Science and Technology: Nobel Prize-2013: Nobel of Physics, Medicine and Chemistry

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नोबेल पुरस्कार-2013 (Nobel Prize-2013)

भौतिकी का नोबेल (Nobel of Physics)

  • बेल्जियम के भौतिकी विज्ञानी फ्रांस्वा इंगलर्ट और ब्रिटेन के पीटर हिग्स को संयुक्त रूप से वर्ष 2013 के भौतिकी क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार हेतु चयन किया गया।
  • फ्रांस्वा इंगलर्ट उन कई भौतिक विज्ञानियों में शामिल हैं जिन्होंने वर्ष 1964 में ब्रह्यांड में मूलभूत पदार्थ की संरचना को लेकर एक प्रक्रिया का सुझाव दिया था। इस प्रक्रिया में एक कण ‘हिग्स बोसॉन’ होने का अनुमान लगाया गया था।
  • इन दोनों वैज्ञानिकों का चयन परमाणु से छोटे कणों के द्रव्यमान को समझाने की प्रक्रिया की सैद्धांतिक खोज (हिग्स बोसॉन या गॉड पार्टिकल) करने के लिए किया गया। वर्ष 2012 में हिग्स पार्टिकल की खोज से इन वैज्ञानिकों के सिद्धांतों की पुष्टि हुई थी। स्विट्‌जरलैंड स्थित यूरोपीय सेंट फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) के वैज्ञानिकों ने पांच दशक से जारी हिग्स बोसॉन या गॉड पार्टिकल खोजने के अभियान में महत्वपूर्ण सफलता मिलने की घोषणा 4 जुलाई 2012 को की थी।
  • गॉड पार्टिकल के बारे में माना जाता है कि यह उन कणों को द्रव्यमान प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है, जिससे 13.7 अरब वर्ष पहले हुए बिग बैंग (महाविस्फोट) के बाद अंतत: तारों और ग्रहों का निर्माण हुआ।
  • यह उप परमाणु कण (Subatomic Particle) है। इसे ‘गॉड पार्टिकल’ भी कहा जाता है। इस कण की खोज के लिए हजारों वैज्ञानिकोंं को लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में प्रोटोनों की टक्कर से मिले काफी लंबे चौड़े आपकड़ों का विश्लेषण करना पड़ा था। 10 खरब में से एक टक्कर से ही एक हिग्स-बोसॉन मिल पाता है। लार्ज हैड्रॉन स्विट्‌जरलैंड और फ्रांस की सीमा पर 27 किमी. में फेला हुआ है। हिग्स बोसॉन की खोज ने द्रव्यमान की उपस्थिति की गुत्थी सुलझाने में मदद की है।

चिकित्सा का नोबेल (Nobel of Medicine)

  • जेम्स रॉथमेन रैंडी शेकमैन और थॉमस सुडाक को 2013 के चिकित्सा के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। पहले दो वैज्ञानिक अमेरिकी हैं जबकि सुडॉफ का जन्म जर्मनी में हुआ।
  • चिकित्सा नोबेल पुरस्कार हेतु इन तीनों का चयन शारीरिक कोशिकाओं में प्रमुख परिवहन प्रणाली की खोज के लिए किया गया। इस शोध से डायबिटीज और अल्जाइमर जैसी लाइलाज बीमारियों के बारे में अहम जानकारी मिलती है।
  • उल्लेखनीय है कि प्रत्येक कोशिका एक फैक्ट्री की भापति कार्य करती है जो अणुओं को निर्माण करती है और उनका परिवहन करती है। जैसे, रक्त में इंसुलिन का निर्माण होता है और यह मुक्त (Released) होता है तथा न्यूरोट्रांसमीटर कहे जाने वाले संकेतक अणुओं (Signal Molecules) को एक तंत्रिका कोशिक से दूसरी तंत्रिका कोशिका में भेजा जाता है। कोशिका के इर्द-गिर्द इन अणुओं का परिवहन छोटे-छोटे पैकेजों में होता है।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों ने उस आण्विक सिद्धांत की खोज की है जो कोशिका में सही समय पर सही स्थान पर इन छोटे पैकेजों के परिवहन का नियंत्रण करता है।
  • शेकमैन ने जीनों के समुच्चय (Set) की खोज की। यह सेट ही उपरोक्त परिवहन के लिए आवश्यक होता है। रॉथमैन ने उस प्रोटीन तंत्र का पता लगाया जो इन पैकेजो के समूह को अपने लक्ष्य से जोड़ने का कार्य करता है। सुडॉफ ने पता लगाया कि अणुओं के छोटे-छोटे पैकेजों के कार्गों (Cargo) को मुक्त करने के लिए सिग्नल किस प्रकार निर्देश देते हैं।
  • इस प्रकार उपरोक्त खोज दव्ारा कोशिकीय कार्गों के परिवहन और डिलिवरी हेतु सटिक नियंत्रण तंत्र का पता लगाया गया है। इस तंत्र में किसी प्रकार की अव्यवस्था होने पर ही तंत्रकीय बीमारियाप, मधुमेह और प्रतिरक्षा संबंद्ध डिसऑर्डर की स्थिति उत्पन्न होती है।

रसायन का नोबेल (Nobel of Chemistry)

  • वर्ष 2013 के लिए रसायनशास्त्र के नोबेल पुरस्कार हेतु तीन वैज्ञानिकों-अमेरिकी आस्ट्रियन नागरिक मार्टिन कारप्लस, अमेरिकी ब्रिटिश नागरिक माइकल लेविट और अमेरिकी इजरायली नागरिक एरिह वारशेल का चयन किया गया। इनके चयन की घोषणा रॉयल स्वीडिश अकादमी ऑफ साइंसेस ने 9 अक्टूबर 2013 को की। उन्हें यह पुरस्कार रासायनिक प्रक्रिया को समझने और उसका पूर्वानुमान लगाने के लिए कम्प्यूटर सिमुलेशन की युक्ति विकसित करने के लिए दिया जाना है। इसमें हाई परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग का योगदान भी रहा है।
  • साधारण: केमिस्ट प्लास्टिक गेंद और लकड़ी के जरिए अणुओं के मॉडल तैयार करते रहे हैं। आजकल मॉडल तैयार करने का कार्य कम्प्यूटर से होने लगा है। 1970 के दशक में मार्टिन कारप्लस, लेविट और वारशेल ने उस प्रभावी कार्य (कम्प्यूटर सिमुलेशन) की नींव रखी जिसका उपयोग रासायनिक प्रक्रियाओं को समझने और उनका अनुमान लगाने में किया जा सकता है।
  • रासायनिक अभिक्रियाएप धीमी गति से होता हैं। एक मिलीसेकंड के कुछ अंश में इलेक्ट्रॉन एक परमाणु से दूसरे परमाणु में जाते हैं। सामान्य तौर पर यह संभव नहीं है कि किसी रासायनिक प्रक्रिया में प्रत्येक छोटे चरण का प्रायोगिक मानचित्र तैयार किया जाए। जबकि कम्प्यूटर सिमुलेशन के जरिए यह कार्य सहज ही हो सकता है।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों ने अपने शोध के दौरान न्यूटन के पारंपरिक भौतिकी और क्वांटम भौतिकी का प्रयोग किया। पूर्व में केमिस्ट इन दोनों में से किसी एक की सहायता लेते थे। पारंपरिक भौतिकी की विशेषता थी कि इससे सरल गणना हो जाती थी और बड़े अणुओं का मॉडल इसके माध्यम से तैयार किया जा सकता था। लेकिन इसमें एक खामी यह थी कि यह रासायनिक अभिक्रियाओं का अनुकरण (Simulation) नहीं कर सकती थी। इसके लिए केमिस्टो ने क्वांटम भौतिकी का उपयोग किया। लेकिन ऐसे में गणना के लिए अत्यधिक कम्प्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता हुई। इस कारण केवल छोटे अणुओं में ही इस भौतिकी का इस्तेमाल किया जा सकता था।
  • इन वैज्ञानिकों ने दोनों पद्धतियों का उपयोग किया। उदाहरण के लिए शरीर में किसी लक्षित प्रोटीन पर ड्रग किस प्रकार जुड़ता है, इसके लिए लक्षित प्रोटीनों के उन परमाणुओं की ‘क्वांटम गणना’ की जाती है जिनसे ड्रग जुड़ता है। शेष बड़े आकार के प्रोटीन का सिमुलेशन ‘पारंपरिक भौतिकी’ के जरिए होता है।
  • अब रसायन क्षेत्र में कम्प्यूटर मॉडलों का महत्व बहुत बढ़ा है। अत: इस खोज का उपयोग न केवल कम्प्यूटेशनल जीव विज्ञान बल्कि जैविक समुदाय के संदर्भ में भी किया जा सकेगा। इससे फार्मास्यूटिकल इंजीनियरों और मैन्यूफैक्चरिंग केमिस्टो को समस्याओं के समाधान का त्वरित तरीका मिल जाएगा। यह प्रक्रियाएं मिलीसेकंड के छोटे हिस्से में हो सकती है जोकि पारपंरिक एल्गोरिदम तरीके से बहुत ज्यादा तेज है। इन तीनों का योगदान अपने मॉडल में पारंपरिक भौतिकी को क्वांटम भौतिकी के साथ मिलाना है। यह गणना के परमुटेशन की संख्या को बढ़ा देता है हालापकि डेटा की संगणना के लिए कम्प्यूटर को बहुत शक्ति की आवश्यकता होती है।

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