व्यक्तित्व एवं विचार (Personality and Thought) Part 30 for Competitive Exams

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भारतीय राज्यों में प्रजातंत्रीय व्यवस्था

भारतीय संघ में सम्मिलित हो जाने के पश्चात सरदार पटेल इन राज्यों में प्रजातंत्रीय प्रणाली स्थापना को प्रोत्साहन देना चाहते थे। उन्होंने नरेशों को परामर्श दिया कि अंग्रेजी नियंत्रण को केवल जन आंदोलन के माध्यम से ही समाप्त किया गया था। इसलिए राजसत्ता का प्रयोग जनता दव्ारा ही होना चाहिए। नरेशों के निरंकुश अधिकारों को अंग्रेजों दव्ारा समर्थन मिलता था इसलिए वे बचे रहते थे। भारत सरकार ने नरेशों की निरंकुशता का समर्थन करने से इंकार कर दिया। साथ ही यह चेतावनी भी दी कि वह देश में अशांति तथा अव्यवस्था फैलने भी नहीं देगी। इस प्रकार राज्यों के नरेशों को उनकी विवशता स्पष्ट दिखाई दी। दूसरी ओर सरदार पटेल ने नरेशों की सहमति प्राप्त करने के लिए उनकी व्यक्तिगत संपत्ति तथा अधिकारों को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया। सभी नरेशों ने सरकार की बात स्वीकार की और इस एक रक्तहीन क्रांति को सफल बनाने में योगदान दिया।

प्रजातंत्रीय प्रशासन की स्थापना की संभावना से एक अन्य परिवर्तन भी आवश्यक हुआ। प्रत्येक राज्य इस योग्य नहीं था कि वह जनकल्याण के लिए साधन उपलब्ध करा सके। इसलिए छोटे राज्यों के अस्तित्व का औचित्य नहीं था। सरदार पटेल ने दो प्रकार की पद्धतियों को प्रोत्साहन दिया-ब्राह्य विलय तथा आंतरिक संगठन। ब्राह्य विलय में छोटे-छोटे राज्यों को मिलाकर अथवा पड़ोसी प्रांतों में विलय करके एक बड़ा राज्य बनाना। आंतरिक संगठन के आधार पर इन राज्यों में प्रजातंत्र प्रणाली की स्थापना जिससे सामान्य जनता का सहयोग दैनिक प्रशासन में उपलब्ध हो सके। दिसंबर, 1947 ई. में उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के 39 राज्यों का उड़ीसा तथा मध्य प्रांत में विलय हुआ। बंबई प्रदेश के साथ 17 दक्षिणी राज्यों का फरवरी, 1948 ई. में और गुजरात और काठियावाड़ राज्यों का जून, 1948 ई. में विलय हुआ। पूर्वी पंजाब, पटियाला तथा पहाड़ी राज्यों का एक संघ बनाया गया जिसे ’पेप्सू’ कहा गया। इसी आधार पर मत्स्य, विध्य प्रदेश, राजस्थान का निर्माण किया गया। राजस्थान संघ बनाने में सबसे पहले दक्षिणी पूर्वी राज्यों ने बांसवाड़ा, बूंदी, डुंगरपुर, झालावाड़, किशनगढ़, कोट, प्रतापगढ़, शाहपुरा और टोंग-भाग लिया। इसकी स्थापना 25 मार्च, 1948 ई. को हुई। उदयपुर भी इस संघ में अप्रैल, 1948 ई. में सम्मिलित हुआ। राजस्थान के चार विशाल क्षेत्रफल वाले राज्यों-जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर-ने भी इस संघ में सम्मिलित होना स्वीकार किया। 30 मार्च, 1949 ई. को सरदार पटेल ने राजस्थान संघ का उदवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू घाटन किया। 15 मई, 1949 ई. को मत्स्य संघ भी राजस्थान संघ में सम्मिलित हो गया।

भारतीय राज्यों का शांतिपूर्वक भारतीय संघ अथवा प्रांतों के साथ विलय सरदार पटेल की अभूतपूर्व सफलता थी। केवल हैदराबाद में शांति स्थापना के लिए सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा और वह भी इसलिए कि निजाम ने अपनी सेना के बल पर राज्य में अत्याचार आरंभ कर दिये थे। भारत विभाजन से जितने क्षेत्र तथा जनसंख्या की हानि हुई भारतीय राज्यों के विलय से वह क्षति पूरी हुई।

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