भाग-1 भारतीय संविधान की उद्देशिका (Part-1: Preamble of Indian Constitution)

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उनकी हार मेरी हार है-गांँधी जी ने कहा

भारतीय संविधान की उद्देशिका (Preamble of Indian Constitution)

”हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी,

पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को:

समाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,

1 विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,

प्रतिष्ठा और अवसर की समता

प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में

व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की

एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए

दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख

26 नवंबर 1949 ई. (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्ती सम्वत्‌

दो हजार दृढ़ निकासी) को एतद दव्ारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते है।”

42 वें संविधान संसोधन के दव्ारा, पहले पैरा में दो शब्द समाजवादी और पंथनिरपेक्ष व छठे पैरा में अखंडता शब्द अंत स्थापित किया गया।

  • संप्रुभत्व

  • समाजवादी

  • पंथनिरेपक्ष

  • लोकतंत्रात्मक

  • गणतंत्र

प्रमुख बाते:- Main themes

  • संविधान की प्रस्तावना को ”संविधान की कुंजी” कहा जाता है।

  • प्रस्तावना को न्यायालय में प्रवर्तित नहीं किया जा सकता।

  • प्रस्तावना के अनुसार संविधान के अधीन समस्त शक्तियों का केन्द्रबिन्दु अथवा स्रोत ’भारत के लोंग’ ही हैं।

उद्देशिका से संबंधित-

पंथ निरपेक्ष-

  • निजी धर्म नहीं होता

  • सभी धर्मो को समान महत्व भेदभाव नहीं।

  • वह धार्मिक मामलों में तटस्थ रहता है।

लोकतंत्र :- ”जनता का जनता के दव्ारा, जनता के लिए”

422 ई.पू.-बलिआम ने कहा था

आधुनिक युग में कहा-अब्राहम लिंकन ने गेट्‌सबर्ग में 1863 ई. में

प्रश्न- क्या उद्देशिका संविधान का भाग है? क्या इसमें संसोधन किया जा सकता है?

उत्तर:- हा है, इसमें संसोधन किया जा सकता है (1973 केशवानन्द भारती वीएम केरल राज्य)

उद्देशिका में संसोधन 1976 में 42 वें संविधान संसोधन के दव्ारा ”समाजवादी पंथनिरपेक्ष, और अखंडता शब्द जोड़े गये हैं।

  • उद्देशिका को भाग-19 प्रकीर्ण (विविध) में रखा गया है।

  • उद्देशिका में संसोधन किया जा सकता है किन्तु इसके मूलभूत ढांचों में संसोधन नहीं किया जा सकता है।

  • सबसे कठोर संविधान अमेरिका का है।

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