Science and Technology: Upcoming Earth Observation Mission

Glide to success with Doorsteptutor material for IAS : Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

स्चाांर, नौवहन/नौसंचालन तथा मौसमविज्ञानीय उपग्रह प्रणाली (Communication and Meteorological Satellite System)

आगामी भू-प्रेक्षण मिशन (Upcoming Earth Observation Mission)

रिसैट-1 (RISAT-1)

राडार प्रतिबिंबन उपग्रह (रिसैट-1) क्रमश: अपरिष्कृत, शुद्ध और उच्च स्थानिक विभेदन के साथ प्रतिबिंब प्रदान करने के लिए बहु ध्रुवीकरण और बहु-विभेदन मोड (स्कैनसार, स्ट्रिप और स्पॉट मोड) में 5.35 गी. ह. पर प्रचालित एक सी. बैंड संश्लेषी दव्ारक राडार (एस. ए. आर.) नीतभार का वहन करता है। एस. ए. आर. एक सक्रिय संवेदक होने के नाते, विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रमी के सूक्ष्मतंरग क्षेत्र में प्रचालन करते हुए, सभी मौसम में प्रतिबिंबन करने की क्षमता रखता है। एस. ए. आर. नीतभार प्रसारण/अभिग्राही (टी. आर.) माडयूलों का उपयोग करते हुए सक्रिय चरणबद्ध व्यूह प्रौद्योगिकी पर आधारित है जो विभिन्न उपयोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 1 मी. , से 50 मी. के स्थानिक विभेदन और 10 से 240 कि. मी. के प्रमार्ज प्रदान करते हुए बहु-मोड क्षमता हासिल करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिकी दक्षता प्रदान करेगा। रिसैट-1 का अवरोहण मोड में स्थानीय समय 06.00 घंटा होगा। इस उपग्रह का भार लगभग 1851 कि. ग्रा. है। और इसमें 4.8 कि. वा. पॉवर संभालने की क्षमता है। रिसैट-1 का प्रमोचन मार्च-अप्रैल 2012 के दौरान पी. एस. एल. वी. -सी 19 (एक्स एल) दव्ारा 476 कि. मी. की कक्षा में करना निर्धारित है। 3 अक्षीय अभिवृत्ति अर्जित करने के बाद, कक्षा को सी. आर. एस. मोड में 12 दिन के आंतरिक आवर्तन के अतिरिक्त लाभ और 26 दिन के पुनरागमन के साथ 536 कि. मी. तक संवर्धित किया जाएगा। चरणबद्ध एन्टेना सहित कई जटिल प्रौद्योगिकियों का विकास इस स्वदेशी सूक्ष्मतरंग सुदूर संवेदन उपग्रह मिशन की विशिष्टता है। यह उपग्रह जाँच के अंतिम चरण में है और इसे प्रमोचन हेतु तैयार किया जा रहा है।

सरल (SARAL)

