हड्‌िडयों की पुनर्रचना के लिए नैनो प्रोद्योगिकी (Nanotechnology For Reconstruction of Bones – Science And Technology)

Doorsteptutor material for IAS is prepared by world's top subject experts: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 147K)

भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बंगलुरु के वैज्ञानिकों के अनुसार ग्राफीन यौगिको का उपयोग अस्थि ऊतकों के पुनरुत्पादन के लिए किया जा सकता है क्योंकि यह यौगिक अस्थि के वातावरण का अनुकरण करता है।

• पॉलिकैप्रोलैक्टोन या पीसीएल (हड्‌िडयों को सहारा देने के लिए एक जैव-निम्नकरणीय बहुलक) को मजबूत बनाने के लिए ग्राफीन का इस्तेमाल किया जाएगा।

• पीसीएल (polycaprolactone) का प्रयोजन केवल पुनरुत्पादित कोशिकाओं को अस्थायी शरण देना और अंतत: एक स्वस्थ्य ऊतक दव्ारा इस अस्थायी व्यवस्था (scaffold) के प्रतिस्थापन को संभव बनाना है।

• नैनो प्रौद्योगिकी का उपयोग ग्राफीन की 3-डी संरचना बनाने के लिए किया जाएगा।

ग्राफीन क्या है?

ग्राफीन एक अणु की मोटाई वाली सामन्य कार्बन की एक पतली परत (2-डी संरचना) है, जिसमें अणु मधुमक्खी के छत्ते के आकार के जालक में व्यवस्थित होते हैं।

Developed by: