ब्रिटिश सरकार की प्रशासनिक एवं सैन्य नीतियाँ (Administrative and Military Policies of British Government) Part 10

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रैले कमीशन (आयोग) रिपोर्ट (विवरण) ,1902

इस कमीशन ने भारत के विभिन्न प्रांतो का दोहरा करके एक रिपोर्ट जून ,1902 ई. में प्रस्तुत कर दी। यह रिपोर्ट तथा सरकार की उस पर टिप्पणी अक्टूबर में प्रकाशित हुई। इस रिपोर्ट में भविष्य में उच्च शिक्षा से संबंधित महाविद्यालयों की सरलता से मान्यता न देने, विश्वविद्यालयों की विभिन्न संस्थाओं में सरकारी प्रतिनिधित्व बझ़ाने, विधी शिक्षा को केंद्रित करने के सुझाव थे। शिक्षित भारतीय नेताओं को सबसे अधिक आपत्ति उच्च शिक्षा प्रस्तावों से थी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी इन प्रस्तावों की आलोचना की। कर्जन ने आलोचना की चिंता न करते हुए 1904 ई. भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पास कर लिया इसकी मुख्य धाराएं निम्नलिखित थी-

  • तीनों पुराने विश्वविद्यालयों के सिनेट की सदस्यों की संख्या कम से कम पचास और अधिक से अधिक 100 निर्धारित कर दी गई। नए विश्वविद्यालयों के लिए यह संख्या क्रमश: 40 और 75 निर्धारित कर दी गई। विश्वविद्यालयों सिंडीकेट के सदस्यों की संख्या भी 20 से कम कर दी गई।

  • महाविद्यालयों को विश्वविद्यलायों से संबंधित करने का अधिकार सरकार को दे दिया गया। प्रोफेसर (प्राचार्य) तथा प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए भी सरकार की स्वीकृति आवश्यक हो गई। शिक्षा नीति संबंधी प्रश्न भी सरकार की अनुमति के बिना तय नहीं किए जाएंगे।

  • विश्वविद्यालयों को स्नातकोत्तर शिक्षा के प्रबंध के भी अधिकार दे दिए गए और इस प्रकार अनुसंधान तथा शिक्षा के लिए कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराई गई।

कर्जन दव्ारा पास किए विश्वविद्यालय अधिनियम से यह भली-भांति स्पष्ट होता था कि उसका लक्ष्य प्राइमरी शिक्षा को प्रोत्साहन देना कम था। उसका वास्तविक उद्देश्य उच्च शिक्षा को सरकारी नियंत्रण में लाने का प्रयत्न था। कुछ लेखको ने 1950 ई. के पश्चात्‌ स्वतंत्र भारत में शिक्षा पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के प्रयत्न को कर्जन की नीति का औचित्य बताया है। यह तर्क भ्रांतिपूर्ण है। कर्जन की नीति का लक्ष्य उच्च शिक्षा को नियंत्रित करके भारतीय राष्ट्रीय विचारधारा को कुठित करना था। इस विश्वविद्यालय अधिनियम का इतना लाभ अवश्य हुआ कि अब विश्वविद्यालय केवल परीक्षा संचालन संस्थाएं नहीं रह गई बल्कि शिक्षण संस्थाएं भी बन गई। इससे कालांतर में उच्च शिक्षा का स्तर बढ़ा।