चीन का भूगोल (Geography of China) Part 2

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धरातल-

चीन मूलत: पवन, पठार, मध्य भूमि तथा मैदान स्थालाकृति का देश है। चीन की 47 प्रतिशत भूमि पर पर्वत, 41 प्रतिशत भूमि पर पठार तथा 12 प्रतिशत भूमि पर मैदान फैले हुए हैं। यहाँ मात्र 16 प्रतिशत ऐसे क्षेत्र हैं, जिसकी ऊँचाई 500 मीटर से कम है। चीन को सोपाननुमा स्थलाकृति का देश भी कहा जाता है।

description of the ground of china

China

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चीन के शिखर-

  • माउंट क्वोमोलोंगम (एमटी एव्हरेस्ट) - 8848-13 मीटर

  • माउंट कगरी (एमटी के2) - 8611 मीटर

  • माउंट गुरुला मौदाता -7728 मीटर (कुनलुन)

  • नामचा बारवा- 7756 मीटर

  • पर्वतीय प्रदेश- विश्व की छत पामीर की गाँठ से तीन पर्वत श्रेणियाँ पूर्व की ओर अग्रसर होकर चीन में पश्चिम-पूर्व दिशा में उत्तरी पर्वतमाला, मध्यवर्ती पर्वतमाला और दक्षिणी पर्वतमाला के रूप में विस्तृत हैं।

    उत्तरी पर्वतमाला पश्चिम में पामीर की गाँठ से उत्तरीपूर्वी भाग में मंचूरिया तक विस्तृत है। इस पर्वत श्रेणी को ’मंगोलिया चाप’ भी कहा जाता है। यह पर्वत श्रेणी उत्तर एवं पूर्व दिशा में अंग्रेजी वर्ण ’यू’ के आकार में दोलांग पर्वत एवं चिनसान पर्वत के रूप में विस्तृत है। यह पर्वतक्रम में श्रेणियाँ लियेनशान पर्वत से प्रारंभ होकर तियनेशान, महान ंवगन तथा लघु रिवंगन में फैली हुई है। इसमें तियेनशान सबसे प्रमुख पर्वत है। यह पर्वत (सर्वोच्च शिविर-तोमूर-7435 मी) तारिम बेसिन को घेरे हुए है। औसत ऊँचाई 2200 मीटर है। तिएनशान में कैलिडोनियन, हर्सिनियन और अल्पाइन भूसंचलन के प्रमाण है।