राष्ट्रवाद का उदय (Rise of Nationalism) for Competitive Exams Part 1

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भूमिका

राष्ट्रवाद एक आधुनिक संकल्पना है, जिसका विकास पुनर्जागरण के बाद यूरोप में राष्ट्रीय राज्यों के रूप में हुआ। यद्यपि राष्ट्र के प्रति लगाव या सम्मान की भावना प्राचीन काल से ही सभी राष्ट्र एवं उसके नागरिकों में पायी जाती है पर इसे सीमित राष्ट्रीयता का द्योतक ही माना जा सकता है। भारत में भी इस तरह की सीमित राष्ट्रीयता के प्रमाण मिलते हैं। अब वर्तमान समय में यह राष्ट्रवाद धीरे-धीरे सशक्त होता दिखाई दे रहा है।

भारतीय राष्ट्रवाद के बारे में एक रोचक बात यह है कि इसका उद्भव अंग्रेजी शासन के दिनों में हुआ। अंग्रेजी शासकों ने अपने स्वयं के हित में भारतीय समाज के आर्थिक ढांचे की स्थापना की, आधुनिक शिक्षा पद्धति की नींव डाली, आवागमन के नए साधन एवं ऐसी नई संस्थाओं का निर्माण किया, जिसके फलस्वरूव नए सामाजिक वर्गो का उदय हुआ। इन सबके कारण नवीन सामाजिक शक्तियां उभर कर सामने आई और राष्ट्रवाद का वाहक बनीं। इस तरह भारतीय राष्ट्रवाद एक जटिल और विशिष्ट सामाजिक पृष्ठभूमि में जन्मा और उसका विकास हुआ।