ब्रिटिश सरकार की प्रशासनिक एवं सैन्य नीतियाँ (Administrative and Military Policies of British Government) Part 21

Download PDF of This Page (Size: 144K)

नरेन्द्र मंडल

नरेन्द्र के प्रावधानों के अनुसार देशी रियासतों को तीन श्रेणियों में विभक्त कर उनके साथ संबंध निश्चित किए गए। पहली श्रेणी में 109 ’पूर्ण वैधानिक और क्षेत्राधिकार’ थे। ये मनोनीत कर 12 प्रतिनिधि नरेंद्रमंडल में भेजते थे। तीसरी श्रेणी में अन्य सभी (326) रियासतों को ’जागीरों अथवा सामंतशाही जागीरों के मालिकों की श्रेणी’ में रखा गया। मंडल के उद्घाटन के समय ब्रिटिश ताज ने देशी राजाओं के विशेषाधिकारों और मान सम्मान की सुरक्षा के आश्वासन को दोहराया। नरेन्द्रमंडल ने देशी रियासतों को ब्रिटिश सरकार के ओर नजदीक ला दिया। नरेन्द्रमंडल सिर्फ एक परामर्शदात्री संस्था थी, इसका किसी राज्य के आंतरिक मामलों से कोई भी संबंध नहीं था।

बटलर समिति

लॉर्ड रिडिंग के 1926 ई. के वक्तव्य के देशी शासकों को प्रेरित किया कि वे सरकार के साथ अपने संबंधों को स्पष्ट करें। ऐसी मांग लॉर्ड इरविन से कि गई। फलन्त: 1927 ई. में सरकार ने दोनों शक्तियों के मध्य संबंध सुनिश्चित करने के लिये बटलर समिति नियुक्त की। इस समिति ने निम्नलिखित सिफारिशें प्रस्तुत की-

  • सर्वश्रेष्ठता सर्वश्रेष्ठ रहनी चाहिए, इसे बदलती हुई परिस्थितियों के अनुसार अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। अस्पष्ट मामलों से रीति-रिवाजों के अनुसार निर्णय होने चाहिए।

  • देशी राज्यों के साथ संबंध के लिये सपरिषद् गवर्नर जनरल नहीं, बल्कि वायसराय ब्रिटिश सम्राट का प्रतिनिधि माना जाए।

  • देशी नरेशों की सहमति के बिना ब्रिटिश सरकार और देशी राज्यों के संबंध किसी ऐसी भारतीय सरकार को हस्तांतरित नहीं किए जाए जो व्यवस्थापिक के प्रति उत्तरदायी हो।

  • देशी राज्यों की परिषद् बनाने की योजना रद्द कर दी जाए।

  • किसी राज्य के प्रशासन में हस्तक्षेप का अधिकार वायसराय के जिम्मे सुरक्षित रहे।

  • देशी रियासतों एवं ब्रिटिश भारत में होने वाले मतभेदों को सुलझानें के लिए समितियां नियुक्त हों।

  • यह व्यवस्था आर्थिक मामलों के संबंध में भी हो।

  • राजनीतिक पदाधिकारियों की नियुक्ती इंग्लैंड में शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों में से कि जाए और उनकी शिक्षा की अलंग व्यवस्था हो।

  • देशी शासकों एंव राष्ट्रीय नेताओं ने इन सिफारिशों की कड़ी आलोचना की।