राष्ट्रवाद का उदय (Rise of Nationalism) for Competitive Exams Part 3 for Competitive Exams

Get top class preparation for IAS right from your home: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 116K)

आर्थिक कारण

विश्व की अधिकतर क्रांतियों के पीछे आर्थिक अभाव तथा शोषण रहा है। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर भी इसका बहुत प्रभाव पड़ा। अंग्रेजों के आने से पूर्व भारत औद्योगिक एवं कृषि क्षेत्र में बहुत हद तक आत्मनिर्भर था साथ ही भारतीयों की आर्थिक दशा काफी संतोषजनक थी। अंग्रेज हिन्दुस्तान में व्यापार करने आए थे और वे शासक बन बैठे। आर्थिक क्षेत्र में उन्होंने भारत का इतना अधिक शोषण किया कि भारत गरीब देश बन गया। अंग्रेजो ने-

  • कुटीर उद्योग-धंधों को समाप्त कर दिया।

  • भारत से कच्चा माल इंग्लैंड भेजना प्रारंभ कर दिया।

  • इंग्लैंड में मशीनों (यंत्रों) से बने सामान भारत आने लगे जिससे भारत में बने सामान एवं व्यापारी वर्ग प्रभावित हुए।

  • खाद्य फसलों की जगह नकदी फसलों को उपजाने के लिए किसानों को बाध्य किया गया, जिससे खाद्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई।

  • उद्योग-धंधों में लगे भारतीय बड़ी संख्या में बेरोजगार हो गए। देश में गरीबी और भूखमरी बढ़ने लगी।

  • सेवानिवृत अधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों के पेंशन (पूर्व सेवार्थ वृत्ति) व वेतन का भार भारतीय खजाने पर पड़ता था।

  • इन ब्रिटिश आर्थिक नीति के कारण भारतीयों के मन में अंग्रेजों के प्रति घृणा उत्पन्न हुई। भारतीयों को विश्वास हो गया कि भारत की बिगड़ी हुई आर्थिक दशा का कारण अंग्रेज हैं।

Developed by: