ट्रांसजेंडर नीति (Transgender Policy)

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चर्चा में क्यों?

केरल देश का पहला राज्य है जिसने ट्रांसजेंडरर्स के लिए नीति बनायी है।

केरल की ट्रांसजेंडर नीति

• यह नीति लैंगिक अल्पसंख्यक समूहों के बारे में सामाजिक कलंक को ख़त्म कर उनके साथ भेदभाव- मुक्त व्यवहार सुनिश्चित करने की परिकल्पना करती है।

• उच्चतम न्यायालय के 2014 के निर्णय और केरल राज्य के हालिया ट्रांसजेंडरर्स सर्वे के परिणामों को ध्यान में रखते हुए यह नीति ट्रांसजेंडरर्स के संवैधानिक अधिकारों को लागू करने के लिए बनायी गयी है।

• यह नीति हर वर्ग के ट्रांसजेंडरर्स को समावष्टि करती है-पुरुष से महिला ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स लोगों को शामिल करती है।

• यह नीति उच्चतम न्यायालय के निर्णय में वर्णित अल्पसंख्यक समूहों को पुरुष, महिला या ट्रांसजेंडर के रूप में स्वयं की पहचान के अधिकार पर बल देती है।

• यह नीति ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक व आर्थिक अवसरों, संसाधनों और सेवाओं की समान उपलब्धता, कानून के तहत समान व्यवहार का अधिकार, हिंसा के बगैर जीवन का अधिकार और सभी निर्णयकारी संस्थाओं में समान अधिकार सुनिश्चित करती है।

• यह नीति ट्रांसजेंडर न्याय बोर्ड के गठन की अनुसंशा करती है जिसके अध्यक्ष राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री होंगे।

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