  • एर्गोस (ARGOS) तथा अल्टिका (ALTIKA) हेतु उपग्रह (सरल) इसरो-सी. एन. ई. एस. का संयुक्त मिशन है और इसका प्रमोचन लगभग 800 कि. मी. की तुंगता पर अवरोहण नोड में शाम 6 बजे के स्थानीय समय के साथ सूर्य-तुल्यकाली कक्षा में पी. एस. एल. वी. सी 20 दव्ारा किया जाएगा। सी. एन. ई. एस. दव्ारा प्रदत्त के. ए. बैंड तुंगतामापी, अल्टिका महासागर उपयोग हेतु 35.75 गीगार्हत्स पर प्रचालन करता है। एक दव्य आवृत्तिवाले समग्र पॉवर प्रकार का सूक्ष्मतरंग रेडियोमापी (23.8 और 37 गीगाहर्त्स) को तुंगतामापी के माप पर क्षोभमंडलीय प्रभाव को सुधारने के लिए तुंगतामापी के साथ समाहित किया गया है। उपग्रह के साथ समेकित डाप्लर ऑबिटोग्राफी और रेडियो अवस्थिति (डी. ओ. आर. आई. एस.) कक्षा के यथार्थ निर्धारण में सहायता करती है। एक लेज़र रेट्रोपरावर्तक व्यूह पूरे मिशन के दौरान यथार्थ कक्षा निर्धारण प्रणाली और तुंगता प्रणाली के कई बार अंशांकन करने में सहायता करता है। सरल/एर्गोस आँकड़ा संग्रहण प्रणाली, समुद्री बोया से विविध आँकड़ा संग्रहण करने के बाद में इसे संसाधन और वितरण हेतु एर्गोस भू-खंड को प्रसारित करने के लिए वैश्विक एर्गोस आंकड़ा संग्रहण प्रणाली के विकास और प्रचालनात्मक क्रियान्वयन हेतु इसरो और सी. एन. ई. एस. का एक संयुक्त अंशदान है। इसके अतिरिक्त, एर्गोस नीतभार छोटे संदेशों को एक अभिग्राही से सज्जित आँकड़ा अभिग्रहण मंच को सीधा प्रसारित करता है। सरल नीतभार को एस. एस. बी-1 (लघु उपग्रह बस) नामक 400 - 450 कि. ग्रा. श्रेणी के लघु-उपग्रह बस में समायोजित किया जाएगा।
  • सरल, प्रचालनात्मक और अनुसंधान प्रयोक्ता समुदायों को समुद्री मौसम विज्ञान और समुद्र स्थिति के पूर्वानुमान प्रचालनात्मक समुद्र विज्ञान, निष्ठ पूर्वानुमान, जलवायु मॉनीटरन और महासागर, भू प्रणाली एवं जलवायु अनुसंधान की सहायता के लिए आँकड़ा उत्पाद प्रदान करेगा। अंतरिक्षयान की मुख्य ढाँचे की प्रणालियों का संविरचन किया गया है और ये जाँच के उन्नत चरण में है। इस उपग्रह का प्रमोचन 2012 की अंतिम तिमाही के दौरान करने की योजना बनाई गई है।

भावी भू-प्रेक्षण मिशन (Future Earth Observation Mission)

भावी भू-प्रेक्षण कार्यक्रम विषयवस्तु श्रृंखला के उपग्रह यानि भूमि एवं जल संसाधन के साथ-साथ सभी मौसम क्षमता के लिए रिसोर्ससैट, कार्टोसैट, रिसैट श्रृंखला:-समुद्री संसाधनों के अध्ययन के लिए ओशनसैट श्रृंखला, नीतभारों में विनिर्दिष्ट वैज्ञानिक सुधार के साथ मौसम विज्ञान एवं वायुमंडल के लिए इन्सैट तथा मेघा-ट्रॉपिक्स की निरंतरता सुनिश्चित करेगा। पेंक्रोमेटिक मोड में 0.25 मी. के और बहु-आकाशीय मोड में 1 मी. के आकाशीय विभेदन के साथ कार्टोसैट-3, उन्नत उच्च विभेदन वाला उपग्रह आर. एस. उपयोग परियोजनाओं के लिए भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उच्च विभेदन मानचित्रण क्षमता को बढ़ाएगा। इसका उद्देश्य प्रचालनात्मक वर्कहार्स मिशनों की निरंतरता और संवर्धित सेवा प्रदान करना, भावी मिशनों की प्रौद्योगिकी में उन्नयन को अपनाना, ऑन-बोर्ड और भू-प्रणाली दोनों के लिए नयी प्रौद्योगिकियों का विकास करना और पारस्परिक लाभ प्राप्त करने के लिए अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ भागीदार बनना है।

अंतरिक्ष उपयोग (Space Usage)

दूर शिक्षा (एडुसैट कार्यक्रम) (Distance Education (Edu Sat Program) )

