महत्वपूर्ण राजनीतिक दर्शन Part-5: Important Political Philosophies for Competitive Exams

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Marxism and Socialism
Marxism and Socialism

मार्क्सवाद और समाजवाद में तुलना

मार्क्सवाद

समाजवाद

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ आर्थिक पक्ष

मार्क्सवाद के अनुसार, आर्थिक पक्ष अर्थात्‌ उत्पादन प्रणाली से ही शेष सभी व्यवस्थाएं निर्धारित होती हैं। शेष व्यवस्थाओं का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है।

समाजवाद के अनुसार, आर्थिक पक्ष का सर्वाधिक प्रभाव होता है; किन्तु शेष व्यवस्थाओं का पूर्ण निर्धारण उसी से नहीं होता। शेष व्यवस्थाएं कुछ हद तक अर्थव्यवस्था से स्वायत्त हो सकती हैं।

राज्य

(क) अनिवार्यत: शोषण का उपकरण है।

(ख) साम्यवाद में समाप्त हो जाएगा।

(ग) समाजवाद में ’सर्वहारा की तानाशाही’ के रूप में राज्य होगा।

(क) कल्याणकरी भी हो सकता है।

(ख) राज्य का अस्तित्व रहना चाहिये।

(ग) तानाशाही अस्वीकार्य है, चाहे वह सर्वहारा की हो।

क्रांति

अनिवार्य है; क्रांति का स्वरूप अनिवार्यत: हिंसात्मक होगा।

न अनिवार्य है, न ही अधिक संभावना है।

वर्ग की धारणा

(क) हर समाज में हर काल में दो विरोधी वर्ग होते हैं,

(ख) मध्य वर्ग संक्रमणशील और अस्थायी है।

(ग) वर्गों के परस्पर विरोधी हित होते हैं, अत: संघर्ष ही किया जा सकता।

(क) दो से अधिक वर्ग हो सकते हें।

(ख) मध्य वर्ग सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

(ग) वर्ग सहयोग की भावना से इंकार नहीं एकमात्र संबंध है।

धर्म

(क) मिथ्या चेतना है; अफीम के समान है।

(ख) समाजवाद में धर्म प्रतिबंधित रहेगा और साम्यवाद में लुप्त हो जाएगा।

(ग) राजनीति से धर्म पूर्णत: अलग होना चाहिए

(क) धर्म अंवाछित है किन्तु इसका दमन नहीं होना चाहिए।

(ख) व्यक्तिगत जीवन में इसकी अनुमति होनी चाहिए।

6 राष्ट्र

(क) राष्ट्रवाद एक मिथ्या चेतना है जो वास्तविक समस्या से ध्यान भटकाती है।

(ख) मार्क्सवादी का विश्वास वैश्विक व्यवस्था में राष्ट्रवाद में नहीं

(ग) आगे चलकर लेनिन, स्टालिन और माओ ने राष्ट्रवाद को अपनी स्थितियों के अनुसार स्वीकार किया।

राष्ट्रवाद और समाजवाद में कोई अनिवार्य अंतर्विरोध नहीं है। दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चल सकती है।

7 संपत्ति

निजी संपत्ति का पूर्ण निषेध; सारी संपत्ति सार्वजनिक अर्थात पूरे समाज की होनी चाहिए। व्यक्ति का पूर्ण अधिकार नहीं हैं।

(क) उत्पादन के वृहद् साधन सार्वजनिक होंगे लेकिन उत्पादन की लघु तथा गैर-सामरिक इकाइयाँ व्यक्तिगत हो सकती हैं।

(ख) सीमित मात्रा में निजी संपत्ति को स्वीकृति। अर्जित संपत्ति को स्वीकार करते हैं पर माता-पिता से प्राप्त संपत्ति के लिए उच्च कराधान की बात करते हैं।

8. लोकतंत्र

(क) उदारवादी लोकतंत्र का खंडन क्योंकि उदारवादी लोकतंत्र धनतंत्र है।

(ख) ’सर्वहारा की तानाशाही’ को ही असली लोकतंत्र कहते हैं क्योंकि इसी में आम जनता सचमुच शासन करती है।

(क) उदार लोकतंत्र को वितरणमूलक न्याय के साधन के रूप में स्वीकारता है।

(ख) तानाशाही को स्वीकार नहीं करता।

9. स्वतंत्रता

(क) सर्वहारा की तानाशाही के संक्रमण काल में वैयक्तिक स्वतंत्रता का पूर्ण निषेध।

(क) किसी भी प्रकार की तानाशाही और स्वतंत्रता के दमन को स्वीकृति नहीं।

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