1857 के बाद भारत का संवैधानिक विकास (Constitutional Development of India after 1857) Part 5 for Competitive Exams

Glide to success with Doorsteptutor material for UGC : Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 119K)

1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

भारतीय संवैधानिक विकास के इतिहास में 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम अंतिम था। माउंटबेटन योजना (3 जून, 1947) के अनुसार भारतीय स्वतंत्रता के संबंध में एक विधेयक 4 जुलाई, 1947 को पेश किया गया और 18 जुलाई को स्वीकृत कर लिया गया। 15 अगस्त, 1947 को यह लागू किया गया। इस अधिनियम के प्रावधान निम्न थे-

  • प्रस्ताव में भारतीय प्रायदव्ीप को दो राष्ट्र भारतीय संघ तथा पाकिस्तान में बांट दिया गया।

  • भारतीय संघ या हिन्दुस्तान में वे सभी सम्मिलित किए जाएंगे, सिवाए उस प्रदेश के जो अब पाकिस्तान कहलाएगा। पाकिस्तान में सिन्ध, ब्रिटिश बलूचिस्तान, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत, पश्चिम पंजाब तथा पूर्वी बंगाल होंगे। इसमें अंतिम दो प्रांतों की सुनिश्चित सीमाओं का निर्धारण एक सीमा आयोग या जनमत संग्रह दव्ारा किया जाएगा।

  • 15 अगस्त, 1947 के बाद भारत तथा पाकिस्तान पर अंग्रेजी संसद के क्षेत्राधिकार की समाप्ति हो जाएगी।

  • भारत सरकार अधिनियम, 1935 तब तक यथासंभव इन दोनों राज्यों का शासन चलाने में सहायता देगा, जब तक कि नए संविधान प्रत्येक राज्य दव्ारा नहीं अपना लिया जाता। आवश्यकता पड़ने पर अधिनियम में परिवर्तन भी किया जा सकता है, जिसके लिए गवर्नर जनरल की अनुमति आवश्यक होगी।

  • भारतीय रियासतों को यह अधिकार दिया गया कि वे अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान किसी एक में विलय का निर्णय ले सकती हैं।

  • जब तक दोनों अधिराज्यों में नए संविधान का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक राज्यों की संविधान सभाओं को अपने लिए कानून बनाने का अधिकार होगा।

  • दोनों अधिराज्यों के पास यह अधिकार सुरक्षित होगा कि वे अपनी इच्छानुसार राष्ट्रमंडल में बने रहें। ब्रिटेन में भारत मंत्री के पद को समाप्त कर दिया गया।

  • जब तक प्रांतों में नए चुनाव नहीं कराए जाते, उस समय तक प्रांतों में पुराने विधान मंडल कार्य करते रहेंगे।

इस अधिनियम की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें देश को दो भागों में बांट दिया गया था। पर कांग्रेस एवं लीग दोनों ने ही वर्तमान परिस्थितियों में इसे स्वीकार कर लिया।

Developed by: