Science and Technology: Disaster Management Assistance (DMS) Program

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स्चाांर, नौवहन/नौसंचालन तथा मौसमविज्ञानीय डपग्रह प््रण्ज्ञाली (Communication and Meteorological Satellite System)

इन्सैट रिपोर्टिंग प््रण्ज्ञाली (INSAT Reporting System)

  • इसमें सुवाह्य तथा हस्त-धारित टर्मिनलों के साथ बंटा हुआ चैनलों का उपयोग करते हुए निम्न बिट दर इक-तरफा रिपोर्टिंग सेवा शामिल है। यह अनोखा, सुदूर स्थल से प्रयोक्ता-मुख्यालय से इक-तरफा मेसेजिंग, हब के रूप में अंतरिक्ष विभाग के दिल्ली भू स्टेशन (डी. ई. एस.) के साथ प्रचालित है। यह एक परीक्षात्मक सेवा है। प्रयोक्ता टर्मिनलों से लघु संदेशों को उपग्रह के जरिए हब को रिले किया गया है तथा तुरंत फैक्स या डेटा लिंक के दव्ारा उसे संबंधित प्रयोक्ता मुख्यालय को प्रेषित किया जाता है। इस रिपोर्टिंग सेवा को लघु हस्त-धारित टर्मिनलों का उपयोग करते हुए प्रदान किया जाता है। स्थिति सूचना हेतु रिपोर्टिंग टर्मिनल को एक जी. पी. एस. अभिग्राही को संलग्न करने हेतु प्रावधान है।
  • जी-सैट-2 अपने मिशन कालावधि, समाप्त करने के कारण, एम. एस. एस सेवाएँ केवल इन्सैट-3-सी के जरिए ही संभव हो पाया। इन्सैट रिपोर्टिंग प्रणाली इसमें सुवाह्य तथा हस्त-धारित टर्मिनलों के साथ बंटा हुआ चैनलों का उपयोग करते हुए निम्न बिट दर इक-तरफा रिपोर्टिंग सेवा शामिल है। यह अनोखा, सुदूर स्थल से प्रयोक्ता-मुख्यालय से इक-तरफा मेसेजिंग, हब के रूप के अंतरिक्ष विभाग के दिल्ली भू स्टेशन (डी. ई. एस) के साथ प्रचालित है। यह एक परीक्षात्मक सेवा है। प्रयोक्ता टर्मिनलों से लघु संदेशों को उपग्रह के जरिए हब को रिले किया गया है तथा तुरंत फैक्स या डेटा लिंक के दव्ारा उसे संबंधित प्रयोक्ता मुख्यालय को प्रेषित किया जाता है। इस रिपोर्टिंग सेवा को लघु हस्त-धारित टर्मिनलों का उपयोग करते हुए प्रदान किया जाता है। स्थिति सूचना हेतु रिर्पोटिंग टर्मिनल को एक जी. पी. एस. अभिग्राही को संलग्न करने हेतु प्रावधान है। जी-सैट-2 अपने मिशन कालावधि, समाप्त करने