भारत के राजनीतिक दल (Political parties of India) Part 6 for Competitive Exams

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फारवर्ड (आगे) ब्लॉक (खंड)

फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना 1939 में सुभाषचन्द्र बोस ने की। दरअसल कांग्रेस की राजनीति से सामंजस्य न बिठा पाने एवं गांधी के साथ उभरे मतभेद के कारण एक अलग दल की स्थापना अपरिहार्य सी हो गई थी। कांग्रेस के भीतर जिस समाजवादी विचारधारा का प्रभाव बढ़ रहा था, उसके वाहक सुभाषचन्द्र बोस और नेहरू थे। फारवर्ड ब्लॉक पर इसका प्रभाव स्पष्ट परिलक्षित होता है।

सुभाचन्द्र बोस ने कांग्रेस के उद्देश्य, नीति, कार्यक्रम सभी को स्वीकार कर लिया। पर उन्हें कांग्रेस के हाई (उच्च) कमान (शक्ति) पर विश्वास नहीं था। वे नीचे से फैसले लेने के समर्थक थे। उन्होंने साम्राज्य विरोधी, आतंकवादी तथा प्रगतिशील तत्वों को एक झंडे तले एकत्रित करने का प्रयत्न किया एवं एक वामपंथी एकीकरण समिति भी गठित की।

बोस कांग्रेस की अंग्रेजों से सहयोग की नीति के विरोधी थे। वे अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के लिए हिंसक संघर्ष एवं अन्य देशों से सहयोग के भी समर्थक थे। 1947 में शक्ति के हस्तांतरण को उन्होंने झूठे शक्ति हस्तांतरण की संज्ञा दी। उनका कहना था कि भयभीत बुर्जुआ ने अंग्रेजी साम्राज्यवादियों के साथ साझेदारी स्थापित कर ली है ताकि जनता के संघर्ष को समाप्त किया जा सके।

बहिष्कृत हितकारिणी सभा

बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना 1924 में डॉ. भीमराव अंबेडकर ने की। इसका उद्देश्य अस्पृश्य लोगों की नैतिक एवं भौतिक उन्नति करना था। उन्होंने आंदोलन की नीति अपनाई एवं अछूतों के लिए मंदिर में प्रवेश तथा जन साधारण के कुंओं से पानी भरने के नागरिक अधिकारों को प्राप्त करने का प्रयत्न किया। महाराष्ट के ग्रामीण इलाके में इसका प्रभाव अधिक था।

जस्टिस (न्याय) पार्टी (दल)

जस्टिस पार्टी मुख्यत: एक राजनीतिक दल नहीं था। यह एक गैर-ब्राह्यण संगठन था। इसकी स्थापना 1917 में पी. त्याग राज एवं टी. एम. नैयर ने की थी। 1937 में रामास्वामी नायकर इसके सभापति चुने गए। नायकर ने अस्पृश्यता जैसे अन्याय के खिलाफ आंदोलन चलाया। उन्होंने हिन्दू धर्म की भर्त्सना की एवं मनु के विधान को अमानुषी बताया। नायकर धर्म को एक अंधविश्वास मानते थे। मूर्ति पूजा में भी उनकी आस्था नहीं थी। वे मानव के लिए एक ही ईश्वर की बात करते थे। जस्टिस पार्टी ने नायकर के इन्हीं विचारों का दक्षिण भारत में प्रचार किया।

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