महत्वपूर्ण राजनीतिक दर्शन Part-7: Important Political Philosophies for Competitive Exams

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स्वप्नदर्शी समाजवाद

मार्क्स ने अपने से पहले के समाजवादी विचारों को स्वप्नदर्शी समाजवाद की संज्ञा दी है। इसका कारण यह है कि ये विचारक समाज में फैली हुई गरीबी और विषमता को दूर तो करना चाहते थे किन्तु इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उनके पास कोई व्यावहारिक रणनीति नहीं थी। वे आमतौर पर अमीर वर्ग के लोगों से निवेदन करते थे कि गरीब किसानों और मजदूरों की दशा पर स्वप्नदर्शी समाजवाद में जीन विचारकों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है-सेंट साइमन, चार्ल्स फ्यूरिए और रॉबर्ट ओवन।

सेंट साइमन

सेंट साइमन के समाजवादी विचार बहुत स्पष्ट और निश्चित नहीं हैं, पर इतना जऱूर है कि उसे पूंजीवाद से ज्यादा समस्या सामंतवाद से थी। उसका मानना था कि एक अच्छी व्यवस्था वह होगी जिसमें बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण होगा; सबको क्षमता के अनुसार काम तथा योग्यता के अनुसार वेतन मिलेगा; राज्य का कार्य लोक-कल्याण करना होगा, न कि दूसरे देशों से युद्ध करना या उच्च वर्ग के हितों की रक्षा करना। वह यह भी चाहता था कि उत्पादन तथा वितरण के साधनों पर व्यक्तिगत स्वामित्व की जगह सार्वजनिक स्वामित्व की व्यवस्था लागू हो।

चार्ल्स फ्यूरिए

चार्ल्स फ्यूरिए का मानना था कि जिस तरह प्राकृतिक व्यवस्था गुरुत्वाकर्षण जैसे निश्चित नियमों के अनुसार कार्य करती है वैसे ही सामाजिक व्यवस्था को भी निश्चित नियमों के अनुसार पुनर्गठित किया जाना चाहिए इस संबंध में उसने सुझाव दिया कि समाज को छोटे-छोटे समुदायों में संगठित किया जाना चाहिए जो सामान्य स्वामित्व के सिद्धांत के अनुसार कार्य करेंगे। निजी संपत्ति का निषेध तो नहीं होगा, पर अमीर-गरीब का अंतर अपने आप महत्वहीन हो जाएगा। ऐसी व्यवस्था में राज्य की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि समाज स्वयं ही सारी आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेगा। प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा तथा रोजगार की गारंटी (विश्वास) होगी तथा सभी को अपनी यापेेयता और श्रम के अनुसार उपलब्धियां हासिल होंगी। फ्यूरिए का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत ’आकर्षक श्रम का सिद्धांत’ है जिसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को वही कार्य सोंपा जाएगा जो उसे पसंद हो। इसके अलावा फ्यूरए ने विवाह और परिवार के ढांचे में विद्यमान विसंगतियों पर भी चोट की। कई मामलों में फ्यूरिए के विचार मार्क्सवाद को प्रभावित करते हुए दिखाई पड़ते हैं, जैसे राज्य के अनावश्यक होने का विचार, प्रत्येक व्यक्ति को रुचि के अनुसार कार्य देने का विचार तथा विवाह और परिवार के ढांचों में निहित विषमताओं पर चोट।

रॉबर्ट ओवन

रॉबर्ट ओवन मार्क्सवाद-पूर्व समाजवाद के सबसे महत्वपूर्ण चिंतक माने जाते हैं। इन्होंने सिर्फ चिंतन करने की बजाय कुछ प्रयोगों के माध्यम से अपने समाजवादी विचारों की व्यावहारिकता को सिद्ध करने का प्रयास भी किया। उसने प्रतिस्पर्द्धा पर आधारित व्यापार प्रणाली की आलोचना की और सहयोग पर आधारित व्यापार प्रणाली को स्थापित करने का सुझाव दिया। उसने ’मॉडल (नमूना) कॉटन (कपास) मिल्स (कारखाना)’ नामक सहकारी उद्यम को स्थापित करके सिद्ध किया कि आपसी सहयोग तथा मजदूरों के अनुकूल नीतियों के माध्यम से भी बाजार में टिका जा सकता है। इस प्रयोग के आधार पर ओवन ने दावा किया कि यदि सहकारिता पर आधारित गांवों की स्थापना की जाए जिनमें सभी व्यक्ति गांव की आय में हिस्सेदार हो तो ऐसी व्यवस्था से अमीरी और गरीबी का अंतर काफी हद तक दूर हो जाएगा। ओवन के अन्य विचारों में धर्म का विरोध, निजी संपत्ति का निषेध तथा विवाह व्यवस्था का विरोध शामिल हैं। वह उत्पादन के प्रमुख साधनों पर समाज के स्वामित्व का समर्थक है। उसका मानना है कि अगर वस्तुओं का उत्पादन और वितरण सभी मनुष्यों की जरूरतों के अनुसार हो तो समाज की अधिकांश समस्याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा। गौरतलब है कि मार्क्सवाद पर ओवन के विचारों का प्रभाव भी खोजा जा सकता है। उदाहरण के लिए धर्म, विवाह तथा निजी संपत्ति का विरोध ओवन की तरह मार्क्सवाद में भी दिखाई पड़ता है। इसी प्रकार मनुष्यों की जरूरतों के अनुसार उत्पादन और वितरण का सिद्धांत दोनों विचारों में समान रूप से विद्यमान है।

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