के कारण, एम. एस. एस. सेवाएँ केवल इन्सैट 3-सी के जरिए ही संभव हो पाया। जी. पी. एस. सहायता प्राप्त भू-संवर्धित नौसंचालन (गगन) भारतीय उपग्रह आधारित संवर्धित प्रणाली, गगन अंतिम प्रचालात्मक चरण में है एवं जून 2013 तक प्रचालन तथा प्रमाणन के लिए तैयार हो जाने की संभावना है। गगन-एफ. ओ. पी. में, सभी भू-तत्व जैसे कि 15 भारतीय नौसंचालन संदर्भ भू-केन्द्र (आई. एन. आर. ई. एस.) , 2 भारतीय नौसंचालन मुख्य नियंत्रण केन्द्र (आई. एन. एम. सी. सी.) एवं 2 भारतीय नौसंचालन भू-ऊर्ध्व कड़ी केन्द्रों (आई. एन. एल. यू. एल.) की स्थापना एवं समाकलन किया गया है। वर्तमान ओ. एफ. सी. आंकड़ा संचार जाल के अतिरिक्त, लगभग सभी आई. एन. आर. ई. एस. साईट एवं आई. एन. एम. सी. सी. के बीच वीसैट कड़ी की स्थापना की गई है। नई दिल्ली में तृतीय आई. एन. एल. यू. एस. की स्थापना एवं दव्तीय ओ. एफ. सी. नेटवर्क प्रगति में है एवं मार्च 2012 तक पूर्ण किए जाने की संभावना है।
  • प्रारंभिक प्रणाली स्वीकृति परीक्षण का प्रमुख मील पत्थर क्रियाकलाप सभी भू-तत्वों की स्थापना एवं समाकलन के उपरांत सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। आईजेक दव्ारा विकसित आई. जी. एम. एम. एल. डी. एफ. एल्गोरिथ्म का चयन तकनीकी सामंजस्य के जरिए किया गया है। आई. एन. एम. सी. सी. सॉफ्टवेयर सहित इस मॉडल का विकास एवं समावेशन प्रगति में है। जीसैट-8 के प्रमोचन के उपरांत, गगन नौसंचालन नीतभार का कक्षीय परीक्षण एवं परीक्षण एवं मूल्यांकन का आयोजन किया गया एवं नीतभार का समाकलन बैंगलूर आई. एन. एल. यू. एस. पश्चिम के साथ पूरा किया गया। स्थायित्व परीक्षण जो अभी प्रगति में है की समाप्ति के उपरांत बिना प्रमाणन के गगन संकेत प्रयोक्ताओं के लिए उपलब्ध रहेगा। गगन के अगले प्रमुख मील पत्थर क्रियाकलाप जीसैट-10 का प्रमोचन है एवं बेंगलूरू आई. एन. एल. यू. एस. -पूर्व के साथ इसका समाकलन, जीसैट-8 के साथ नई दिल्ली आई. एन. एल. यू. एस. का समाकलन एवं जून 2012 के दौरान अंतिम प्रणाली स्वीकृति जाँच के आयोजन उपरांत जुलाई 2013 के दौरान प्रणाली प्रमाणन का अनुसरण किया जाएगा।

