मुसीबत में मदद करने वालों की सुरक्षा (To help protect those in trouble)

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सुर्खियों में क्यों?

• सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में अपने आदेश में मुसीबत में मदद करने वालों के लिए दिशा निर्देश जारी कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इन्हें अनिवार्य बना दिया है।

यह क्या है?

• यह पहल 2012 में सुरक्षित जीवन नामक गैर-सरकारी संगठन दव्ारा दायर जनहित याचिका पर किया गया है।

• केंद्र ने मुसीबत में मदद करने वालों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी किये है। ये वे लोग होते हैं जो सड़क पर किसी दुर्घटना के शिकार या संकटग्रस्त व्यक्ति की मदद के लिए आगे आते हैं।

• जब तक सरकार इस मुद्दे पर कोई कानून नहीं बनाती है तब तक सर्वोच्च न्यायालय दव्ारा इन दिशा-निर्देशों को बाह्यकारी बना दिया है।

• दिशा-निर्देशों के अनुसार दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद करने वालों के खिलाफ कोई आपराधिक या सिविल दायित्व आरोपित नहीं किया जाना चाहिए।

• उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाएगा और लिंग, धर्म, राष्ट्रीयता, जाति या किसी अन्य आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

• उन पर स्वयं की पहचान बताने की कोई अनिवार्यता नहीं होगी और पुलिस दव्ारा या अदालत में उनको परेशान नहीं किया जाएगा।

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