Science and Technology: Computer Languages and Internet Protocol

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कम्प्यूटर (Computers)

कम्प्यूटर भाषाएंँ (Computer Languages)

जैसा कि हम जानते हैं, एक कम्प्यूटर प्रोग्राम वस्तुत: निर्देशों का एक समूह है जिसका उपयोग कम्प्यूटर दव्ारा किया जाता है। ऐसे ही निर्देशों को सामूहिक रूप से साफ्टवेयर कहते हैं। साफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं: अनुप्रयोग साफ्टवेयर (Application Software) तथा प्रणाली साफ्टवेयर (System Software) किसी विशिष्ट कार्य के लिए बनाए गये विशिष्ट प्रोग्राम को अनुप्रयोग साफ्टवेयर जबकि ऐसे प्रोग्राम को क्रियान्वित करने के लिए विकसित किये जाने वाले सामान्य साफ्टवेयर को प्रणाली साफ्टवेयर कहते है।

ऐसे ही साफ्टवेयरों के विकास के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली भाषाओं को कम्प्यूटर भाषा कहते हैं। इन भाषाओं का विकास कम्प्यूटर के अधिकाधिक प्रयोग के लिए किया जाता है। किसी कम्प्यूटर दव्ारा अल्गोरिदम की अभिव्यक्ति के लिए सटीक, सरल और स्पष्ट भाषा का होना अनिवार्य है। ऐसी भाषाओं को उच्च स्तरीय प्रक्रियात्मक प्रोग्रामिंग भाषा (High Level Procedure Oriented Programming Language) कहते हैं। ये भाषाएं कम्प्यूटर विशिष्ट होती है। तकनीकी रूप से एक कम्प्यूटर प्रोग्राम का संबंध उच्च स्तरीय भाषा से होता है क्योंकि प्रोग्राम उस भाषा को मशीन की भाषा में रूपान्तरित कर देता है ताकि कम्प्यूटर उसके आधार पर कार्य कर सकें। इस अध्याय में कुछ उच्च स्तरीय कम्प्यूटर भाषाओं का उल्लेख संक्षेप में किया गया है:

  • फोर्ट्रान (FORTRAN: Formula Translation) : 1956 - 57 में इसका विकास जॉन बैकस दव्ारा किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक और अभियांत्रिकी से संबंधित समस्याओं का निराकरण था।
  • कोबोल (COBOL: Common Business Oriented Language) : 1960 में ग्रेस मुरे हॉपर (Grace, Murray Hopper) दव्ारा इसका विकास किया गया था ताकि व्यापारिक सूचनाओं का प्रसंस्करण किया जा सके।
  • बेसिक (BASIC: Beginner՚s All Purpose Symbolic Instruction) : जॉन जी. केमेनि (John G. Kemeny) तथा थॉमस ई. कुर्टज (Thomas E. Kurtz) दव्ारा इस भाषा का विकास 1963 में किया गया था जिसका उपयोग व्यक्ति को कम्प्यूटरों में नये लोगों को कम्प्यूटर का उपयोग सिखलाना है।
  • पास्कल (PASCAL) : 1971 में नैकलॉस रिथ (Naklaus Writh) ने इस भाषा का विकास किया था जिसका उपयोग नये लोगों को प्रोग्राम करना तथा अन्य समस्याओं के निराकरण का ज्ञान प्रदान करना है। इसका नाम फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल के नाम पर रखा गया है।
  • ए. डी. ए. (ADA) : 1979 में जॉन इश्बियान (John Ichbian) दव्ारा इसका विकास किया गया था। आरंभ में इसे डी. ओ. डी-1 कहा जाता था लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर चार्ल्स बैबेज के एक सहयोगी अडा ऑगस्टा लवलेस के नाम पर कर दिया गया।
  • सी भाषा (C Language) : 1972 में डेनिस रिचि (Dennis Ritchie) ने इसका विकास किया था। इसका उपयोग यूनिक्स (UNIX) नामक प्रचलन प्रणाली (Operating System) के निर्माण के लिए किया गया था।
  • सी. भाषा. (C ++ Language) : 1980 के दशक के मध्य में इसका विकास बी स्ट्रॉसटप (B. Stroustrup) दव्ारा किया गया था जो वस्तुत: सी भाषा का ही विस्तार है। इसे वर्तमान में सबसे लोकप्रिय ऑब्जेक्ट ओरिएन्टेड प्रोग्राम (Object Oriented Program) भाषा कहा जाता है।

इंटरनेट (Internet)

जालों के संजाल को इंटरनेट कहते हैं। इस प्रणाली में प्रयुक्त सभी नेटवर्क भौतिक रूप से आपस में जुड़े होते हैं तथा सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इसके बावजूद सामूहिक रूप से ये सभी एक नेटवर्क की भांति कार्य करते हैं। इंटरनेट की सहायता से ध्वनि, ग्राफिक्स, साफ्टवेयर तथा सूचनाओं से संबंधित अन्य सभी प्रकार के संकेतों का संचरण एवं संप्रेषण संभव है।

इंटरनेट प्रोटोकॉल (Internet Protocol)

इंटरनेट की सहायता से सूचनाओं के संप्रेषण के लिए निर्मित मार्गदर्शक प्रणाली को प्रोटोकॉल कहते हैं। जिन्हे कई श्रेणियों में विभक्त किया जाता है। ये प्रणालियां वस्तुत: कम्प्यूटर प्रोग्राम या साफ्टवेयर होती हैं। प्रोटोकॉल के प्रकारों में कुछ की चर्चा यहांँ की गई है:

  • ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल इंटरनेट प्रोट्रोकॉल (Transmission Control Protocol/Internet Protocol or TCP/IP) : यह कई प्रकार के प्रोटोकॉल का समूह है जो सूचनाओं के संप्रेषण के लिए विशिष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराता है। टी. सी. पी की सहायता से संप्रेषण का कार्य तथा आई. सी. की सहायता से सूचनाओं को दिशा देने का कार्य किया जाता हैं। टी. सी. पी. सूचनाओं को विखंडित कर उन्हें गन्तव्य तक संप्रेषित करता है। जिसकी दिशा का निर्धारण आई. पी. दव्ारा किया जाता है।
  • हाइपर टेवस्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (Hyper Text Transfer Protocol, HTTP) : हाइपर टेवस्ट मार्क अप लैंग्युएज (Hypertext Markup Language, HTML) में तैयार किये गये साफ्टवेयर को हाइपटेवस्ट कहते हैं। इस भाषा दव्ारा संपर्क स्थापित करने में व्यापक सहायता मिलती हैं। इसके माध्यम से टेवस्ट या ग्राफिक्स, दोनों का ही संप्रेषण सरलतापूर्व किया जाता है।
  • टेलनेट (Telnet) : इसे रिमोट लॉग-इन भी कहते हैं। इसकी सहायता से दो कम्प्यूटरों को एक-दूसरे के संपर्क में लाया जाता है। सूचनाओं को संप्रेषित करने वाले कम्प्यूटर को स्थानीय (Local Computer) कम्प्यूटर तथा सूचनाएं प्राप्त करने वाले कम्प्यूटर को दूरस्थ कम्प्यूटर (Remote Computer) कहा जाता है।
  • फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल (File Transfer Protocol, FTP) : यह प्रोटोकॉल क्लाइंट-सर्वर तकनीक पर कार्य करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सूचनाओं को संपीड़ित कर उनका आकार छोटा किया जा सकता हैं। इस कारण अत्यंत कम समय में ऐसी सूचनाओं का संप्रेषण किया जा सकता है।
  • गोफर (Gopher) : इस प्रोटोकॉल का उपयोग दूरस्थ भागों से इन्टरनेट की सहायता से सूचनाओं का अधिग्रहण किया जा सकता है।

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