पश्चिमी यूरोप का भूगोल (Geography of Western Europe) Part 8

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जलवायु विशेषताएँ- यूरोप की जलवायु को प्रभावित करने वाले निम्न कारक है-

  • स्थिति एवं विस्तार-यूरोप की स्थिति शीतोष्ण कटिबंध में है। पूर्व पश्चिम में विस्तार के कारण मध्य भाग और पूर्वी भाग की जलवायु विषम या महादव्ीपीय हैं।

  • प्रचलित पवन तथा वायुराशियाँ- यह सालोंभर पछुवा के प्रभाव में रहता है, केवल दक्षिणी भाग गर्मी वायु पट्टियों के खिसकने से वाणिज्यिक पवन के प्रभाव में आ जाता है।

यूरोप की जलवायु वायुराशियों दव्ारा बहुत प्रभावित होती हैं। ये वायुराशियाँ चार हैं-

  • ध्रुवीय महादव्ीपीय वायुराशि, जिसका उद्गम क्षेत्र मध्य यूरोप हैं तथा यह हिमपात लाती है।

  • ध्रुवीय सामूहिक वायुराशि जिसका उद्गम अटलांटिक महासागर है। यह अपेक्षाकृत उष्णार्द होती है तथा यह वर्षा लाती है।

  • उष्ण कटिबंधीय महादव्ीपीय वायुराशि जिसकी उत्पत्ति उत्तरी अफ्रीका तथा टर्की में होती है और यह भूमध्यसागर से होकर यूरोप में प्रवेश करती है। द. यूरोप में ध्रुवीय वायुरािशियों के संपर्क में आने पर यह चक्रवात को जन्म देती है।

  • उष्ण कटिबंधीय सामूहिक वायुराशि, जिसकी उत्पत्ति अटलांटिक महासागर के उच्च दाब क्षेत्र (जाड़े में) में होती है। यह कभी-कभी होता है।

  • उच्चानय एवं पर्वतश्रेणियों की दिशा-यूरोप में उच्च पर्वतीय भाग और विशाल मैदानों का विस्तार पश्चिम से पूर्व की ओर है, फलस्वरुप यहाँ अटलांटिक महासागर से आने वाले पछुवा पवन सीधे प्रवेश कर जाते है। उत्तर की ओर भी किसी प्राकृतिक अवरोध के अभाव में आर्कटिक महासागर की सर्द हवाएँ बेरोक टोक मध्य पूर्व तक चली आती है।

  • समुद्री प्रभाव- यूरोप के भीतरी भागों तक समुद्र और खाड़ियों का प्रवेश है जैसे -उत्तर सागर, बाल्टिक सागर, फिनलैंड की खाड़ी, बोथनिया की खाड़ी, एड्रियाटिक सागर इत्यादि, जिससे यहाँ की जलवायु सम रहती है।

  • उत्तरी अटलांटिक प्रवाह-यह गल्फ स्ट्रीम का विस्तार है। इससे पश्चिमोत्तर यूरोप हैं।