  • एडुसैट ′ भारत का पहला विषयवस्तुपरक उपग्रह है, जोकि पूरी तरह शैक्षिक सेवाओं के लिए समर्पित है, का उपयोग विस्तृत रूप में अन्योन्य क्रिया शैक्षिक सुपुर्दगी विधाओं जैसे इकतरफा टी. वी. प्रसारण, वीडियो कॉन्फरेन्सिंग, कंप्यूटर कॉन्फरेन्सिंग, वेब आधारित अनुदेश आदि के लिए व्यापक रूप में उपयोग किया जा रहा है। एडुसैट का बहुमुखी उद्देश्य रहा है- पाठयक्रम आधारित शिक्षा में उपयोगी होना, शिक्षक-प्रशिक्षण का प्रभावी नियोजन, गुणवत्ता संसाधन युक्त व्यक्तियों तथा नये प्रौद्योगिकी तक अभिगम उपलब्ध कराना, अंतत: जिसका परिणाम है भारत के हर कोने तक शिक्षा को पहुँचाना। एडुसैट ने स्कूलों, कॉलेजों व शिक्षा के उच्च स्तरों तक संपर्क को उपलब्ध कराया है तथा विकास संचार सहित अनौपचारिक शिक्षा को भी समर्थन दिया है।
  • एडुसैट कार्यक्रम को, तीन चरणों में अर्थात पायलट, अर्ध प्रचालनात्मक तथा प्रचालनात्मक चरणों मे कार्यान्वित किया गया है। पायलट परियोजनाओं को 2004 के दौरान, 300 टर्मिनलों के साथ कर्नाटक, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में आयोजित किया गया। पायलट परियोजनाओं के अनुभव को अर्ध-प्रचालनात्मक चरण में अपनाया गया। अर्ध-प्रचालनात्मक चरण के दौरान बहुतेक सभी राज्यों तथा प्रमुख राष्ट्रीय एजेन्सियों को एडुसैट कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया। इस समय, राज्य सरकार व अन्य प्रयोक्ता एजेन्सियों दव्ारा निधिसंग्रह करते हुए नेटवर्को को प्रचालनात्मक चरण के तहत विस्तृत किया जा रहा है। एडुसैट कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यान्वित नेटवर्क में दो तरह के टर्मिनल हैं अर्थात उपग्रह अन्योन्यक्रिया टर्मिनल तथा केवल अभिग्रहण टर्मिनल। अभी तक, देश के 25 राज्यों तथा 3 संघ शासित राज्यों को आवृत्त करते हुए करीबन 55,000 स्कूलों तथा कॉलेजों में (4209 एस. आई. टी. व 51165 आर. ओ. टी.) संपर्क करते हुए कुल 80 नेटवर्कों को कार्यान्वित किया गया है। चालू वर्ष में उत्तराखंड व झारखंड राज्यों को एडुसैट नेटवर्क दव्ारा हाल ही में जोड़ा गया है। प्रति वर्ष करीब 15 मिलियन विद्यार्थी एडुसैट कार्यक्रम दव्ारा लाभान्वित हो रहे हैं।
  • एडुसैट (जीसैट-3) उपग्रह को सितंबर 2010 से बंद कर दिया गया है। जिससे इसरों के दूर-शिक्षा, दूर-चिकित्सा तथा वी आर सी परियोजनाओं पर आंशिक रूप से प्रभाव पड़ा है। जीसैट-3 को बंद करने के बाद, दूर शिक्षा नेटवकों के मार्ग (ट्रॉफीक) को अन्य इसरों उपग्रहों के लिए स्थानांतरित किया गया है। हमने केयू. बैंड में प्रचालित करीब 805 के स्थानांतरण को पहले ही दूर-शिक्षा नेटवकों को जीसैट-3 से इन्सैट-4 सी. आर. तथा विस्तारित सी-बैंड नेटवर्को को इन्सैट-3 ए तथा इन्सैट-3 सी को आंशिक रूप से स्थानांतरित कर दिया गया है।
  • एक तकनीकी आधार सहायता प्रशिक्षण केन्द्र को गुवाहाटी, असम में, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विविध राज्य नेटवर्क के सभी सुदूर साइटों, हब तथा शिक्षण-केन्द्र लगातार प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया है। भविष्य में, ऐसे ही टी. एस. टी. सी. को देश के उत्तरी भाग अर्थात उत्तराखंड जम्मू व कश्मीर आदि में स्थापित करने की योजना है।
  • करीब 366 उपग्रह अन्योन्यक्रिया टर्मिनलों को राष्ट्रीय प्रयोक्ता जैसे आई. जी. एन. ओ. यू. , सी. आई. ई. टी. ए. आई. सी. टी. ई. वी. पी. /डी. एस. टी व सी. ई. सी को, उत्तम दृश्य-श्रव्य अन्योन्यक्रिया हेतु कक्षा परिधियों व पढ़ाई प्रबंधन प्रणाली के साथ अद्यतन किया गया है। साथ ही, इन्सैट-4 सी. आर (केयू बैंड) में एडुसैट नेटवर्क पर प्रसारित कार्यक्रमों की उपयोगिता तथा गुणवत्ता निर्धारित करने के बारे में फीडबेक प्राप्त करने हेतू डेकू, अहमदाबाद में एक ‘नेटवर्क मानीटरन सुविधा’ को स्थापित किया गया है। इस समय, समग्र मानीटरन क्षमता 30 दूर-शिक्षा नेटवर्कों के लिए है। फिर भी, किसी भी समय में, चयन करते हुए एक साथ 10 नेटवर्कों का मानीटरन किया जा सकता है।

