Public Administration: Affirmative Action for SC, st, OBC: Reservation in Services

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केन्द्र और राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए सकारात्मक कदम (Affirmative Action for SC, st, OBC)

सरकारी सेवाओं में आरक्षण (Reservation in Services)

  • सरकारी नियंत्रण के अंतर्गत आने वाली सेवाओं (नौकरियों) में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गो को आरक्षण प्रदान किया गया है। विकलांग एवं भूत-पूर्व सैनिकों को भी कुछ श्रेणियों में आरक्षण प्रदान किया जाता है। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर खुली प्रतियोगिता के आधार पर भर्ती में क्रमश: 15 % , 7.5 % एवं 27 % आरक्षण दिया जाता है अन्यथा अनुसूचित जातियों के लिए 16.66 % अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5 % एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 15 % आरक्षण का प्रावधान है। अन्य पिछड़े वर्गों को प्रोन्नति में कोई आरक्षण प्रदान नहीं किया गया है। विकलांग व्यक्तियों केे लिए रिक्त स्थानों का 3 % आरक्षित रखा गया है। भूत पूर्व सैनिकों के लिए सभी अर्द्धसेेनिक बलों के सहायक कमांडडेण्ट स्तर तक समूह-सी के पदों में 10 प्रतिशत तथा समूह-डी के पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण है।
  • संविधान के अनुच्छेद 341 एवं 342 परिभाषित करते हैं कि किसी भी राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश के संदर्भ में कौन अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति होंगे। सरकार ने अन्य पिछड़े वर्गों की एक सूची तैयार की है। सेवाओं (नौकरियों) में आरक्षण प्राप्त करने के लिए ‘भूतपूर्व-सैनिक’ की परिभाषा भूतपूर्व-सैनिक (लोक सेवाओं एवं पदो में पुननियोजन) नियमावाली, 1979 में दी गई है तथा विकलांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण की शर्ते नि: शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 के अंतर्गत दी गई हैं।

अल्पसंख्यकों का कल्याण (Welfare of the Minorities)

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 के प्रावधानों के अंतर्गत हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, बौद्ध एवं पारसी इन पाँच धार्मिक समुदायों को अल्पसंख्यक के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। ये पाँच समुदाय राष्ट्र की 18.47 प्रतिशत जनसंख्या की संरचना करते हैं। सरकार ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। अल्पसंख्यकों से संबंधित मामलों पर केन्द्रित पहल एवं उनके हित के लिए नीति निर्धारण में प्रमुख भूमिका निभाने, समन्वय, मूल्यांकन तथा वैधानिक एवं विकासपरक कार्यो की समीक्षा के लिए 29 जनवरी, 2006 को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की स्थापना की गई।

अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री का नवीन 15 सूत्रीय कार्यक्रम (PM New 15 Points Programme for the Welfare of Minorities)

परिचय (Introduction)

स्वतंत्रता दिवस 2005 के अवसर पर प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में अन्य बातों के साथ-साथ कहा कि ″ हम अल्पसंख्यकों के लिए संशोधित एवं बेहतर 15-सूत्री कार्यक्रम तैयार करेंगे। नए 15-सूत्री कार्यक्रम के निश्चित लक्ष्यों को निर्धारत समय-सीमा में प्राप्त किया जाएगा।

कार्यक्रम के उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  • शिक्षा अवसरों को बढ़ावा देना।
  • मौजूदा और नई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों तथा रोजगार में अल्पसंख्यकों के लिए समान भागीदारी सुनिश्चित करना, स्वरोजगार के लिए ऋण सहायता में वृद्धि और राज्य तथा केन्द्र सरकार के पदों पर भर्ती करना।
  • आधारभूत ढाँचा विकास योजनाओं में अल्पसंख्यकों की उपयुक्त भागीदारी सुनिश्चित करके उनके रहन-सहन के स्तर में सुधार लाना।
  • सांप्रदायिकता तथा हिंसा पर नियंत्रण एवं रोकथाम।
  • नए कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ अल्पसंख्यक समुदाय के लाभ से वंचित लोगों तक पहुँचे। अल्पसंख्यक समुदाय के लाभ से वंचित लोगों को निश्चित रूप से विभिन्न सरकारी योजनाओं के लक्षित समूह में शामिल किया जाना चाहिए। अल्पसंख्यक समुदाय को इन योजनाओं का लाभ उचित रूप से पहुँचाने के उद्देश्य से नए कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदायों की घनी जनसंख्या वाले क्षेत्रों में यथानुपात विकास परियोजनाओं की परिकल्पना की गई है। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि जहाँ कहीं भी संभव हो विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत व्यय राशि का 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों के लिए निर्धारित किया जाए।
  • 15-सूत्री कार्यक्रम में व्यक्त शब्द “महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी” उन जिलो/उप जिला इकाइयों में लागू होता है जहाँ जिस इकाई की कुल आबादी की न्यूनतम 25 प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यक समुदायों से संबद्ध हो।
  • उन राज्यों में, जहाँ कोई एक अल्पसंख्यक समुदाय राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अनुच्छेद (-2) के अधीन अधिसूचित हो, अर्थात बहुसंख्यक हो तो विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत विभिन्न लक्ष्यों का निर्धारण केवल अन्य अधिसूचित अल्पसंख्यकों के लिए किया जाएगा। ये राज्य हैं- जम्मू और कश्मीर, पंजाब, मेद्यालय, सिक्किम, मिज़ोरम तथा नागालैंड। लक्षदव्ीप इस समूह में एकमात्र संघ शासित क्षेत्र है।
  • कार्यक्रम की जटिलता तथा इसकी व्यापक पहुँच को ध्यान में रखते हुए जहाँ कहीं भी संभव होगा, संबंधित मंत्रालय/विभाग भौतिक लक्ष्यों तथा वित्तीय व्यय का 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों के लिए निर्धारित करेगा। इसका विभाजन निम्नलिखित पहलूओं पर निर्भर करते हुए देश में गरीबी रेखा के नीचे रह रही कुल अल्पसंख्यक आबादी को ध्यान में रखकर राज्य/संघ शासित क्षेत्र विशेष में गरीबी की रेखा के नीचे रह रही आबादी के यथानुपात राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों के बीच किया जाएगा।
  • कार्यक्रम में शामिल योजनाओं को कार्यान्वित करने वाले मंत्रालय/विभाग भौतिक लक्ष्यों और वित्तीय व्यय के परिप्रेक्ष्य में इन योजनाओं का कार्यान्वयन करेंगे तथा इनकी देखरेख करेगे।
  • राज्य/संघ शासित क्षेत्र अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री के नए 15-सूत्री कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन करेंगे। समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे और इसके सदस्यों में 15 सूत्री कार्यक्रम के अधीन योजनाएँ लागू करने वाले विभागों के सचिव और विभाग प्रमुख, पंचायती राज संस्थाओं/स्वायत्त जिला परिषदों के प्रतिनिधि, अल्पसंख्यकों से संबंद्ध ख्यातिप्राप्त गैर-सरकारी संगठनों के तीन प्रतिनिधि तथा ऐसे तीन अन्य सदस्य जिन्हें राज्य सरकार/संघ शासित क्षेत्र दव्ारा उपयुक्त समझा गया हो, शामिल होंगे।
  • इसी तरह से अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री के नए 15-सूत्री कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए जिला स्तर पर जिला स्तरीय समिति का गठन कर सकते हैं।
  • इस संबंध में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय नोडल मंत्रालय के रूप में अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे छह महीने में एक बार सचिवों की समिति और केन्द्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत करेगा।
  • अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम के लिए एक पुनरीक्षण समिति होगी। सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों के नोडल अधिकारियों सहित अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का सचिव इस समिति का प्रमुख होगा।

अल्पसंख्यक के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री का नया 15-सूत्री कार्यक्रम-

  • एकीकृत बाल विकास सेवाओं की समुचित उपलब्धता।
  • विद्यालयी शिक्षा की उपलब्धता को सुधारना, सर्व शिक्षा अभियान, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना।
  • उर्दू शिक्षण के लिए अधिक संसाधन।
  • मदरसा शिक्षा का आधुनिकीकरण।
  • अल्पसंख्यक समुदायों के मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति; मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति।
  • मौलाना आजाद शिक्षा प्रतिष्ठान के माध्यम से शैक्षिक अवसरंचना को उन्नत करना।
  • गरीबों के लिए स्वरोजगार तथा मजदूरी रोजगार योजना।
  • तकनीकी शिक्षा के माध्यम से कौशल उन्नयन।
  • आर्थिक क्रियाकलापों के लिए अभिवृद्धित ऋण सहायता।
  • राज्य व केन्द्रीय सेवाओं में भर्ती।
  • ग्रामीण आवास योजना में उचित हिस्सेदारी।
  • अल्पसंख्यक समुदायों वाली मलिन बस्तियों की स्थिति में सुधार।
  • सांप्रदायिक घटनाओं की रोकथाम।
  • सांप्रदायिक अपराधों के लिए अभियोजन।
  • सांप्रदायिक दंगों के पीड़ितों का पुनर्वास।

अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएँ (Scholarship Schemes for Students Belonging to the Minorities Communities)

अल्पसंख्यक समुदाय के अंतर्गत आने वाले विद्यार्थियों के लिए केन्द्र सरकार दव्ारा प्रायोजित तीन छात्रवृत्ति योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। छात्राओं को भी समुचित लाभ प्राप्त हो यह सुनिश्चित करने के लिए 30 प्रतिशत छात्रवृत्तियाँ उनके लिए आरक्षित की गई हैं।

  • योग्यता-सह-साधन (Merit-cum-means) छात्रवृत्ति पूर्णत: केन्द्र सरकार दव्ारा प्रायोजित छात्रवृत्ति योजना है। तकनीकी एवं व्यवासायिक पाठयक्रमों में स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर अध्ययन के लिए प्रतिवर्ष 20000 नवीन छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं। इस योजना के अंतर्गत 70 संस्थान अधिसूचित हैं एवं इन संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पाठयक्रम शुल्क के रूप में प्रति वर्ष अधिकतम 20000 प्रतिदेय हैं।
  • मैट्रिक-उपरांत छात्रवृत्ति योजना पूर्णत: केन्द्र सरकार दव्ारा प्रयोजित है। यह छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को ग्यारहवीं कक्षा (XI) से लेकर पी. एच. डी. स्तर तक के अध्ययन के लिए दी जाती है तथा इसमें ग्यारहवीं एवं बारहवीं कक्षा के तकनीकी एवं व्यवसायिक पाठयक्रम भी सम्मिलित हैं। विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 3000 से लेकर 10000 तक पाठ्‌यक्रम शुल्क के लिए प्रतिदेय हैं।
  • मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्तियाँ केन्द्र एवं राज्य सरकारों के मध्य 75: 25 के अनुपात में भागीदारी के तौर पर क्रियान्वित की जा रही हैं। इस योजना के अंतर्गत कक्षा-1 (एक) से लेकर कक्षा दस (X) तक के विद्यार्थी सम्मिलित हैं तथा इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को 4700 तक का शुल्क प्रतिवर्ष प्रतिदेय होगा।

नि: शुल्क कोचिंग एवं सहायक योजना का प्रारंभ जुलाई 2007 में इस उद्देश्य के साथ किया गया कि अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व सरकारी नौकरियों (सेवाओं) एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बढ़े साथ ही उन्हें रोजगार के क्षेत्रों में उभरते नये प्रचलनों के अनुसार ढाला जा सके।

अल्पसंख्यक बहुल जिलों को चिन्हित करना (Identification of Minority Concentration Districts)

वर्ष 2001 की जनगणना के आँकड़ों एवं संबद्ध पिछड़ेपन के पैमानों के आधार पर देश में 90 अल्पसंख्यक बहुल जिले चिन्हित किए गए हैं। अल्पसंख्यक बहुल जिलों की जनसंख्यों का मान/नमूना निम्न प्रकार से है-

  • कुल जनसंख्या के कम से कम 25 प्रतिशत ‘उल्लेखनीय अल्पसंख्यक जनसंख्या’ वाले जिलों की पहचान 29 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में की गई।
  • 5 लाख या उससे विशुद्ध अल्पसंख्यक जनसंख्या एवं 20 प्रतिशत से अधिक किन्तु 25 प्रतिशत से कम अल्पसंख्यक जनसंख्या वाले जिलो की पहचान 29 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में हुई।
  • छ: राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में अल्पसंख्यक समुदाय बहुसंख्यक हैं व बहुमत में है। इसके अतिरिक्त उन राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों में 15 प्रतिशत अल्पसंख्यक जनसंख्या वाले जिलों की भी पहचान हुई है।

अल्पसंख्यक बहुल जिलो को चिन्हित करने के लिए उपयोग किए गए पिछड़ेपन के पैमाने निम्नलिखित थे-

जिला स्तर पर धर्म-विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक सूचकांक/संकेतक:

  • साक्षरता दर
  • महिला साक्षरता दर
  • रोजगार सहभागिता दर एवं
  • महिला रोजगार सहभागिता दर

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