भारत के राजनीतिक दल (Political parties of India) Part 2

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

अखिल भारतीय दल के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में मुंबई में हुई। यह आरंभिक राष्ट्रवादियों का एक राजनीतिक मंच था, जिसकी स्थापना के पीछे कई ब्रिटिश अधिकारियों एवं बुद्धिजीवियों का भी हाथ था। ए. ओ. हयूम इसके पहले अध्यक्ष थे। कांग्रेस अपने आरंभिक चरण में ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग करती थी एवं संवैधानिक सीमाओं में रहकर कुछ सुधारों एवं छूटों की मांग करती थी। पर 1905 के बाद यह विधान सभाओं एवं स्थानीय निकायों में भरतीयों की अधिक भागीदारी के लिए लॉबी (सभाकक्ष) का एक मंच बन गया। इसके साथ ही इसने एक उत्साही राष्ट्रवादी चरित्र अर्जित कर लिया। विधिवादी सुधारकों और उग्रवादी क्रांतिकारियों के बीच नेतृत्व के झगड़ों से गुजरते हुए कांग्रेस तेजी से राष्ट्रीय आकांक्षा और संघर्ष के एक केन्द्र के रूप में उभर रही थी। 1915 में गांधी जी का स्वदेश आगमन हुआ। 1920 से वे भारत के राजनीतिक भू-मंडल पर तेजी से छा गए। समस्त भारत में राजनीतिक चेतना की लहर दौड़ गई। कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन विरोधी जनता की लहर का नेतृत्व किया। इस प्रक्रिया में कांग्रेस किसान, मजदूर एवं बुद्धिजीवियों के आंदोलन के रूप में स्वतंत्रता के लिए बहुवर्गीय जन आंदोलन बन गया। ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध राष्ट्रीय संघर्ष में अग्रणी ताकत के रूप में कांग्रेस अखिल भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन बन गया। इसमें सुधारवादी, उदारवादी, क्रांतिकारी के अलावा अनेक प्रभावी समूह वर्ग, प्रादेशिक और वैचारिक समूह शामिल थे। 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ कांग्रेस ने स्वयं ही अपने को एक संघीय राजनीतिक शक्ति के ढांचे में गठित कर लिया।

कांग्रेस अपनी क्षमता के कारण व्यापक निर्वाचन समर्थन को आकर्षित करके केन्द्रीय सरकार के संघीय स्तर पर लोकसभा में सिवाय 1977, 1989 और 1999 को छोड़कर या तो बड़े दल के रूप में या फिर सरकार बनाती रही है। इसके फलस्वरूप वह भारतीय संसदीय प्रणाली की बहुदलीय स्थिति में एक प्रभावी दल के रूप में उभरा। क्षेत्रीय विस्तार की दृष्टि से इसे एकल अखिल भारतीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

कांग्रेस के सदस्य विभिन्न व्यवसाय एवं वर्ग समूहों के हैं। इसमें सभी आयु, वर्ग, धर्म, समुदाय और सामाजिक स्तर के सदस्य शामिल हैं। चीन की साम्यवादी दल के बाद संभवत: विश्व में सर्वाधिक सदस्यता संख्या इसी की है। इसकी स्थापना से लेकर आज तक की गतिविधियों को देखें तो ग्रेट ब्रिटेन के कंजरवेटिव (अपरिवर्तनवादी) एवं लेबर (मजदूर) पार्टी (दल) या संयुक्त राज्य अमरीका के डेमोक्रेट (लोकतांत्रिक) पार्टी (दल) के बाद विश्व का सबसे पुराना राजनीतिक दल है।