इसरो ने प्रयोक्ताओं को विशेष आवश्यकताओं के साथ नेटवर्क की स्थापना की है जैसे:

  • गुजरात के अंध लोगों के संघ दृष्टिमान्द्य लोगों हेतु।
  • भारत के पुनर्वास परिषद्।
  • केरल में केन्द्रीय मानसिक रोगविज्ञान संस्थान का नेटवर्क।
  • केरल में बुद्धि मंदों के लिए सी-डाक के साथ एक नेटवर्क।

दूरचिकित्सा (Tele Therapy)

  • दूरचिकित्सा, सामाजिक लाभ हेतु अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का एक विशिष्ट उपयोग है। दूरचिकित्सा कार्यक्रम जिसे 2001 में शुरू किया गया है, नगर तथा महानगरों के प्रमुख अस्पतालों का भारतीय उपग्रहों दव्ारा सुदूर/ग्रामीण/मेडिकल कॉलेज अस्पतालों व मोबाइल यूनिटों के साथ जोड़ता है। दूरचिकित्सा नेटवर्क जम्मू व कश्मीर, लद्दाख, अंडामन व निकोबार दव्ीपसमूह, उत्तर पूर्वी राज्यों सहित अनेक राज्यों/क्षेत्रों तथा अन्य मुख्यभूमि राज्यों को आवृत्त करता है। केरला, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, पंजाब, पश्चिम बंगाल, उड़िसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड तथा राजस्थान राज्यों के कई जन जाति जिलों को दूरचिकित्सा कार्यक्रम के तहत आवृत्त किया गया है। इस समय, इसरो के दूरचिकित्सा नेटवर्क, 306 सुदूर/ग्रामीण/जिला/मेडिकल कॉलेज अस्पताल तथा 16 मोबाइल दूरचिकित्सा यूनिटों से जोड़ते हुए 60 विशेष अस्पताल सहित, करीब 382 अस्पतालों को आवृत्त करता है। मोबाइल दूरचिकित्सा यूनिटों, नेत्र विज्ञान, हृदय विज्ञान, विकिरण विज्ञान, डयाबिटॉलजी, मेमोग्राफी, सामान्य चिकित्सा, महिला एवं शिशु स्वास्थ्य उपचार के विविध क्षेत्रों को आवृत्त करता है।
  • जहाँ अंतरिक्ष विभाग, दूरचिकित्सा प्रणाली सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर एवं संचार उपकरण के साथ-साथ उपग्रह बैंड विस्तार को प्रदान करता है। वहाँ राज्य सरकारों व विशेष अस्पतालों को अपने आधारभूत संरचना-मानवशक्ति व सुविधा सहायता हेतु निधि का आबंटन करना होगा। इस संबंध में, विविध राज्य सरकारों, गैर सरकारी कार्यालयों, विशेष अस्पतालों व उद्योग के साथ सहयोग में प्रौद्योगिकी विकास, मानदंड एवं लागत प्रभावी प्रणालियों का विकास किया गया है। अंतरिक्ष विभाग, एक समझौता ज्ञापन दव्ारा दोनों पक्षों के बीच एक समझौता लाने हेतु राज्य सरकारों एवं विशेष अस्पतालों के साथ अन्योन्यक्रिया स्थापित करता है। जीसैट-3 (एडुसैट) को बंद करने के कारण, उपग्रह बैंड विस्तार की कमी के कारण कुछ नेटवर्क प्रचालक, आंशिक रूप से प्रभावित हुए थे। वर्ष के दौरान, दूरचिकित्सा के अंतर्गत देश भर में नोडों का प्रवसन और प्रचालनीकरण क्रियाकलाप शामिल है। अन्य उपग्रहों को मार्ग का अंतरण किया गया है तथा अभी तक 168 नोडों को पुन: प्रचालनीकृत किया गया है, जिसमें राजस्थान में अधिकाधिक नोड (38 नोड) हैं। इसरो, तकनीकी सहायता तथा दूरचिकित्सा नोडों के अनुरक्षण व प्रचालन हेतु तकनीकी सहायता भी प्रदान करता है।

Developed by: