भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का विकास (Development of Indian National Movement) Part 8for Competitive Exams

Get unlimited access to the best preparation resource for CTET : Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

क्रांतिकारी आंदोलन का प्रसार

बंगाल

बंगाल आंतकवादी आंदोलन का गढ़ था। यहाँ क्रांतिकारी विचारधारा को वारिन्द्र कुमार घोष एवं भूपेन्द्र नाथ दत्त ने फैलाया। 1906 में इन दोनों ने मिलकर युगांतर नामक समाचार पत्र का प्रकाशन किया। बंगाल में क्रांतिकारी आंदोलन की शुरूआत भद्रलोक समाज ने कि। इस समाचार पत्र ने क्रांति के प्रचार में सर्वाधिक योगदान दिया। वारिन्द्र घोष एवं भूपेन्द्र दत्त के सहयोग से ही 1907 में अनुशीलन समिति का गठन किया। 23 दिसंबर, 1907 को ढाका के पूर्व जिलाधीश ऐलेन की पीठ पर गोली मारी गयी। प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम ने किंग्सफोर्ड को मारने का असफल प्रयास किया। चाकी ने आत्महत्या कर ली और खुदीराम को फाँसी हुई इस घटना का भारतीय युवकों पर गहरा प्रभाव पड़ा।

पंजाब

1907 में आतंकवाद की अग्नि पंजाब में भी उठी। अजित सिंह, भाई परमानंद, बालुमुकुंद और लाला हरदयाल ने क्रांतिकारियों को संगठित किया। 1912 ई. में रास बिहारी बोस ने हार्डिंग पर गोली चलाई थी। 1915 में पंजाब में एक संगठित आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई जिसमें निश्चित किया गया कि 21 फरवरी, 1915 को संपूर्ण उत्तर भारत में एक साथ क्रांति का बिगुल बजाया जाए। पर इस योजना का पता सरकार को चल गया और नेताओं को पकड़कर उन्हें लाहौर षडयंत्र केस में सजा दी गई। इन नेताओं में पृथ्वी सिंह, परमानंद, करतार सिंह, विनायक, जगत सिंह आदि मुख्य थे।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आंदोलन को उभारने का श्रेय तिलक के पत्र केसरी को जाता है। 1897 को प्लेग कमीश्नर (आयुक्त) रैंड (फाड़ना) एवं एमहर्स्ट की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। दामोदर चापेकर को मृत्युदंड दे दिया गया। 1904 में विनायक दामोदर सावरकर ने अभिनव भारत नामक एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की। महाराष्ट्र से महत्वपूर्ण क्रांतिकारी पत्र ‘काल’ का संपादन किया गया। 1909 में गणेश सावरकर को आजीवन कारावास की सजा मिली। उसी वर्ष इस मुकदमे के जज को गोली से उड़ा दिया गया।

Developed by: