गाँधी युग (Gandhi Era) Part 26

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बाल्कन योजना

माउंटबेटन ने मार्च, 1947 से मई, 1947 के बीच निर्णय किया कि कैबिनेट मिशन योजना अनियंत्रित हो चुकी है जिसका कोई विकल्प होना चाहिए। जिसके विकल्प के रूप में बाल्कन योजना थी। इसमें यह प्रावधान किया गया था कि सत्ता हस्तांतरण से पहले संघ का निर्माण हो जाता है तो उसे सत्ता का हस्तांतरण कर दिया जाएगा। इसके साथ ही बंगाल एवं पंजाब को भी यह विकल्प दिया गया था कि वे अपने बंटवारें के लिए जनमत संग्रह का सहारा ले सकते हैं। इसी प्रकार इसमें देशी रियासतों को भी यह छूट प्रदान की गयी थी कि वे भारत में रहना चाहते हैं या पाकिस्तान में या स्वतंत्र। इसका विरोध जवाहरलाल नेहरू ने किया एवं इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जिससे यह योजना त्याग दी गयी।

माउंटबेटन योजना

माउंटबेटन ने 3 जून, 1947 ई. को भारत विभाजन की योजना प्रकाशित कर दी। उसी दिन एटली ने इस योजना को इंग्लैंड की संसद में प्रस्तुत किया। इस योजना को डिकी बर्ड योजना के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना की निम्न विशेषताएं थीं-

  • संविधान सभा दव्ारा पारित संविधान भारत के उन भागों में नहीं लागू किया जाएगा जो इसे मानने के लिए तैयार न हों।

  • बंगाल और पंजाब में हिन्दू तथा मुसलमान बहुसंख्यक जिलों के प्रांतीय विधानसभा के सदस्यों की अलग-अलग बैठक बुलाई जाए और उसमें यदि कोई भी पक्ष प्रांत विभाजन चाहेगा तो विभाजन कर दिया जाएगा।

  • उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत में जनमत दव्ारा यह पता लगाया जाए कि वह भारत के किस भाग के साथ रहना चाहेगा।

  • असम के सिलहट जिलें मेेंं भी इसी प्रकार जनमत दव्ारा निर्णय कराया जाएगा।

  • भारतीय नरेशों के प्रति पुरानी नीति रहेगी कि पारामाउंटेसी के अधिकार वापस लौटा दिये जाएंगे।

इस योजना को कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग दोनों ने स्वीकार कर लिया और देश विभाजन की तैयारी आरंभ हो गई। बंगाल, पंजाब में जिलोंं के विभाजन तथा सीमा निर्धारण का कार्य एक कमीशन को सौंपा गया जिसकी अध्यक्षता रेडक्लिफ ने की।

उपरोक्त योजना पर एक विधेयक तैयार किया गया जिसे इंग्लैंड की संसद ने 16 जुलाई, 1947 ई. को पास कर दिया। इसके अनुसार देश को 15 अगस्त, 1947 ई. को दो डोमिनियनों (अधिराज्यों) -भारत और पाकिस्तान में बांट दिया गया। दोनों डोमिनियनों को पूरी स्वतंत्रता तथा प्रभुसत्ता सौंप दी गई।