Science and Technology: Internet: An Introduction and Networking

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कम्प्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी (Computer and Information Technology)

इंटरनेट: परिचय (Internet: An Introduction)

इंटरनेट को समझने से पूर्व इंटरनेट से संबंधित मूलभूत अवधारणाओं अथवा तकनीकों को समझना आवश्यक है-

नेटवर्किंग (Networking)

यदि किसी कम्प्यूटर को अन्य कम्प्यूटरों के साथ जोड़ दिया जाये तो इस प्रक्रिया को नेटवर्किंग कहते हैं। नेटवर्क बनने की स्थिति में विभिन्न कम्प्यूटर आपस में अपने डाटा बेस का आदान-प्रदान कर सकते हैं। नेटवर्किंग दो प्रकार की होती है-

  • LAN (Local Area Network) - इसमें प्राय: एक ही स्थान पर मौजूद कुछ कम्प्यूटरों को जोड़ा जाता है। इन्हें जोड़ने के लिए आमतौर पर केबल का प्रयोग किया जाता है। इसमें एक कम्प्यूटर केन्द्रीय भूमिका निभाता है जिसे ‘सर्वर’ (Server) कहते हैं तथा शेष कम्प्यूटर उसके माध्यम से आपस में जुड़ते हैं और ये सब ‘क्लायंट’ (Client) कहलाते है। LAN की तकनीक पर ही इन्ट्रानेट (Intranet) की व्यवस्था की जाती है।
  • WAN (Wide Area Network) - यह वह नेटवर्किंग है जिसमें काफी दूर पर स्थित कम्प्यूटरों के बीच नेटवर्क की स्थापना की जाती है। दूरी पर स्थित कम्प्यूटरों को जोड़ने के लिए टेलीफोन तथा सैटेलाइट आदि का प्रयोग करना पड़ता है। कभी-कभी WAN के माध्यम से दो या अधिक LAN को भी जोड़ दिया जाता है। इन्टरनेट एक प्रकार का WAN है वो दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क माना जाता है। इसके अतिरिक्त रेलवे आरक्षण आदि में भी जिस नेटवर्क का प्रयोग किया जाता है वह WAN के अंतर्गत ही आता है।

इंटीग्रेटेड सर्विसेज डिजिटल नेटवर्क (ISDN)

इसके माध्यम से सामान्य टेलीफोन नेटवर्क पर 128 केबीपीएस की गति पर डिजिटल सूचना को प्रेषित किया जा सकता है। इसके अंतर्गत एक ही साथ वीडियों, आवाज एवं डाटा इत्यादि का प्रसारण संभव होता है। हमारे देश में विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) तथा महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) आई. एस. डी. एन. सुविधा उपलब्ध करवाते हैं।

इंटरनेट (Internet)

  • वर्ष 1969 में अमरीकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन अवस्थित ‘एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्‌स एजेंसी’ (ARPA) की संकल्पना के साथ ही इंटरनेट का उद्भव एवं विकास हुआ। अमरीका के रक्षा वैज्ञानिक उस समय एक इस तरह की कमांड कंट्रोल संरचना का विकास करना चाह रहे थे, जिस पर सोवियत संघ के परमाणु हमले का कोई प्रभाव न पड़े, और इसी दृष्टिकोण से उन्होंने हमले की स्थिति में अमेरिका के समस्त सूचना संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से विकेंद्रित सत्ता वाला एक नेटवर्क बनाया, जिसके अंतर्गत सभी कम्प्यूटरों को एक समान दर्जा दिया गया था।
  • अमरीकी वैज्ञानिकों ने अपनी इंटर-नैटिंग परियोजना के तहत नेटवर्क से जुड़े सभी कम्प्यूटरों दव्ारा बहुसंयोजित पैकेट संजालों से साफ-सुथरे ढंग से सूचना प्राप्त करने के उद्देश्य से ही अमरीका की रक्षा उन्नत अनुसंधान परियोजना एजेंसी (DARPA) दव्ारा विभिन्न प्रकार के अंतर संपर्क पैकेट संजालों के लिए कार्य प्रक्रियाओं एवं प्रौद्योगिकियों के लिए शोध कार्यक्रम की शुरूआत की। बाद में चलकर यही नेटवर्क वर्ल्ड वाइड वेब के माध्यम से अपने वर्तमान रूप में सामने आया।
  • समय के साथ-साथ जैसे-जैसे इंटरनेट के क्षेत्र में तकनीकी विकास हुआ, नए-नए सॉफ्टवेयर तथा सर्च इंजन या वेब ब्राउजर का आगमन होता गया। कभी मोजाइक तथा नेटस्केप जैसे इंटरनेट एक्सप्लोरर मौजूद थे। ओपेरा नामक वेब बाउजर की शुरूआत 1994 में की गई तथा 1996 में ओपेरा 2.0 नामक इसका नया संस्करण भी आया। मोबाइल के लिए ओपेरा के संस्करण की शुरूआत 1998 में हुई। वर्ष 2000 में इसका नया संस्करण ओपेरा 4.0 भी आया। जनवरी, 2007 में एप्पल इंक (Apple Inc) दव्ारा विकसित सफारी वेब बाउजर आया और उसके बाद सफारी 1 से लेकर सफारी 6 तक इसके संशोधित तथा परिवर्द्धित संस्करण आए। सितंबर, 2002 में मोज़िल्ला फायर फॉक्स नाम से एक वेब ब्राउजर को इंटरनेट बाजार में उतारा गया, जिसे Windows तथा OSX के लिए विकसित किया गया। एंड्रोयड सुविधा से युक्त मोबाइलों के लिए इसका मोबाइल संस्करण भी आया। इसके पश्चात्‌ सितंबर 2008 में गूगल दव्ारा गूगल क्रोम नाम से एक नि: शुल्क वेब ब्राउजर की शुरूआत की गई।
  • इंटरनेट का प्रयोग दो विधियों से किया जा सकता है। पहली विधि को Shell Account जबकि दूसरी विधि को Internet Protocol Account कहते हैं। Shell Account में कम्प्यूटर इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाएँ प्राप्त तो करता है किन्तु खुद उसका हिस्सा नहीं बनता।
  • इंटरनेट का सक्रिय सदस्य बनने के लिए Internet Protocol Account की आवश्यकता होती है और इसके लिए कम से कम 8 मेगाबाइट की रैम चाहिए।

इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध होने वाली सुविधाएँ निम्नलिखित प्रकार से हैं-

  • w. w. w. वर्ल्ड वाइड वेब: यह इंटरनेट पर मिलने वाली सबसे महत्वपूर्ण सुविधा है जिसके कारण इंटरनेट से जुड़ा कोई भी कम्प्यूटर इंटरनेट पर उपलब्ध किसी भी सूचना को अपने कम्प्यूटर पर प्राप्त कर सकता है। इसके लिए उसे Cross Indexing की जरूरत होती है जो मोज़ाइक जैसे सॉफ्टवेयर से हो पाती है।
  • वेबसाइट (Website) : यह साइबर स्पेस में उपलब्ध वह स्थान है जिसे कोई व्यक्ति या संस्था प्रयोग में लाता है तथा जिसके माध्यम से अपने संबंध में वांछित सूचनाएँ इंटरनेट पर उपलब्ध कराता है। जो सूचना वेबसाइट पर दी जाती है वह सूचना इंटरनेट पर जुड़े प्रत्येक कम्प्यूटर की पहुँच में होती है।
  • ई-मेल (E-mail) : ई-मेल इलेक्ट्रॉनिक मेल का संक्षिप्त रूप है। यह एक प्रकार की ऐसी डाक है जो इंटरनेट के माध्यम से जुड़े कम्प्यूटरों के बीच हस्तांतरित की जाती है। कम्प्यूटर पर मुद्रित डिजिटल संदेश को मोडेम एनॉलाग संकेत में बदलकर टेलीफोन लाइन के माध्यम से संग्राहक कम्प्यूटर तक पहुँचाता है और उस कम्प्यूटर से जुड़ा मोडेम पुन: उसे डिजिटल रूप देकर स्क्रीन पर उपलब्ध कराता है। यदि वह कम्प्यूटर प्रयोग में न आ रहा हो तो वह डाक उसके निजी खाते में एकत्रित हो जाती है, जिसे सुविधानुसार कभी भी प्राप्त किया जा सकता है।
  • टेलीटेवस्ट: इसकी तुलना एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक पत्रिका से की जाती है जिसमें पर्दे पर पहले सूचनाओं की क्रम-सूची आती है जिसे देखकर यह पता लग जाता है कि किस विषय से संबंधित सूचना किस पृष्ठ पर है? इस सुविधा के दव्ारा रेलवे की समय सारणी, बाजार भाव, शेयर भाव व सर्राफा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव शहर में होने वाले विभिन्न समारोहों, कार्यक्रमों, बैठकों, खेलकूद से संबंधित जानकारियाँ, टेलीफोन डायरेक्टरी, इंडियन एयर लाइन्स और अन्य विदेशी विमानों की समय सारणी आदि प्राप्त की जा सकती है।
  • टेलनेट टेलिफोनी- यह इंटरनेट पर उपलब्ध एक ऐसी सुविधा है जिसके दव्ारा हम दुनिया के किसी भी व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। संपर्क करने के क्रम में श्रव्य एवं दृश्य दोनों अनुभवों को प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रणाली में मल्टीमीडिया का इस्तेमाल होता है। अभी इसका प्रयोग चिकित्सा अनुसंधान, उच्चस्तरीय वार्ताओं, दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम आदि के लिए हो रहा है।

भारत में इंटरनेट (Internet in India)

भारत में इंटरनेट का प्रयोग 1995 से प्रारंभ हुआ जिसे मुख्य रूप से VSNL की GIAS (Gateway International Access Service) के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। वर्तमान समय में कई निजी संस्थाएँ भी इंटरनेट सुविध उपलब्ध करा रही है। विद्यार्थियों तथा अध्यापकों के लिए के VSNL माध्यम से एक विशेष नेटवर्क की स्थापना की गयी है जिसे ERNET (Education And Research Network) कहते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ और नेटवर्क इस प्रकार है-

  • NICNET (National Information Centre Network) - यह नेटवर्क भारत सरकार दव्ारा चलाया जाता है। इसी के माध्यम से भारत के सभी जिले एक दूसरे से तथा केंद्र सरकार से जोड़े गये हैं।
  • INFLIB NET (Information & Library Network) - यह नेटवर्क U. G. C. के माध्यम से संचालित किया जाता है। इसका उद्देश्य देश के सभी पुस्तकालयों को जोड़कर सभी महत्वपूर्ण पुस्तकों को इन्टरनेट पर उपलब्ध कराना है।
  • INET (Indian Network) -व्यावसायिक कार्यों के लिए।
  • SIR NET (सांइटिफिक एंड इन्डस्ट्रियल रिसर्च नेटवर्क) -वैज्ञानिक एवं औद्योगिक शोधों से संबंधित सूचनाओं एवं कार्यों के लिए।

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