व्यक्तित्व एवं विचार (Personality and Thought) Part 7

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जवाहर लाल नेहरू

भारतीय जनता की कई पीढ़ियों की चेतना को ढालने में, महात्मा गांधी के बाद, सर्वाधिक प्रमुख योगदान जवाहर लाल नेहरू का ही रहा है। शोषण से मुक्त एक नए भारत के निर्माण के लिए और साम्राज्यवाद के उत्पीड़न से मुक्त एक नए विश्व के सृजन के लिए उन्होंने भारत के लोगों की आकांक्षाओं को वाणी दी। स्वाधीन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में, आधुनिक भारत के स्वतंत्र विकास की दिशा भी उन्होंने ही निर्धारित की।

नेहरू के चिंतन का प्रभाव

उदारवाद की पाश्चात्य अवधारणा से नेहरू सबसे अधिक प्रभावित थे। उन्होंने उदारवाद से अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता, व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं गरिमा, स्वतंत्र निर्वाचन और संसदीय सरकार की अवधारण को आत्मसात किया। गांधी के व्यक्तित्व ने भी नेहरू को प्रभावित किया तथा उन्होंने सदैव गांधी के प्रिय अनुयायी के रूप में राष्ट्रीय आंदोलन के समय कार्य किया।

यद्यपि राजनीतिक मुद्दों तथा भारतीय समाज के पुननिर्माण के संबंध में दोनों के विचारों में मतभेद था। प्रगतिशील तथा साम्यवादी विचारों के उदभव के युगपुरुष कार्ल मार्क्स तथा लेनिन के अध्ययन ने भी उन्हें काफी प्रभावित किया, परन्तु वे सोवियत संघ दव्ारा अपनाये गए अत्यधिक सैनिकीकरण से असहमत थे।

नेहरू और समाजवाद

नेहरू ’लोकतांत्रिक समाजवाद’ की परिकल्पना से प्रभावित थे जिसमें समता की स्थापना के लिए उन्होंने रूसी क्रांति के स्थान पर विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना था कि व्यक्ति की गरिमा या समानता को सुनिश्चित करने हेतु पूंजीवादी पद्धति पर आधारित समाज को समाप्त करना होगा। वे कहते हैं कि, ”बढ़ती हुई संपत्ति तथा उत्पादन से उपेक्षित किए गए समाजवाद का अर्थ होगा- गरीबी को समान रूप में बांटना अर्थात गरीबी फैलाना।” उनका मानना था कि संपत्ति का उत्पादन करना चाहिए और बाद में उसे समाज में समान रूप से विभाजित कर देना चाहिए, जिससे समाज के समतावादी ढांचे का प्रारूप तैयार किया जा सके। उनका कहना था कि सभी लोगों को एक समान नहीं बनाया जा सकता परन्तु सभी को कम से कम समान अवसर तो दिया जा सकता है।

नेहरू वैयक्तिक स्वंतत्रता को अवरोधित किए बिना समाज के लक्ष्य को प्राप्त करने के पक्षधर थे। जिसके लिए उन्होंने नियोजन का मार्ग अपनाया। उनके दव्ारा सामुदायिक विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय विस्तार सेवाओं का शुभारंभ करके ग्रामीण क्षेत्र में समाजवादी समाज के विस्तार का बीड़ा उठाया गया जिससे सहकारिता के सिद्धांत पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास हो सके। नेहरू ने एक वर्गहीन समाज की कल्पना की थी। अपनी कल्पना को साकार करने हेतु उन्होंने तीव्र औद्योगीकरण, रोजगार के अवसरों का सृजन, आर्थिक सत्ता का विकेन्द्रीकरण, धन एवं आय की विषमताओं में कमी आदि उद्देश्यों का समावेश दव्तीय पंचवर्षीय योजना में किया। इस प्रकार नेहरू ने एक ऐसे व्यावहारिक प्रयोगवादी समाजवाद की संकल्पना प्रस्तुत किया जो भारत को समयानुकुल परिस्थितियों में उसकी जरूरतों को पूर्ण कर सके।