दक्षिण अफ्रीका का भूगोल (Geography of South Africa) Part 4

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  • मध्य अक्षांशीय महादव्ीपीय जलवायु- यह पूर्वी तटीय जलवायु और भूमध्यसागरीय जलवायु के बीच का क्षेत्र है। यह ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत के वृष्टि छाया में अवस्थित है। यहाँ गर्मी का औसत तापमान 270 c , तथा जाड़े का औसत तापमान 160 c होता है। वाष्पोत्सर्जन के सीमित प्रभाव के कारण यहाँ घास का मैदान विकसित हुआ है। यह घास का मैदान वेल्ड के नाम से जाना जाता है। यह लगभग त्रिभुजाकार है। वेल्ड प्रदेश को तीन भागों में बाँटते हैं- हाई (उच्च) वेल्ड (झाल), लो (कम) वेल्ड (झाल) तथा बुश (झाड़ी) वेल्ड (झाल)। बुश वेल्ड मुख्यत- ट्रांसचाल राज्य में है। हाई वेल्ड सघन और लंबे होते हैं। ज्यों-ज्यों उत्तर की तरफ जाते हैं, घास की लंबाई और संघनता में कमी आती है। यह काल मृदा का क्षेत्र है। यह दक्षिण अफ्रीका की सबसे उपजाऊ मृदा है। हाई वेल्ड चरनोतम मृदा का क्षेत्र है। लो वेल्ड और बुश वेल्ड में चेस्टनट मृदा पायी जाती है। यह मक्का प्रदेश हैं।

  • मरूस्थलीय जलवायु- यह उत्तर-पश्चिम में अवस्थित है। यहाँ गर्मी का औसत तापमान 200 c तथा जाड़े का तापमान 100 c होता है। इसका प्रमुख कारण वेंग्वेला की ठंडी जलधारा का गहन प्रभाव है। वेंग्वेला धारा के तापमान में स्थिरता है, जिसके कारण इस क्षेत्र में तापान्तर अधिक नहीं है। यह कालाहरी मरूस्थल का क्षेत्र है।

  • संशोधित उष्ण कटिबंधीय जलवायु- यह मुख्यत: आर्कियन पठारी प्रदेश की जलवायु है। इसके तापमान में मैदान की तुलना में 50 -70 c की कमी आती है। है। यहाँ गर्मी का औसत तापमान 140 -200 c तथा जाड़े का औसत तापमान 30 -50 c तक होता है। यह अक्षांश की दृष्टि से उष्ण और उपोष्ण है लेकिन तापमान की दृष्टि से शीतोष्ण हो जाता है। अत: इन क्षेत्रों में यूरोपीय मूल के लोग हैं। इस क्षेत्र में लाल मृदा पायी जाती है।