कृषि भूगोल कृषि भूगोल की प्रकृति एवं विषय क्षेत्र and कृषि भूगोल की परिभाषाएं

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कृषि भूगोल की प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

  • कृषि भूगोल मानव भूगोल की प्रमुख शाखाओं में से एक है। यह मनुष्य के मृदा पोषण क्रियाकलाप द्वारा उत्पन्न भू दृश्य की व्याख्या से संबंधित है।

  • वर्तमान समय में भूगोल की जो सर्व प्रचलित परिभाषा है, उसके अनुसार, भूगोल क्षेत्रीय संगठन के प्रतिरूप एवं प्रक्रियाओं का अध्ययन है। इस परिभाषा के अनुसार कृषि भूगोल, कृषि भूदृश्य के क्षेत्रीय संगठन के प्रतिरूप एवं प्रक्रियाओं का अध्ययन है।

कृषि भूगोल की परिभाषाएं

  • कृषि भूगोल मानव भूगोल की एक प्रमुख शाखा है। विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषा में से निम्नांकित महत्वपूर्ण है-

  • एच. बर्नहार्ड के अनुसार, “कृषि भूगोल कृषि की स्थानिक विभिन्नताओं एवं उनके कारणों को स्पष्ट करता है।”

  • लेजली सायमंस के अनुसार, “कृषि भूगोल मनुष्य द्वारा भूमि पर कृषि का भूगोल है।”

  • ब्रुकफील्ड के अनुसार, “कृषि भूगोल निश्चय ही कृषि क्रिया का भूगोल है जिसके अंतर्गत फसल वितरण का ही अध्ययन नहीं किया जाता है बल्कि कृषि से संबंधित अनेक पक्षों की भिन्नता का भी अध्ययन किया जाता है।”

  • बेनेह के अनुसार, “कृषि भूगोल, भूगोल की एक शाखा है जिसमें कृषि संबंधी तत्वों विशेषकर फसल तथा उत्पादन पद्धति के क्षेत्रीय वितरण का अध्ययन किया जाता है। वितरण अध्ययन में भौतिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का विश्लेषण भी किया जाता है।

  • उपर्युक्त विभिन्न परिभाषाओ से स्पष्ट है कि कृषि भूगोल कृषि कार्यों के स्थानिक वितरण, उनके पारस्परिक संबंधों तथा अन्य स्थानिक तत्वों से पारस्परिक क्रियाओं का विश्लेषण कर प्रादेशिक स्वरूप की व्याख्या करने वाला भौगोलिक विज्ञान है।

कृषि भूगोल की प्रकृति तथा स्वरूप

  • कृषि भूगोल की प्रकृति के संबंध में यह सामान्य अवधारणा है कि इसकी प्रकृति वैज्ञानिक है क्योंकि कृषि भूगोल पर जितने भी अन्वेषण हुए हैं वह सब वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित हैं, जैसे- कृषि की क्षेत्रीय विभिन्नता कृषि एवं भौगोलिक वातावरण का संबंध एवं परिवर्तन आदि।

  • हिलमैन के अनुसार कृषि भूगोल में कृषि स्वरूप का तुलनात्मक अध्ययन एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तथा एक देश से दूसरे देश के कृषि स्वरूप में पाए जाने वाले विभिन्नताओं के अध्ययन पर अधिक जोर दिया जाता है।

कृषि भूगोल में निम्नांकित तीन प्रकार के अध्ययन किए जाते हैं-

1) किसी क्षेत्र में कृषि का कौन सा प्रकार है?

2) कोई कृषि प्रकार कहां पर स्थित है?

3) वह कृषि प्रकार वहीं पर क्यों स्थित है?

इस प्रकार कृषि पद्धतियों में स्थानिक अंतर, विभिन्न प्रकार की कृषि पद्धतियों का स्थानिक पर्यावरण से संबंध एवं पारस्परिक क्रियाओं का विवेचनात्मक अध्ययन, आदि का विश्लेषण कृषि भूगोल में किया जाता है।

कृषि भूगोल का विषय क्षेत्र

  • कृषि के विभिन्न प्रकारों का अध्ययन जो विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में फैले हुए हैं एवं इन प्रकारों की व्याख्या एवं अध्ययन वहां के क्षेत्रीय क्रम में किया जाता है।

  • विश्व में फैले कृषि प्रकारों की भिन्नताओ एवं समानताओं के सामयिक व्याख्या एवं विश्लेषण तथा उन कारणों की खोज करना जिससे यह भिन्नताएं विकसित होती हैं।

  • कृषि कार्यों में प्रचलित विभिन्न प्रणालियों एवं पद्धतियों के भौगोलिक परिवेश में व्याख्या करना।

  • किसी भी क्षेत्र का कृषि प्रारूप एवं कृषि कार्य परिवर्तनशील होता है। इन परिवर्तनों की दिशा एवं मात्रा का अध्ययन करना।

  • विभिन्न क्षेत्रों में हुए कृषि विकास का स्तर मापन करना जिससे भावी कृषि विकास की सही दिशा निर्धारित की जा सके।

  • कृषि उत्पादन की दृष्टि से विकसित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना जिससे उनके विकास की गति तीव्र की जा सके।

  • कृषि के लिए अनुपयुक्त क्षेत्र, सीमांत क्षेत्र एवं गतिशील क्षेत्रों को सीमा अंकित करना आदि सभी तथ्य कृषि भूगोल के विषय क्षेत्र के मुख्य आधार हैं।