गाँधी युग (Gandhi Era) Part 2

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खिलाफत आंदोलन

”तुर्की का सुल्तान विशाल-साम्राज्य का स्वामी था और मुस्लिम विश्व जगत का ’खलीफा’ धार्मिक गुरु था। मुसलमान स्वयं को इनके संरक्षण में गौरव का अनुभव करते थे। भारत के मुसलमान इस खलीफा को बनाये रखने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थे। खलीफा को बनाये रखने के प्रश्न पर ही मुस्लिम समुदाय दव्ारा ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन चलाया गया था, वहीं खिलाफत आंदोलन कहलाया।

प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीय मुसलमानों का सहयोग प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री जार्ज ने वादा किया कि युद्ध समाप्त होने के बाद तुर्की के प्रति प्रतिशोध और प्रतिरोध की भावना नहीं अपनायी जाएगी। तुर्की के खलीफा का अंत नहीं किया जाएगा तथा तुर्की की अखंडता और उसके अधीन एशियाई प्रदेशों पर उसका नियंत्रण यथास्थितिपूर्ण रहेगा।

परन्तु युद्ध समाप्त होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने इस आश्वासन को पूरा नहीं किया। मित्र राज्यों ने तुर्की के साथ सेवर्स की संधि कर तुर्की के साम्राज्य को छिन्न-भिन्न कर दिया। भारतीय मुसलमानों को ब्रिटिश सरकार के इस विश्वासघात से गहरा आघात लगा और उन्होंने देश में खिलाफत आंदोलन आरंभ कर दिया।

खिलाफत आंदोलन के कारण

खिलाफत आंदोलन के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-

  • प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने मुसलमानों को दिया गया आश्वासन पूरा नहीं किया।

  • अंग्रेजों ने तुर्की के खलीफा (सुलतान जो धार्मिक गुरू था) को अपदस्थ कर दिया।

  • प्रथम विश्वयुद्ध में तुर्की के सुल्तान ने ब्रिटेन के विरुद्ध जर्मनी का साथ दिया था।

  • भारतीय मुसलमान ब्रिटिश सरकार की भेदभाव पूर्ण नीति से संशिकत हो चुके थे।

  • ब्रिटिश सरकार कांग्रेस लीग समझौते (1916) के विरुद्ध थीं।

  • भारत के वायसराय ने मुस्लिम शिष्ट मंडलों को कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया था।

खिलाफत आंदोलन का कार्यक्रम

  • तुर्की के साम्राज्य को विघटित होने से रोका जाए।

  • मुस्लिम जगत के खलीफा और तुर्की के सुल्तान को रिहा करके पुन: गद्दी पर आसीन किया जाए।

  • सेवर्स की संधि को तत्काल भंग किया जाए।

  • इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में निम्न बातों को भी शामिल किया गया-

  • भारतीय मुसलमान ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग करना छोड़ दें।

  • पुलिस की नौकरी से त्यागपत्र दे दें।

  • सरकारी उत्सवों में शामिल होना बंद कर दे।