Science and Technology: Housing and Household Appliances, Construction Technology

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दैनिक जीवन में विज्ञान (Science in Daily Life)

आवास एवं आवास संबंद्ध अवयव (Housing and Household Appliances)

निर्माण प्रौद्योगिकी (Construction Technology)

भवन निर्माण के लिए प्रयुक्त प्रविधियों और उपकरणों का अध्ययन निर्माण प्रौद्योगिकी के तहत किया जाता है। इसके अंतर्गत निर्माण प्रबंधन के बारे में जानकारी एकत्र की जाती है। साथ ही निर्माण अभियांत्रिकी क्षेत्र में कौशल अर्जित की जाती है।

सामान्यत: निर्माण चार प्रकार के होते हैं-

  • आवासीय भवन निर्माण।
  • औद्योगिक निर्माण।
  • व्यावसायिक भवन निर्माण
  • भारी सिविल निर्माण।

इनमें से प्रत्येक निर्माण प्रोजेक्ट के लिए विशिष्ट नियोजन, डिज़ाइन, प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

  • प्रीफैब हाऊस (Prefab House) : इन्हें मूल रूप से प्रीफैब्रिकेटेड हाऊस कहा जाता है। वैसे भवन निर्माण जो पैनल (Panels) और मॉड्‌यूल्स के रूप में तैयार किए जाते हैं या परिवहन योग्य खंडों के रूप में निर्मित होते हैं या फिर चलिक घरों (Houses on Wheels) के रूप में बनते है प्रीफैब हाऊस कहलाते हैं। इन घरों में निर्माण में कम श्रम की आवश्यकता होती है।
    • चलित और विनिर्मित घरों का निर्माण एचयूडी बिल्डिंग कोड की सहायता से और मॉड्‌यूर हाऊस का निर्माण आईबीसी (इन्टरनेशनल बिल्डिंग कोड) के तहत किया जाता है।
    • माड्‌यूलर होम्स का निर्माण खंडों में किया जाता है और जब इन्हें निर्माण स्थल पर भेजकर एक पूरा ढापचा तैयार किया जाता है। विनिर्मित घरों (Manufactured Homes) का निर्माण स्टील बीमों पर किया जाता है। इनके पूरे निर्मित खंड को ही निर्माण स्थल तक पहुपचाया जाता है। दूसरी ओर चलित घरों (Mobile Homes) का निर्माण चक्के पर किया जाता है। अत: ये गतिमान हो सकते है।
    • उल्लेखनीय है कि उत्तरी अमेरिका में बड़ी मात्रा में लकड़ी की उपलब्धता के कारण यहाप लकड़ी निर्मित घरों का प्रचलन हैं। अत: यहाप पर कुछ कंपनियों ने लकड़ी निर्मित घरों का निर्माण शुरू किया। इसी प्रकार ब्रिटेन में भी प्रीफैब्रिकेटेड घर बनाए गए। यहाप पर दव्तीय विश्व युद्ध के बाद अनेक प्रीफेब्रिकेटेड घर बनाए गए।
  • पोर्टा कैबिन (Porta Cabins) : इनका पूर्ण नाम पोर्टेबल कैबिन होता है। ये प्रीफैब्रिकेटेड संरचनाएप मजबूत, सुरक्षित और आरामदायक होती हैं। ये कैबिन प्रकार्यात्मक होते हैं और उपर्युक्त कार्य क्षेत्र प्रदान करते हैं। ग्राहकों की आवश्यकताओं के अनुकूल ही इन कैबिनो का निर्माण किया जाता है। प्राय: सभी स्थानों पर पोर्टा कैबिन बनाए जा सकते हैं।
    • पोर्टा कैबिन का मौलिक ढापचा स्टील के टुकड़ों से निर्मित होता है। इन टुकड़ों की वेल्डींग इस प्रकार की जाती है कि कैबिन की दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों को सुनियोजित ढंग से लगाया जा सके। कैबिन के कोने पर्याप्त मजबूती लिए हाते हैं ताकि एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवहन की समस्या न हो सके। कैबिन की छतों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि जल निकासी सुलभ रहे। कैबिन का रंगरोगन इपॉक्सी जिंक फॉस्फेट प्राइमर और संश्लिष्ट पेंट से किया जाता है। इससे जंग लगने या आग लगने की घटना से बचा जा सकता है।

अग्निशमन उपकरण (Fire Fighting Equipment՚S)

अग्निशमन कार्य के लिए निम्न प्रकार के उपकरणों का उपयोग किया जाता है-

  • फायर डिटेक्टर- आग लगने की जापच करने के लिए इसका इस्तेमाल होता है। यह आग लगने पर चमकयुक्त प्रकाश पुंज उत्सर्जित करता है। डिटेक्टर 85dB तक का अलार्म प्रयोग में लाता है।
  • फायर अलार्म प्रणाली- यह प्रणाली 230V (वोल्ट) की विद्युतापूर्ति पर कार्य करती है। इसमें बैटरी बैकअप की क्षमता भी होती है। यह प्रणाली दहन के कारण आस-पास के वातावरण में परिवर्तन की निगरानी करते हुए आग लगने की पहचान करती है। फायर अलार्म प्रणाली स्वचालित मानव संचालित या दोनों प्रकार की होती है।

स्वचालित फायर अलार्म प्रणाली के उपयोग से आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में भवनों से लोगों को शीघ्रता से निकल जाने का संकेत दिया जाता है। अत: इस प्रणाली के जरिए इस बात का संकेत मिल जाता है कि आग और धुआप को रोकने के लिए तैयारी कर ली जाए।

  • फायर एक्सटिनग्विजर (Fire Extinguisher) : यह एक सक्रिय अग्नि सुरक्षा उपकरण होता है। सामान्यत: आपात स्थितियों में आग बुझाने या इस पर काबू पाने के लिए इस उपकरण का उपयोग किया जाता है। प्राय: छोटे स्तर पर ही आग लगने पर इसका इस्तेमाल होता है लेकिन बड़े स्तर पर इसका प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो पाता है। फायर एक्सटिनग्विजर मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं- भंडारित दाब वाले (Stored Pressure) और कार्ट्रिज संचालित। भंडारित दाब वाले इकाइयों में एक्सपेलैट (Expellant) को अग्निरोधक एजेंट वाले चैंबर में ही संग्रहित किया जाता है। शुष्क रासायनिक एक्सटिनग्विजर में मुख्यत: नाइट्रोजन प्रयुक्त किया जाता है। जल और झाग (Foam) एक्सटिनग्विजर प्रमुख रूप से हवा का उपयोग करते हैं। कार्ट्रिज संचालित एक्सटिनग्विजर एक पृथक कार्ट्रिज में एक्सपेलैट गैस रखा जाता हैं इसका उपयोग प्राय: औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है।
    • इनमें संपीड़ित कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। फायर एक्सटिनग्विजर में प्रयुक्त वर्ण से जानकारी मिलती है कि एक फायर एक्सटिनग्विजर किस प्रकार के अग्निशमन के लिए उपयोग हो सकता है।
  • फायर हाइड्रान्ट प्रणाली (Fire Hydrant System) : यह एक उपयोगी अग्निशमन उपकरण होता है। इस प्रणाली के जरिए अधिकांश शहरी, उपशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है ताकि अग्निशमन दस्ता आग रोकने में समर्थ हो सके।
    • हाइड्रान्ट में एक पाईप लगाया जाता है तब हाइड्रान्ट में लगे वाल्व को खोलने पर पानी का तीव्र प्रवाह निकलता है।
  • फायर स्प्रिंकलर सिस्टम (Fire Sprinkler System) : इस व्यवस्था में फायर स्प्रिंकलर से लगे हुए जल वितरण पाइप तंत्र को पर्याप्त दाब और प्रवाह दर प्रदान किया जाता है ताकि पानी की बौछार के जरिए आग बुझाया जा सके।

वाशिंग मशीन (Washing Machine)

  • यह एक ऐसा उपकरण होता है जो कपड़ों/चादरों को धोने, उनसे मैल निकाने और रंगड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एक वाशिंग मशीन मुख्यत: तीन चक्रो में कार्य करता है। ये हैं- कपड़ा धोना (Washing) , खंगालना (Rinsing) और घुमाना (Spinning) । मशीन के भिन्न-भिन्न भाग ये कार्य करते हैं। प्रक्रिया के दौरान पानी छोटे पाईप के जरिए मशीन में भेजा जाता है। मशीन में लगा मोटर मशीन के आंतरिक टब को घुमाता है। टब घुमने और अपेकन्द्री बल के कारण पानी इस टब में पहुपचता है।
  • किसी भी प्रकार के वाशिंग मशीन में इनर वाश टब एजीटेटर (Agitator: यह कपड़ों पर डिटर्जेट की अभिक्रिया को प्रेरित करता है) , आऊटर वाश टब, ड्रेन टब का उपयोग किया जाता है। वाशिंग मशीन मुख्यत: दो सिद्धांतों पर कार्य करता है- नियंत्रण प्रणाली और यांत्रिकी प्रणाली।
  • नियंत्रण प्रणाली में टाईमर, कंटोल बोर्ड, प्रेशर स्विच, वाटर टेम्परेचर सेलेक्टर और लीड स्विच लगा होता है। दूसरी ओर यांत्रिकी प्रणाली में मोटर, ट्रांसमिशन क्लच, इनर-आऊटर वाश टब, एजीटेटर पंप, वाटर वॉल्व, बेल्ट और मोटर युग्मक (Motor Coupling) लगे होते हैं। आधुनिक वाशिंग मशीनें में सस्पेंशन व्यवस्था (Suspension System) का उपयोग किया जाता है। यह वाश टब को निश्चित स्थिति में बनाए रखता है। यह इनर टब के घूमने और इसे रोकने में प्रयुक्त बल को नियंत्रित करता है।

वैक्यूम क्लीनर (Vacuum Cleaner)

  • यह एक ऐसा उपकरण है जो फर्श एवं अन्य सतहों से धूल-कण को खींचने में प्रयुक्त होता है। इसे एक एयर पंप से जोड़ा जाता है। घरेलु उपयोग और उद्योगों में प्रयुक्त वैक्यूम क्लीनर के आकारों और मॉडलों में भिन्नता होती है।
  • इनके विभिन्न भेद हैं- आवासीय, व्यावसायकि, वेट-ड्राई (Wet-dry) और साइक्लोनिक क्लीनर्स। वैक्यूम क्लीनर में निर्वात उत्पन्न कर क्लीनर पाइप में धूल-कणों को खींचा जाता है।
  • वैक्यूम क्लीनर को विद्युत से जोड़ने पर विद्युत धारा मोटर को प्रचलित करती है और इससे क्लीनर में लगे पंखे संचालित होते हैं। पंखे हवा को एक्जॉस्ट (Exhaust) की तरफ धकेलते हैं। ऐसे में पंखे के आगे वायु घनत्व बढ़ता है जबकि पंखे की पीछे यह कम होता है। अत: पंखे के पीछे दबाव कम होता है और बाहर में दबाव अधिक रहता है। इस प्रकार वैक्यूम क्लीनर के अंदर आंशिक निर्वात उत्पन्न होता है। अन्तत: क्लीनर के अन्दर वायुदाब बाहर के वायुदाब से कम होने के कारण आस-पास की हवा वैक्यूम क्लीनर के अन्दर प्रवेश कर जाती है।

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