टापदा प््रबंध्ज्ञन स्हायत (डी. एम्. एस्.) कर्यक्रम (Disaster Management Assistance (DMS) Program)

इसरो का आपदा प्रबंधन सहायता कार्यक्रम, अंतरिक्ष एवं हवाई प्रणालियों से उत्पन्न एवं सेवाओं के जरिए देश में आपदा प्रबंधन के प्रति निरंतर सहायता उपलब्ध कराता है। राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केन्द्र में स्थापित डी. एम. एस. निर्णय सहायता केन्द्र (डी. एम. एस. -डी. एस. सी.) प्राकृतिक आपदा जैसे कि बाढ़, चक्रवात, कृषि सूखा, भू-स्खलन, भूकंप एवं दावानल का मॉनिटरन करने में व्यस्त है। वायु-अंतरिक्ष प्रणालियों से जनित सूचना निकट वास्तविक समय पर संबंधितों को निर्णय लेने में मदद देने हेतु प्रसारित किया जाता है।

  • बाढ़: असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंश्चिम बंगाल, उड़ीसा एवं केरल राज्यों में सभी प्रमुख बाढ़ों का मॉनिटरन किया गया और लगभग 245 मानचित्र संबंधित विभागों को विकीर्णित किया गया। बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली (एफ. एम. आई. एस.) जिसका विकास बिहार राज्य के लिए किया गया, को सॉफ्टेयर एवं आंकड़ा आधारित परत उपलब्ध कराने के दव्ारा सहायता प्रदान किया गया। उड़ीसा के लिए एफ. एम. आई. एस. का विकास प्रगति में है। जुलाई 18,2011 को असम के माननीय मुख्यमंत्री दव्ारा असम बाढ़ संकट क्षेत्रीकरण अटलस विमोचित किया गया। बिहार के संबंध में समरूप कार्य किया जा रहा है। गोदावरी तट के लिए लिडार आंकड़ा से 0.5 मी. कन्टूर अंतराल का प्रयोग करते हुए बाढ़ की जलमग्न मॉडल पर अनुसंधान व विकास क्रियाकलाप एवं बाढ़ चेतावनी प्रणाली के विकास के लिए प्रयास किया जा रहा है।
  • सूखा: देश के 13 राज्यों में कृषि सूखे की व्यापकता एवं निर्धारण मासिक आधार पर, खरीफ मौसम के दौरान उपग्रह आंकड़ा एवं भू-सूचना का प्रयोग करते हुए जिला एवं उप-जिला स्तर में किया जाता है। एम. ओ. डी. आई. एस. आंकड़ा से लघुतरंग कोण ढाल सूचक (एस. ए. एस. आई.) प्रतिबिंबों से व्युत्पन्न फसल बुआई के लिए अनुकूल क्षेत्र प्रचालानात्मक रूप में भेजा जा रहा है। फसल बोने के लिए उत्तम क्षेत्र मौसम पूर्व कृषि परिस्थिति का प्रत्यक्ष सूचक है। दावानल: अग्नि मौसम के दौरान (फरवरी से जून तक) दिन में दो बार सही समय पर सक्रिय दावानल चेतावनी जनित की गई। यह सूचना निर्णय सहायता केन्द्र -भारतीय वन अग्नि प्रतिक्रिया तथा मूल्यांकन प्रणाली वेबसाईट एवं भुवन पर वेब-पोस्टिंग दव्ारा पूरे देश में सभी राज्य वन विभागों के 400 नोडल अधिकारियों को भेजी गई। अग्नि चेतावनी के स्वचालित उत्पादन के लिए एवं एफ. एस. आई. को उत्पादन भेजने हेतु सॉफ्टवेयर विकास प्रगति में हैं। अग्नि क्षति मूल्यांकन एवं 4 प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में अग्नि खतरा दर प्रगति कर रहा है। भूस्खलन एवं भूकंप सितंबर 2011 में सिक्किम भूकंप के तुरंत बाद भूकंप से हुई हानि निर्धारित करने के लिए पूर्व एवं पश्च्‌ -भूकंप उपग्रह आंकड़े प्राप्त किए गए। सितंबर 29 के उपरांत उपलब्ध मेघ मुक्त आंकड़ें एवं सूक्ष्म तरंग आंकड़ों का प्रयोग करते हुए सिक्किम के आस-पास भूकंप की वजह से हुए लगभग 1196 नए भू-स्खलनों का मानचित्रण किया गया। आपाताकालीन प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय आंकड़ा आधार (एन. डी. ई. एम.) देश के लिए आपदा/आपातकालीन प्रबंधन सहायता हेतु आंकड़ों के जी. आई. एस. आधारित भंडारण के रूप में एन. डी. ई. एम. की प्राप्ति की जा रही है। एन. आर. एस. सी. शादनगर में एन. डी. ई. एम. भवन का निर्माण कार्य पूरा हो रहा है। इसरों से एवं कुछ अन्य संगठनों से पहले ही प्राप्त किए गए डेटाबेस को इंटरिम सर्वर में डाल दिया गया है।
  • कार्टोडेम: कार्टोसैट-1 स्टीरियों आंकड़ा उपयोगिता के मिशन लक्ष्यों में से एक हैं- कार्टोडेम। कार्टोडेम पर परियोजना 1/3 आर्क-सेक (-10 मि) अंतराल के पोस्टिंग तथा तदनुरूप आर्थी प्रतिबिंब के साथ अंकीय उन्नतांश मॉडल (डी. ई. एम) जनित करने के लिए शुरू की गयी हैं। संपूर्ण देश के लिए मुख्यत: बृहत पैमाने के मानचित्रण और भूभाग मॉडलिंग उपयोगों को प्रदान करने के लिए पूरे देश के लिए कार्टोडेम और आर्थो प्रतिबिंब जनित किया गया है। ये आंकड़ा सेट 8 मी. के ऊर्ध्वधर उन्नतांश परिशुद्धताओं और 15 मी. के प्लानीमेट्रिक परिशुद्धता के साथ डब्ल्यम. जी. एस. -84 प्रणाली में 1: 25,000 पैमाने पर 7.5 के स्थलाकृतिक मानचित्र टैल्स से प्राप्त किये गये है। अनुसंधानकर्ताओं और प्रयोक्ता समुदाय के प्रयोजन हेतु 1 आर्क सेकेंड कार्टोडेम को भुवन भूपोर्टल में डाला जा चुका है।
  • भुवन: इसरो के भू-पोर्टल और भारतीय भू प्रेक्षण आंकड़ा आभासी सेवाओं के लिए प्रवेश दव्ार, राष्ट्र के लिए भारतीय भू-प्रेक्षण आंकड़ा सीवनहीन रूप में 5.8 मी. आकाशी विभेदन और चयनित नगरों के लिए 1 मी आकाशाीय विभेदन प्रदर्शित करता है। दो साल पहले पूरा किया गया भुवन पोर्टल ने (Bhuvan Portal) डाउनलोड सुविधाओं के साथ बहुत सारे नये कार्य एवं सेवाएं शामिल कर लिया है। भुवन, एन. आर. एस. सी खुला ई. ओ. आंकड़ा अभिसंग्रहण (एन. ओ. ई. डी. ए.) के जरिए प्रयोक्ताओं को उपग्रह आंकड़ों का चयन, ब्राउस तथा डाउनलोड करने की सुविधाएं प्रदान करता है। इस समय, प्रयोक्ता कार्टोडेम-1 आर्क सेकेंड का उन्नतांश आंकड़ा तथा उन्नत व्यापक क्षेत्र संवेदक आंकड़ा (56 मी.) डाउनलोड कर सकते हैं। निकट भविष्य में प्रयोक्ता समुदाय को विषयवस्तु सेवाएँ और ऑनलाइन भू संसाधन सेवाएं उपलब्ध कराने की भी योजना हैं। पिछले वर्ष हासिल किए गए विशिष्ट उपलब्धियों में, बहु-भाषीय क्षमता (अंग्रेजी, हिन्दी, तेलगु, और तमिल) के साथ ओपन सोर्स कंटेट प्रबंधन प्रणाली विषयवस्तुक प्रबंधन प्रणाली का क्रियान्वयन, एकल साइन-ऑन की ओर केन्द्रीय प्रमाणीकरण सेवा, सुधार हेतु आम जनता के साथ अन्योन्यक्रिया उपलब्ध कराने के लिए ऑन-लाइन चर्चा फोरम, स्वदेशी भुवन-2 डी , मोबाइल सुसंगतता, अंतर-प्रचालनीयता की ओर ओ. जी. सी. वेब से सेवाएं, आंध्र प्रदेश, स्कूल सूचना प्रणाली के लिए ओ. जी. सी. सेवाएं, भारतीय दवानल प्रतिक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली, भारतीय भू-पोर्टल (एन. एस. डी. आई) । ऑन-लाइन आकार फाइल का जनन और प्रयोक्ता आंकड़ा शेयरिंग, एन. आर. एस. सी. खुला ई. ओ. आंकड़ा अभिग्रहण (एन. ओ. ई. डी. ए) 102 नगरों के लिए उच्च विभेदन आंकड़ा और पाँच प्रमुख नगर शिल्लांग, दिल्ली, पुणे, चेन्नई और हैदराबाद में करीब 2000 छात्रों आवृत्त करते हुए भुवन जागरूकता कार्यशाला का आयोजन शामिल हैं।

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