Science and Technology: Nano Technology and Important Nano Products

Get top class preparation for IAS right from your home: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

नैनो प्रौद्योगिकी (Nano Technology)

महत्वपपूर्ण नैनो उत्पाद (Important Nano Products)

  • कार्बन नैनोट्‌यूब : कार्बन नैनोट्‌यूब वस्तुत: ताप दाबित ग्राफिन परतों की विस्तारित नलिकायें होती हैं। ये दो तरह की होती हैं- एकल भित्ति (एक ट्‌यूब) तथा बहुभित्ति (कई संकेन्द्रित ट्‌यूब्स) । अपनी अदव्तीय रासायनिक एवं भौतिक विशेषताओं के कारण कार्बन नैनोट्‌यूब बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। ये यांत्रिक रूप से हीरे से भी अधिक कठोर होने के बावजूद सर्वाधिक लचीली तथा विद्युत सुचलाक भी होती हैं। इनका उपयोग सेंसरों नैनो इलेक्ट्रॉिनिक्स, डिस्प्ले डिवाइस में किया जा सकता है।
  • माइक्रो लेन्स : स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मानव बाल के 1/10 आयतन वाले ऐसे माइक्रो लेन्स विकसित किए हैं, जो एक अकेली कोशिका में होने वाले अवरक्त अवशोषण को भी माप कर उसके अंदर होने वाले जैव गतिविधियों पर प्रकाश डाल सकते है।
  • क्वांटम डॉट्‌स : यदि अर्द्धचालक कणों को आकार में बहुत छोटा बना दिया जाये तो क्वांटम प्रभाव क्रियाशील हो जाता है। इसके क्रियाशील होते ही वह ऊर्जा सीमित हो जाती है जिसकी वजह से एक इलेक्ट्रॉन तथा उतनी ही जगह किसी कण में बनी रहती है। इसका कारण यह है कि ऊर्जा तरंगदैर्ध्य से जुड़ी होती है इसलिए किसी कण की प्रकाशकीय (Optical) विशेषता क्या होंगी, यह कण के आकार पर निर्भर करेगा। इस प्रकार मात्र आकार को नियंत्रित करके ऐसे कणों का निर्माण किया जा सकता है जो प्रकाश के विशिष्ट तरंगदैर्ध्य को उत्सर्जित या अवशोषित कर सकते हैं।
  • ऑप्टिकल वाइस्टेबल स्विच : हैलो बैक्टीरियम हेलोब्रियम नामक जीवाणु की झिल्ली दव्ारा एक परत वाले ऑप्टिकल वाइस्टेबल स्विच बनाने में सफलता प्राप्त हुई है जो 10,000 अणु प्रति बिट की दर से 500 फेफ्टोसेकंड (1 नैनो सेकंड का 1/2000) में आंकड़े संग्रहित कर सकता है।
  • फुलेरीन (Fullerene) : यह कार्बन का एक बहुपयोगी जटिल रूप है, जिसमें कार्बन परमाणु पंचभुजाकर अथवा षटफलाकार रूप में परस्पर जुड़कर एक पिंजड़ेनमुा संरचना का निर्माण करते हैं। बकमिनिस्टर, फुलेरीन का सबसे बहुरूप है, जिसका हर एक अणु कार्बन-60 परमाणुओं का एक एक गोलाकार समूह होता है। इसकी ज्यामिति संरचना के जैसी होने की वजह से इसे बकमिनिस्टिर फुलेरीन भी कहते हैं, इसे कार्बन- 60 दव्ारा निरूपित किया जाता है। फुलेरीन रासायनिक रूप में स्थायी एवं अक्रियाशील होते हैं। पिंजड़े सरीखी संरचना को तोड़ने के लिए अत्यधिक तापक्रम (लगभग 10000c) की आवश्यकता होती है।
    • शुरूआती समय में लेसर किरणों दव्ारा ग्रेफाइट के वाष्पीकरण से फुलेरीन प्राप्त किया गया। इस विधि में ग्रेफाइट को हीलियम अथवा ऑर्गन की उपस्थिति में विद्युत आर्क में गर्म करने से कार्बन के वाष्प संघनन से फुलेरीन के सूक्ष्म अणु कालिख पदार्थ के रूप में उत्पन्न होते हैं। ये कार्बन घोलकों में घुलनशील भी होते हैं।
    • भविष्य में फुलेरीन के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग की अपार संभावनाएँ हैं। यह कई धातुओं के साथ अशुद्ध होकर निम्न तापक्रम पर अतिचालक बन जाता है। कार्बन के नैनो ट्‌यूब बेलनाकार फुलेरीन हैं जिनके इस्तेमाल से पेपर बैटरी बनाई गई हैं। पेपर बैटरी का प्रयोग संभवत: स्वचालित वाहनों, वायुयानों एवं पेसमेकर में किया जा सकता है। ग्रेफाइट से फुलेरीन एवं कार्बन नैनो ट्‌यूब बनाए जाने के कारण ये काफी महंगे होते हैं, इसलिए भारतीय वैज्ञानिक, भारत में कोयले से अकार्बनिक अशुद्धियों को पूरी तरह से दूर करके इसे विकसित किया जा रहा है।

डेंड्राइमर (Dendrimer)

