विश्व के प्रमुख प्राकृतिक प्रदेश (Major natural areas of the world) Part 4

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उष्ण मरूस्थल/सहारा प्रदेश:-

स्थिति एव विस्तार -

  • इसका विस्तार 150 से 300 अक्षांश के बीच पाया जाता है।

  • सहारा को छोड़कर अन्य भागों में यह प्राकृतिक प्रदेश महादेशों के पश्चिमी भाग में पाया जाता हैं। सहारा में इसका विस्तार पूर्वीत्तर तक है जिसका कारण यह है कि इस भाग में आने वाले पवन द. प. एशिया के स्थल भाग से पहुँचते हैं जो शुष्क होने के कारण वर्षा नहीं लाते।

  • प्रमुख उष्ण मरुस्थल में सहारा, कालाहारी, अरब, ईरान, थार, निम्न कैलीफोर्निया, एरीजोना एवं कोलरेडो, अटाकामा एवं आस्ट्रेलिया का पश्चिमी एवं मध्य भाग आते हैं।

प्राकृतिक वनस्पति एवं जीव जन्तु-

  • इस प्रदेश में मुख्यत: नागफली एवं अन्य कंटीली वनस्पतियां पाई जाती हैं। वृक्षों की जड़े जमीन में काफी गहराई तक चली जाती हें ताकि वे जल का अवशोषण कर सकें। वृक्षों की पत्तियाँं मोटी एवं तने भी मोटे होते हैं। कुछ पौधों की पत्तियाँं एक प्रकार के मोम से ढकी रहती है ताकि नमी को बनाए रखा जा सके। वनस्पतियों को xerophyte (मरूभ्दिद) कहा जाता हैं।

  • मरुस्थलों के बीच यत्र-तत्र मरुद्यानों में खजूर के पेड़ बहुतायत से पाए जाते हैं।

  • ऊँट इस प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण पशु हैं जिसे मरुस्थल का जहाज कहा जाता है। शुतुरर्मुग पक्षी पाए जाते हैं। भेड़ तथा बकरियां भी पाली जाती हैं।

जलवायु विशेषताएँ-

  • इस प्रदेश में वार्षिक एवं दैनिक तापांतर अधिक होता है। जाड़े की ऋतु में औसत तापमान 100 c एवं गर्मी की ऋतु में तापमान 300 c से भी अधिक होता हैं।

  • मेघ रहित आकाश, जल के अभाव एवं वनस्पति विहीन धरातल के कारण ये प्रदेश सौर विकिरण का अधिकतम भाग ग्रहण करते हैं। लीबिया के अजीलिया में विश्व का सबसे ऊँचा तापमान (58.70 c) अंकित किया गया हैं। कैलीफोर्निया के मृत घाटी का तापमान भी 58.0 के लगभग हो जाता हैं।

  • रात में आकाश साफ रहने के कारण सौर ताप का विकिरण तेजी से होता है एवं जाड़े की ऋतु में न्यूनतम तापमान 50 c से भी नीचे चला जाता हैं। कहीं-कहीं रात में पाला पड़ता हैं।

  • उष्णता के अतिरिक्त यह पद्रेश शुष्कता के लिए भी प्रसद्धि है। यहाँ वर्षा की मात्रा अत्यल्प (10-12) से. मी होती हैं।

  • वर्षा काफी अनिश्चित होती हैं। अनेक स्थानों पर वर्षों तक वर्षा नहीं होती है एवं कभी-कभी एक ही दिन में 5-10 से. मी. तक वर्षा हो जाती हैं।

शुष्कता के कारण-

  • ये पद्रेश उपोष्ण उच्च दाब की पेटी में स्थित है जहाँ वायु उपर से नीचे उतरती हैं।

  • यहां आने वाले वाणिज्यिक पवन स्थल खंड से आते हैं, साथ ही ये वाणिज्यिक पवन अपेक्षाकृत ठंडे प्रदेशों में उत्पन्न होती हैं एवं मरुस्थल को पार करते समय गर्म हो जाती है, और वर्षा नहीं होती।

  • इस प्रदेश के पश्चिमी तट पर ठंडी जलधाराएँ प्रवाहित होती है, जिसके कारण जहां कहीं समुद्र की ओर से चलकर मरुस्थलीय तटों पर पवन पहुँचते हैं, वे ठंडी जलधाराओं के प्रभाव में आकर जल्द ठंडे हो जाते हें एवं कुहरा उत्पन्न करते हैं।

आर्थिक विकास-

  • इस प्रदेश को सतत कठिनाइयों का प्रदेश कहा जाता हैं। इस प्रदेश के लोग खानाबदोशी का जीवन व्यतीत करते हैं।

  • मरुद्यानों में खजूर, मकई, ज्वार-बाजरा, कपास एवं तंबाकू की कृषि की जाती हैं। खजूर को मरुस्थल की रोटी कहा गया हैं।

  • सिंचाई एवं खनिज पदार्थ वाले क्षेत्रों में स्थायी आबादी पाई जाती हैं। घरो की छतें चपटी होती हैं।

  • इस प्रदेश में पाए जाने वाले खनिज पदार्थो में चिली का कलमी शोरा (नाइट्रेट), कोलरेडो एवं आस्ट्रेलिया का सोना, पश्चिमी एशिया का पेट्रोलियम एवं सहारा, कालाहारी तथा थार का नमक उल्लेखनीय हैं।