भारत के राजनीतिक दल (Political parties of India) Part 5

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कम्युनिस्ट (साम्यवादी) पार्टी (दल)

भारत में कांग्रेस के बाद सबसे पुराना दल कम्युनिस्ट पार्टी है। सितंबर 1924 में इसका गठन कानपुर में हुआ। दिसंबर 1925 में बंबई में औपचारिक तौर पर इसका मुख्यालय बनाया गया और यह एक दल की भांति राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हो गई। अपनी स्थापना के आरंभिक वर्षों में इसकी गतिविधियां बंबई, मद्रास, कानपुर और अहमदाबाद जैसे नगरीय औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक संघ के मोर्चे तक सीमित थी। 1930 एवं 40 के दशक में इसकी गतिविधियां श्रमिक संगठनों से बढ़कर किसान संगठनों एवं नगरीय बुद्धिजीवियों तक पहुंच गई।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नई चेतना और क्रांतिकारी नारों से ब्रिटिश सरकार को खतरे की घंटी सुनाई पड़ी और उसने कम्युनिस्ट पार्टी के अग्रणी राष्ट्रवादी नेताओं की सरकार के विरुद्ध षड़यंत्र करने मामले में कैद कर लिया। कम्युनिस्ट नेताओं ने अब कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई। कई कम्युनिस्ट नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होकर अपनी गतिविधियां जारी रखीं। नेहरू और सुभाष चन्द्र बोस जैसे समाजवादी रूझानवाले कांग्रेसी नेताओं के कारण यह गठबंधन अधिक सफल रहा। यह कांग्रेस के भीतर ही कांग्रेस समाजवादी पार्टी के गठन का मुख्य आधार बना। पर अलग विचारधारा एवं रणनीति के कारण कांग्रेस एवं कम्युनिस्टों में अक्सर मतभेद उभर आता था। अत: लंबे समय तक साथ रहकर वे कार्य नहीं कर सके। 1942 के कांग्रेस के भारत छोड़ो प्रस्ताव का कम्युनिस्टों ने विरोध किया। वे इसे फासीवाद के खिलाफ संघर्ष मानते थे। 1947 जब देश को आजादी मिली तो उन्होंने इसे सच्ची आजादी के रूप में स्वीकार नहीं किया। 1948 के कलकत्ता अधिवेशन में कम्युनिस्टों ने सच्ची राष्ट्रवादी आजादी प्राप्त करने के लिए सशस्त्र संघर्ष सहित सामंतवाद, पूंजीवाद और साम्राज्यवाद पर आक्रमण की नीति का समर्थन किया। पर पार्टी ने समाजवाद की स्थापना के लिए संसदीय प्रणाली को स्वीकार किया और 1952 के संसदीय चुनाव में हिस्सा भी लिया। पूरे नेहरू युग में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ही मुख्य विपक्षी दल थी। 1957 के चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की केरल विधान सभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ और देश में पहली कम्युनिस्ट सरकार बनी।

चीन-सोवियत मतभेद और संघर्ष से विश्व के प्राय: सभी भागों में साम्यवादी आंदोलन विभाजित हो गया। इसी के परिणामस्वरूप 1964 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में फूट पड़ गई और 1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग होकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

(मार्क्सवादी) का गठन हुआ। यही दल आज भारत की मुख्य कम्युनिस्ट पार्टी है।