सामाजिक नवोन्मेष (Social Innovation – Social Issues)

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इसका संदर्भ गुणवत्ता, न्याय और पर्यावरण को ध्यान में रखकर सामाजिक चुनौतियों के नए हल से है।

उप-राष्ट्रपति ने सामाजिक नवोन्मेष पर तीसरे राष्ट्रीय सेमिनार का पुर्ण में उद्धाटन किया।

भारत में सामाजिक नवोन्मेष के उदाहरण-स्वयं-सहायता समूह, सहकारिता, लघु-वित्त समुदाय, दूरस्थ शिक्षा, सामुदायिक अदालतें-नए विचार जो आवश्यकताओं और लोगों के जीवन की बेहतरी के लिए काम करते हैं।

महत्व

• सामाजिक नवोन्मेष सामाजिक उद्यमशीलता, व्यापारिक जुड़ाव और परोपकार के बारे में संकुचित सोच से बाहर निकलने और विभिन्न कारकों व हितधारकों की परस्पर-संबद्धता को पहचानने का अनूठा अवसर देता है।

• सामाजिक शक्ति संरचना को बदलने में मदद करता है।

• आर्थिक विकास के वैकल्पित साधन उपलब्ध कराने में मदद करके दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए सामाजिक नवोन्मेष काफी महत्वपूर्ण होता है जो मानव संबंधों को नुकसान के बजाय कल्याण करता है।

• यह ऐसे नए बाज़ारों का सृजन करता है, जिन्हें सामाजिक समाधान की आवश्यकता होती है।

• सीमांत जनसंख्या को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए नागरिको को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद प्रदान करता हैं।

• अंततोमत्वा, यह नवोन्मेष प्रक्रिया में केवल लोगों को गतिशील कर सहयोग ही नहीं देता बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक समानता को बढ़ावा भी देता है।

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