रजवाड़ों की जनता के आंदोलन (People's Agitation in Princely States) Part 4

Download PDF of This Page (Size: 171K)

प्रमुख विचार

हमारा उद्देश्य अंग्रेज शक्ति को सर्वश्रेष्ठ बनाना है, यदि बाह्य रूप से नही ंतो वास्तविक रूप से निश्चय ही। हमें शेष रियासतों को अपने अधीन करना है, यदि नाम मात्र नही ंतो वस्तुत: अवश्य।

-हेस्टिंग्स

जहाँ-जहाँ सहायक संधि प्रणाली लागू की गई है वहां शीघ्र इसका परिणाम उजड़े हुए गाँव और घटी हुई जनसंख्या के रूप में देखने को मिलेगा।

-मुनरो

जिस दिन से वे कंपनी दव्ारा रक्षित हो गए अथवा उसके सहायक बन गए उसी दिन से उनका अस्तित्व समाप्त हो गया।

-कार्ल मार्क्स

यदि हम बहुत सी स्थानीय रियासतों को राजनीतिक शक्ति रहित स्थिति में राजकीय साधनों के रूप में रख सकें तो हम भारत में उस समय तक बने रह सकते हैं जब तक कि हमारी नौ शक्ति की सर्वश्रेष्ठता बनी रहेगी।

-सर जान मेल्कम

स्थानीय रियासतों के शासक अपने अंग्रेजी मित्रों के प्रति पूर्णतया राजभक्त हैं। ये अधीनस्थ राज्य समस्त भारत के लिए एक रक्षात्मक दीवार के समान हैं।

-रशब्रुक विलियम्स

जिस स्थिति में इन देशी रियासतों की सतही स्वतंत्रता बरकरार रहने दी गई, वह शाश्वत हृास की स्थिति है और ऐसी स्थिति में प्रगति कदापि संभव नहीं। अपेक्षाकृत अधिक प्रभुताशील सत्ता की मौन सहमति पर जीने वाली प्रत्येक व्यवस्था की तरह यहां भी जैविक दुर्बलता जीवन का अटूट नियम हैं।

-मार्क्स

राजाओं को अपनी प्रजा के अच्छे ’न्यासी’ होने के लिए मनाया जा सकता है।

-गांधी

कांग्रेस रजवाड़ों की दुश्मन नहीं है, बल्कि वह तो चाहती है कि रजवाड़ें और उनकी प्रजा उसके अंतर्गत समृद्धि, संतोष और सुख पाएं।

-पटेल