तथा कोस्ट गार्डों के लिए गश्ती नौकाओं आदि का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा यह संस्थान समुद्रों में पाइप बिछाने उसकी कोटिंग का कार्य भी करता है।

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL- Goa Shipyard Ltd.)

भारतीय नौसेना व तट रक्षक बलों के लिए विभिन्न प्रकार के जलपोतों व जहाजों का निर्माण एवं मरम्मती कार्य गोवा शिपयार्ड लिमिटेड दव्ारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त गैर-सैनिक क्षेत्रों के लिए भी जलपोतों व जहाजो का निर्माण व मरमती कार्य इस उपक्रम के दव्ारा किया जाता है। यह उपक्रम वास्कोडिगामा में स्थित है।

गार्डन रीच वर्कशॅप लिमिटेड (GRWL-Garden Reach Workshop Ltd.)

इसका मुख्यालय कोलकाता में है। इसकी कुल सात इकाइयाप है, जिनमें से छह कोलकाता व इसके आस पास है तथ एक डीजल इंजन संयत्र राची (झारखंड) में कार्यरत है। इस कंपनी के तीन प्रमुख विभाग है- जहाजरानी, इंजीनीयरिंग, इंजन विभाग।

मिश्रधातु निगम लिमिटेड (MDNL- Mishra Dhatu Nigam Ltd.)

इसकी स्थापना 1973 में हैदराबाद में की गई थी। इस उपक्रम में विभिन्न प्रकार की मिश्रधातुओं का निर्माण किया जाता है। इन मिश्रधातुओं के अंतर्गत सुपर मिश्रधातु, मैराजिंग इस्पात, ताप रोधक मिश्रधातु, टंगस्टन, मोलिबेडनम, कंट्रोल्ड एक्सपेंशन मिश्रधातु आदि आते हैं। यह उपक्रम देश के रक्षा, परमाणु ऊर्जा, एयरोनॉटिक्स आदि के सामरिक महत्व की जरूरतों को पूरा करने व उनमें आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में भी कार्यरत है।

प्रक्षेपास्त्र व उसके प्रकार (Missile and Its՚ Types)

प्रक्षेपास्त्र किसी पिंड को अधिकतम दूरी तक फेंकने की एक प्रणाली है। इसकी तकनीक मूलत: प्रक्षेप गति पर आधारित होती है। यदि किसी पिंड को क्षैतिज तल से 450 कोण पर प्रक्षेपित किया जाए तो वह अधिकतम दूरी तक पहुपच सकता है। इसी सिद्धांत पर प्रक्षेपास्त्रों का विकास किया जाता है।

प्रक्षेपण मार्ग के आधार पर प्रक्षेपास्त्र को दो वर्गों में बापटा जा सकता है-

  • बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile)
  • क्रूज म़िसाइल (Cruise Missile)
बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile)

प्रक्षेपित होने के बाद यह मिसाइल बाह्य वायुमंडल में चली जाती है एवं पुन: पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर गुरुत्वाकर्षण बल के सहारे पृथ्वी पर स्थित लक्ष्य पर वार करती है।

क्रूज मिसाइल (Cruise Missile)

यह मिसाइल पृथ्वी के सतह के समानांतर काफी करीब से अधिकतम समय तक चलती है ताकि शत्रुओं के रडार के पहचान से बच सके। लेकिन, जब यह अपने लक्ष्य के समीप पहुपचती है तो अचानक काफी ऊपर उठकर सुपरसोनिक चाल से चलती है और लक्ष्य पर प्रहार करती है।

युद्ध़़़क्षेत्र में उपयोग के आधार पर प्रक्षेपास्त्र को दो वर्गों में बापटा जा सकता है-

  • टेक्टिल (Tactical)
  • सामारिक (Strategical)

टैक्टिल के अंतर्गत मिसाइल का उपयोग युद्धक्षेत्र में तात्कालिक रूप से किया जाता है जबकि सामारिक उपयोग में प्रक्षेपास्त्रों का प्रयोग दुश्मन देश की सीमाओं में घुसकर सामरिक ठिकानों पर वार करने में किया जाता है।

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