गाँधी युग (Gandhi Era) Part 16

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गांधी इरविन समझौता

प्रथम गोलमेज सम्मेलन कांग्रेस के बिना महत्वहीन साबित हुआ। प्रधानमंत्री रैम्से मैकडोनाल्ड ने आशा जतायी कि कांग्रेस दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेगी। इसके फलस्वरूप गांधी जी को जेल से रिहा कर दिया गया। कांग्रेस के कुछ नेताओं की मध्यस्थता में गांधी के साथ समझौते के प्रयास किए गए। 5 मार्च 1931 को गांधी और इरविन के बीच एक समझौता हुआ। इसमें निम्न बातें शामिल थीं-

  • सभी राजनीतिक बंदियों को मुक्त करना।

  • राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमें वापस लेना।

  • भारत में एक परिसंघ की स्थापना।

  • सत्ता हस्तांतरण भारतीयों के पक्ष में।

  • सविनय अवज्ञा आंदोलन वापस लेना।

  • कांग्रेस दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेगी।

गांधी-इरविन समझौते की मुख्य बात यह थी कि इसमें पहली बार भारतीयों नेताओं के साथ समानता के स्तर पर बात की गई थी। पर इस समझौते से कांग्रेस के कई नेता क्षुब्ध थे। गांधी जी ने तीन क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को दिए गए मृत्युदंड के इस समझौते को अंग्रेजी सरकार की हार मानती थी।

कराची में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते को स्वीकार कर लिया गया तथा गांधी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप् में दव्तीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने इंग्लैंड गए।

कराची अधिवेशन

दिल्ली समझौते (गांधी-इरविन समझौता) को स्वीकृति प्रदान करने के लिए कांग्रेस का कराची अधिवेशन 29 मार्च, 1931 को वल्लभ भाई पटेल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इसके कुछ समय पूर्व भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु को फांसी दिये जाने के कारण नौजवान कार्यकर्ता गांधी जी से खिन्न थे और पंजाब नौजवान सभा ने इसके लिए गांधी जी की तीव्र आलोचना की। इस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य के लक्ष्य को दोहराते हुए दो मुख्य प्रस्तावों को स्वीकार किया। जिसमें पहला मौलिक अधिकार एवं दूसरा राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम से संबद्ध था। इन प्रस्तावों के कारण कराची सत्र एक यादगार सत्र बन गया। इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार पूर्ण स्वराज्य को परिभाषित किया और यह घोषित किया कि जनता के क्षोभ को समाप्त करने के लिए राजनीतिक आजादी के साथ-साथ आर्थिक आजादी आवश्यक हैं। इस अधिवेशन दव्ारा प्रस्तावित प्रमुख मुद्दे निम्न थे-

  • लोकसम्मत मौलिक अधिकारों का आश्वासन।

  • जनता के सभी वर्गों से जातीय और धार्मिक लाचारियों की समाप्ति।

  • विभिन्न क्षेत्रों की राष्ट्रीय भाषाओं का विकास और भाषायी आधार पर भारत के प्रांतों का गठन।

  • करों में कमी

  • बहुत सी देशी रियासतों और पिछड़े क्षेत्रों में प्रचलित बेगार की प्रथा की समाप्ति।

  • नमक कर की समाप्ति।

  • मजदूरों के विशेषाधिकारों की सुरक्षा, जैसे-काम करने की स्वस्थ स्थितियाँ, न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण, बेरोजगारी का बीमा, आठ घंटे प्रतिदिन का काम और छुट्‌िटयों का वेतन।