ये वस्तुत: नैनो पैमाने पर बने रासायनिक संश्लिष्ट बहुलक हैं। इनमें परमाणु एक केन्द्रिय कोर से शाखाओं तथा उपशाखाओं में संश्लिष्ट होते हैं। डेंड्राइमर का निर्माण करने के लिए किसी भी एक तत्व, जैसे कि नाइट्रोजन का कोई आरंभिक परमाणु ले लिया जाता है और रासायनिक क्रिया की पुनरावृत्ति दव्ारा इसके साथ किसी अन्य तत्व, जैसे कि कार्बन के परमाणुओं को जोड़ दिया जाता है ताकि इससे एक गोलाकार शाखान्वित रचना बनाई जा सके। डेंड्राइमर के अणुओं की मुख्य विशेषता यह होती है कि इनकी ज्यामिति एवं इनके गुण तथा इनके रसायनों में परिवर्तन करके सुगमता से बदला जा सकता है। ऐसा करने से इनके उत्सर्जन को नियमित करने से गुदों, यकृत अथवा रक्त में इनका स्थगन वितरण संभव हैं। इनके साथ औषधियाँ संपुटित करके इन्हें लक्षित ट्‌यूमरों तक भेजा जा सकता है।

नैनो अभियांत्रित बैटरी (Nano Engineered Battery)

नैनो अभियांत्रित बैटरी एक अत्यंत हल्की, अत्यंत पतली तथा पूर्णतया लचीली बैटरी है। नैनो अभियांत्रित बैटरी अत्यंत विशिष्ट है क्योंकि यह उच्च ऊर्जा बैटरी एवं उच्च शक्ति युक्त सुपर संधारित्र दोनों रूपों में काम कर सकती है, जो प्राय: विद्युत प्रणालियों में अलग-अलग अवयव होते हैं। इसकी एक अन्य विशेषता यह भी है कि यह युक्ति (Device) मानव रक्त अथवा पसीने से बैटरी को शक्ति प्रदान करने में सक्षम है। इस युक्ति को लिथियम आयन बैटरी तथा सुपर संधारित्र दोनों तरह से काम करने के लिए अभियांत्रित किया गया है। इस डिवाइस को लपेटा, घुमाया, मोड़ा अथवा असंख्य आकरों में काटा जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद इसकी कार्यकुशलता में कोई कमी नहीं आती है।

नैनो प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग (Applications of Nano Technology)

बहुआयामी उपयोगी प्रकृति होने के कारण नैनो प्रौद्योगिकी का उपयोगित क्षेत्र भी असीमित है। इसके उपयोग के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र इस प्रकार हैं-

जीव विज्ञान के क्षेत्र में (In the Field of Biology)

ऊतक अभियांत्रकी के अंतर्गत क्षतिग्रस्त ऊतकों का प्रतिस्थापन अथवा नये ऊतकों का संवर्धन किया जाता है, इसके तहत नैनो पदार्थों का प्रयोग करके कोशिकाओं को कृत्रिम रूप से संवर्धित किया जाता है। इसके अलावा प्रतिरक्षी नैनो कणों का प्रयोग किसी प्रतिरूपी अथवा अन्य पदार्थ के साथ करके किसी विशिष्ट अणु संरचना तथा सूक्ष्म जीवों की पहचान की जाती है। नैनो छिद्रों से युक्त विशेष प्रकार के नैनो पदार्थों को प्रयोग लक्षित स्थान पर दवा उपलब्ध कराने में किया जा सकता है। इस कार्य में अधिकांशत: सोने अथवा लोहे के नैनो कण प्रयुक्त होते हैं।

रसायन विज्ञान तथा पर्यावरण के क्षेत्र में (In the Field of Chemistry and Environment)

इसके अंतर्गत नैनो प्रौद्योगिकी का उपयोग निम्नांकित रूपों में किया जा सकता है-

  • आयनों के छानने के कार्य में प्रयुक्त होने वाले नैनो फिल्टरों का निर्माण, जिनका प्रयोग विशेषकर डायलिसिस के दौरान किया जाता है।
  • जल प्रदूषण को दूर करने के लिए भी चुंबकीय नैनो कणों का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए ये नैनो कण जल में विद्यमान भारी धातुओं को पृथक करते हैं।
  • नैनो कणों का प्रयोग उत्प्रेरक एजेंट के रूप में किया जा सकता है।
  • नैनो पदार्थो से निर्मित सूक्ष्म अर्द्धचालकों का सौर बैटरियों में प्रयोग करने में ऊर्जा उपयोग में कमी आती है।

सूचना एवं संचार के क्षेत्र में (In the Field of Information and Communication)

  • अत्यंत सूक्ष्म एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit) के निर्माण में, विशेषकर कम्प्यूटरों में इनका प्रयोग किया जाता है।
  • कार्बन के नैनो ट्‌यूब का प्रयोग पिक्चर टयूब में करने से ऊर्जा उपयोग में कमी आती है।

उपभोक्ता उत्पादों के निर्माण क्षेत्र में (In the Field of Consumer Products Manufacturing)

  • खाद्य वस्तुओं की पैकिंग में प्रयुक्त होने वाले आवरणों के निर्माण कार्य में प्रयोग होता है। परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थों में ताप-रोधक क्षमता तथा गैसों के आवागमन को विनियमित करने की क्षमता विकसित होती है।
  • वस्त्र उद्योग (Textile Industry) में नैनो तंतुओं के निर्माण में प्रयुक्त।
  • टाइटेनियम डाडऑक्साइड के नैनो कणों का उपयोग लोशन बनाने में किया जाता है, जिससे सूर्य के पराबैगनी विकिरण से त्वचा की सुरक्षा संभव होती है।
  • चश्मों के सीसों में परावर्तनरोधी क्षमता के विकास के लिए उन पर नैनो बहुलकों का लेप लगाया जाता है।
  • खाद्य पदार्थों में विषाक्तता को रोकने के लिए Anti-micro bilium Nano Imulson का प्रयोग किया जा सकता है।

Developed by: