Important of Modern Indian History (Adunik Bharat) for Hindi Notes Exam

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CHAPTER: Establishment of INC

कांग्रेस की स्थापना का मिथक

  • कांग्रेस की स्थापना दिसंबर 1885 में 72 राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ हुई।
  • एक अवकाश प्राप्त अंग्रेज आई. सी. एस. अधिकारी ए. श्रो. ह्यूम ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं।
  • कांग्रेस की स्थापना के साथ सुरक्षा बाल्व का मिथक जुड़ा हुआ हैं
  • मिथक- तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड डफ़रिन के निर्देश पर ह्यूम ने इस संगठन को जन्म दिया, ताकि उस समय भारतीय जनता में पनपते असंतोष को हिंसा के रूप में फूटने से रोका जा सके।
  • यंग इंडिया में 1916 में लाला लाजपत राय ने अपने लेख में कहा- “कांग्रेस लॉर्ड डफ़रिन के दिमाग की उपज है।”
  • रजनी पात्र दंत ने लिखा- “सरकार की सीधी पहल और मार्गदर्शन के दव्ारा कांग्रेस अस्तित्व में आई।”
  • रजनी पात्र दंत के अनुसार कांग्रेस के दो पक्ष थे- “एक पक्ष तो जनांदोलन के ‘खतरे’ के खिलाफ साम्राज्यवाद के सहयोग का था और दूसरा पक्ष राष्ट्रीय संघर्ष में जनता की अगुवाई का था।”
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक एम. एस. गोलक्लकर (1939) के अनुसार- हिन्दुओं को ‘विराष्ट्रीकरण’ के रास्ते पर ले जाने के लिए ह्यूम , कॉटन और वेडरवर्ग दव्रा 1885 में तय की नीतियां ही जिम्मेदार थीं।
  • उदारवादी सी. एफ. एंडूज और गिरिजा मुखर्जी ने भी 1938 में प्रकाशित भारत में कांग्रेस का उदय और विकास ये सुरक्षा बाल्व की बात पूरी तरह स्वीकार की। उन्हें इस बात का संतोष था कि इससे व्यर्थ के खून-खराबे को टालने में मदद मिली।

ह्यूम और वह गोपनीय रिपोर्ट-

  • सुरक्षा बाल्व की इस परिकल्पना को ऐतिहासिक साक्ष्य बनाया सात खंडो वाली गोपनीय रिपोर्ट ने जिसके बारे में ह्यूम ने कहा 1878 की गर्मियों में शिमला में उसने पढ़ा।
  • बेडरबर्न में ए. ओ. ह्यूम की जीवनी लिखी, जो 1919 में प्रकाश्ति हुई, जिसमें सबसे पहले इस रिपोर्ट की चर्चा की गई थी।
  • जब लॉर्ड लिटन वाइसराय थे, तब ह्यूम धार्मिक गुरूओं के संपर्क में आए।
  • सन्‌ 1881 में ह्यूम मादाय ब्लावात्सकी के प्रभाव में आए। जिसमें ह्यूम को बताया कि अलौकिक शक्ति रखने वाले गुरूओं (महात्मा) से उसका संपर्क है।
  • ये महात्मा गुप्त रूप से तिब्बत में रहते थे और अपनी अलौकिक शक्ति के चलते बुनियां में कहीं भी किसी से भी संपर्क कर सकते थे।
  • ब्लावात्सकी ने महात्मा कूत होमी लाल सिंह से ह्यूम का संपर्क कराया।
  • कूत होमी ने लिखा- महात्माओं ने ही अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर 1857 में भारतीय जनता के विद्रोह को विफल कर दिया। ह्यूम इन सब में विश्वास रखते थेंंं।
  • 1883 में ब्लावात्सको से ह्यूम का झगड़ा हो गया, पर महात्माओं, गुरूओं के प्रति उनकी श्रद्धा बरकरार रही।
  • दिसंबर 1883 में रिपन को तथा 1888 में डफ़रिन को इस बारे में ह्यूम ने बताया।
  • ह्यूम ने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए महात्माओं की मदद लेनी शुरू की।
  • ह्यूम ने डफ़रिन से कहा था कि सात खंडो की रिपोर्ट उसे उन महात्माओं ने दी है।
  • 1882 में सेवानिवृत्त होने के बाद ह्यूम भारतीय जनता से राजनीति में हिस्सा लेने की अपील करने लगे।
  • उन्होंने सुझाव दिया कि राजनीतिक सुधार आंदोलन चलाए जाए सामाजिक सुधार (भारतीयों में दरार पड़ सकती है।) आंदोलन नहीं।
  • 1885 में डफ़रिन ने बंबई के गवर्नर लॉर्ड रे (Rey) को लिखा- ह्यूम की कांग्रेस से सावधान रहिए।
  • 1888 में डफ़रिन ने लॉर्ड रे को लिखा- हम कांग्रेस को साबुत नहीं रहने देंगे।
  • मई, 1888 में रे ने डफ़रिन को सावधान किया कि ह्यूम एक ऐसे संगठन के केन्द्र हो गए है, जो भारत में स्वदेशी भावना जागृत करना चाहता है।
  • ह्यूम प्रशासन का चरित्र बदला और भारतीय जनमत के प्रति ज्यादा उत्तरदायी बनाना चाहते थे।
  • डफ़रिन का मानना था कि वे बंगाली बापू और मराठी ब्राह्यण भारत में आयरलैंड जैसा क्रांतिकारी विद्रोही आंदोलन चलाना चाहते थे।
  • मई-जून 1886 में डफ़रिन ने ह्यूम को धुर्त, पागल, बेईमान कहा क्योंकि वह हिन्दुस्तान में ‘होम रूल’ आंदोलन के मुख्य प्रेरक हो गए।
  • सुरक्षा बाल्व की बात वास्तव में महात्माओं की कारगुज़ारियों पर आधारित है।
  • 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी।
  • 1860 और 1870 के दशक में भारतीयों में पनपते राजनीतिक चेतना की पराकाष्ठा थी।

इस समय की राष्ट्रीय माँगे थी-

  • आयातित सूती वस्त्रों पर आयात शुल्क में कमी न करना।
  • हथियार रखने का अधिकार देना (आर्म्स रेक्ट के विरुद्ध)
  • प्रेम की आजादी (वर्नाकलर प्रेस ऐक्ट के विरुद्ध)
  • सेना पर खर्च में कटौती
  • प्राकृतिक आपदाओं के शिकार लोगों की सहायतार्थ और अधिक राशि आवंटित
  • प्रशासनिक सेवा का भारतीयकरण
  • अर्धसैनिक बलों एवं स्वैच्छिक संगठनों में भारतीयों को शामिल करना
  • भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपीय नागरिकों पर आपराधिक मुकदमें की सुनवाई।
  • अंग्रेज उस दल को वोट दें जो भारतीय हितों का ख्याल रखे।
  • राजनीति में आये युवा वर्ग ने नया संगठन बनाया (पुराने संगठन दकियानुसी हो गए)
  • 1876 में बंगाल के युवा राष्ट्रवादियों ने सुरेन्द्र नाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस के नेतृत्व में ‘इंडियन एसोसिएशन’ का गठन किया।
  • मद्रास के युवा नेताओं-एम. वी. राघव चेरियार, जी. सुबह्यण्यम अय्यर, पी. आनंद चारलू 1884 में ‘मद्रास महाजन सभा’ गठन किया।
  • तिलक, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और अन्य नेता कहते थे कि भारत एक ‘बनता हुआ राष्ट्र’ है।
  • कांग्रेस के नेताओं का मानना था कि भारत (भिन्न्ताएँ है) में बड़ी सावधानी के साथ राष्ट्रीय एकता को पोषित करना होगा।
  • राष्ट्रीय भावना को सभी क्षेत्रों में पहुँचाने के लिए कांग्रेस के अधिवेशन देश के विभिन्न हिस्सों में किए गए और अध्यक्ष उस क्षेत्र का नहीं होता था।
  • 1888 के अधिवेशन में तय हुआ कि हिन्दु या मुस्लिम प्रतिनिधियों के बड़े हिस्से के आपत्ति होने पर प्रस्ताव पारित नहीं होगा।
  • अल्पसंख्यक से संबंधित-1899 के प्रस्ताव में कहा या जहाँ अल्पसंख्यक हों, वहां काउंसिल में उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या, आबादी के अनुपात से कम नहीं होगी।

राष्ट्रीय कार्यक्रम

  • कांग्रेस का दूसरा लक्ष्य था विभिन्न भागों के राजनीतिक कार्यकर्ता को एक मंच देना जहाँ व इकट्‌ठा होकर अखिल भारतीय स्तर पर गतिविधियाँ चला सकें।
  • दूसरे अधिवेशन -दादाभाई नौरोजी-राष्ट्रीय कांग्रेस को अपने आपको सिर्फ उन सवालों तक ही सीमित रखना चाहिए, जो सवाल पूरे राष्ट्र से जुड़े हो और जिन सवालों पर सीधी भागीदारी की गुंजाइश हो।
  • कांग्रेस ने सामाजिक सुधार का सवाल नहीं उठाया।

तलाश नेतृत्व की

  • राष्ट्रीय आंदोलन चलाने के लिए पहली जरूरत थी एक सशक्त राष्ट्रीय राजनीतिक नेतृत्व की।
  • इटली के मार्क्सवादी ग्राशमी ने इसे आंदोलन के मुख्यालय की संज्ञा दी।
  • 1885 में लोगों का समूह (उ. अमेरिका) कांग्रेस से पहले मार्च में जारी परचे में लिखा था- “कांग्रेस की स्थापना का लक्ष्य यह है कि राष्ट्रीय उत्थान में लगे तमाम उत्साही कार्यकर्ता एक-दूसरे को अच्छी तरह जान लें।”
  • संस्थापक जानते थे राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व को जन्म देने की जरूरत है।
  • मुख्य उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र का अंतरराष्ट्रीय व स्वदेशीकरण करना था।
  • दादाभाई नौरोजी- ‘राजा जनता के लिए बने है, जनता राजा के लिए नही’

उपनिवेशवाद -विरोधी राष्ट्रवादी विचारधारा का निर्माण

  • उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष के लिए उपनिवेशवाद को ठीक से समझना जरूरी था।
  • 1870 और 1880 के दशकों में उपनिवेशवाद-विरोधी कोई बनी-बनाई विचारधारा पहले से मौजूद नहीं थी।
  • राष्ट्रवादी नेताओं को पहले इसे खुद समझा और लोगों को समझाना भी था।
  • लोगों को समझाना था हम एक राष्ट्र है और उपनिवेशवाद हमारा दुश्मन।
  • राष्ट्रवादी नेताओं के बुनियादी लक्ष्य एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्ट्रीय आंदोलन की नींव रखनी थी।

ह्यूम की भूमिका

  • भारतीय उपमहादव्ीप के विस्तृत आकार की तुलना में 1880 के दशक में राजनीतिक शोच रखने वाले लोग बहुत कम थे।
  • दादाभाई नौरोजी, न्यायमूर्ति रानाडे, फिरोजशाह मेहता, जी. सुब्रह्यण्यम अय्यर और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी नेता शुरू में ही सरकार के दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते थे।

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