रूस का भूगोल (Geography of Russia) Part 4

Download PDF of This Page (Size: 183K)

जलवायु विशेषताएँ- (वनस्पति एवं मृदा)

  • टुंड्रा प्रदेश- 66 1/20 नार्थ अक्षांश के उत्तर स्थित क्षेत्र को टुण्ड्रा जलवायु का क्षेत्र कहते है। यहाँ वर्ष के 9 महीने तक हिमाच्छादन की स्थिति रहती है। कभी-कभी ग्रीष्मकाल में भी हिमवर्षा हो जाती है। इन क्षेत्रों में टुण्ड्रा प्रकार की वनस्पति तथा टुण्ड्रा मृदा (चिकनी तथा बलुई) मिलती है।

  • टैगा प्रदेश- टुण्ड्रा प्रदेश के नीचे 500 नार्थ अक्षांश तक यह जलवायु मिलती है। इसके अंतर्गत साइबेरिया का अधिकतर क्षेत्र आता है। यूरोपीय भाग में इसका विस्तार हे। यहाँ जलवायु मध्यम प्रकार की, वायु नम तथा वनस्पति काल अपेक्षाकृत लंबा होता है। वर्षा (3-60 सेमी.) तक होती है। यहाँ पर विश्व के सर्वाधिक (42 प्रतिशत) टैगा वन(कोणधारी वन मिलते हैं।) रूस में मिलते है। यहाँ पॉडजॉल प्रकार की मृदा भी पायी जाती हैं।

  • महादव्ीपीय शीतोष्ण जलवायु प्रदेश- यह यूरोपीय रूस के अधिकतर क्षेत्रों की विशेषता है। यहाँ जाड़े में अधिक ठंडक और गर्मी में अपेक्षाकृत अधिक तापमान मिलने के साथ-साथ वर्षा में कमी पाई जाती हैं। वर्षा मुख्यत: गर्मी के दिनों में होती है। यहाँ चौड़ी पत्ती वाले शीतोष्ण पतझड़ वन मिलते हैं। ये मिश्रित वन के क्षेत्र है। इस प्रदेश में मुख्यत: पॉडजोलिक मृदा पायी जाती है।

  • शीतोष्ण घास स्थली जलवायु प्रदेश/स्टेपी प्रदेश- इसका विस्तार काला सागर के उत्तर से लेकर कैस्पिन सागर, वोल्गा का मध्य भाग, साइबेरिया के दक्षिणी -पश्चिमी भाग (एवं ट्रांस बैकाल) में पाई जाती है। यहाँ वर्षा की मात्रा घटकर 50 से.मी या इससे भी कम हो जाती है। इस प्रदेश में स्टेपी घास स्थल का विकास हुआ है। इस प्रदेश में चरनोजम, चेस्टनट, तथा भूरी रंग की मृदा पायी जाती हैं। चरनोजम, निम्न तथा मध्य वोल्गा में, चेरूटनट, पश्चिमी साइबेरिया में जबकि भूरे रंग की मृदा प. साइबेरिया के दक्षिणी भाग (कजाक की सीमा पर) में मिलती हैं।

  • मानसूनी/पूर्वी तटीय जलवायु प्रदेश- यह जलवायु नदी के बेसिन, पिमोरे क्षेत्र, साखलिन व कमचटका क्षेत्र में पायी जाती है। यहाँ ग्रीष्म ऋतु में दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व नम हवाओं में वर्षा होती है। शीत ऋतु में मानसून उत्तर तथा उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने के कारण शुष्क ऋतु होती हें। वर्षा (60-100) से.मी. तक होती है। यहाँ मिश्रित वन पाए जाते हैं। यह मुख्यत: पॉडजोलिक मृदा का क्षेत्र है।

  • पर्वतीय जलवायु- यह जलवायु कॉकेशस, अल्टाई सयान पर्वत, बैकाल पर्वत आदि क्षेत्रों में मिलती है।

  • जाड़े की ऋतु में संपूर्ण साइबेरिया उच्च दाब का क्षेत्र बन जाता है तथा यहाँ से हवा समुद्र की ओर चलती है, जिसके कारण पूरे प्रदेश में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। यहाँ दो प्रकार की स्थानीय वायु चलती है।

  • पूर्गा जिसकी तुलना बिलिजजार्ड से की जा सकती है।

  • बूरान इसकी तुलना नार्थर से की जा सकती है।

  • साइबेरिया की जलवायु को परमाफोर्स्ट जलवायु भी कहा जाता है, इसमें अक्सर स्टील फॉल होता है। परमाफोर्स्ट जलवायु में विकसित स्थलाकृति को पेरिगिलेसियल लैंड फॉर्म periglacial (परिहिमनदी) land (जमीन) forms (खेत) कहते है।

  • यूराल पर्वत सिर्फ एशिया और यूरोप की विभाजक रेखा ही नहीं है, बल्कि यही से 50 से.मी. की वर्षा रेखा से भी गुजरती है। यूरोपीय रुस में वर्षा 50 से.मी. से अधिक तथा साइबेरिया में 50 से.मी से कम वर्षा होती हैं। उत्तर-पूर्वी साइबेरिया में सबसे कम वर्षा (औसत 20 से.मी ) होती हैं। यह ध्रुवीय मरूस्थल का क्षेत्र है। रूस के किसी भी भाग में वर्षा 100 से.मी से अधिक नहीं होती हैं।