Public Administration 1: Agencies & Institutions to Monitor the Child Welfare

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भारत में बच्चों के संरक्षण एवं बेहतरी हेतु तंत्र, कानून व संस्थायें (Mechanism, Laws and Bodies Constituted for the Protection and Betterment of Children in India)

भारत में बाल कल्याण तथा बाल अधिकारो की निगरानी करने वाली एजेंसियाँ तथा संस्थाएँ (Agencies & Institutions to Monitor the Child Welfare and Chid Rights in India)

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commissions for Protection of Child Rights)

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की स्थापना। मार्च 2007 में बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत एक सांविधिक निकाय के रूप में की गई थी। इसकी स्थापना देश में बाल अधिकारों के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए की गई थी। आयोग में एक अध्यक्ष और 6 सदस्य होते हैं जो बाल कल्याण के विषय में दक्षता प्राप्त होते हैं।

आयोग का कार्य यह है कि वह (The Function the Commission is To)

  • किसी भी कानून अथवा संवैधानिक प्रावधान का इस आशय का परीक्षण करना कि उससे बाल अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होता है अथवा नहीं।
  • बाल अधिकारों से संबंधित रक्षोपायों में सुधार के संबंध में केन्द्र सरकार को सुझाव देना।
  • बाल अधिकारों के उल्लंघन के संबंध में पूछताछ करना।
  • आतंकवाद, सांप्रदायिक हिंसा, दंगो, प्राकृतिक आपदाओं, घरेलू हिंसा, एचआईवी/एड्‌स, तस्करी, दुर्व्यवहार, प्रताड़ना व शोषण, पोर्नोग्राफी और वैश्यावृत्ति के शिकार बालकों/किशोरियों के संबंध में प्रतिकूल कारकों की जाँच करना तथा उचित सुधारात्मक उपायों का सुझाव देना।
  • दुख-परेशानी, हाशिए के एवं उपेक्षित पृष्ठीभूमि के बालकों की विशेष देखरेख एवं संरक्षण करना।
  • बाल अधिकारों से संबंधित समझौतों/अनुबंधों का अध्ययन करना और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
  • बाल अधिकारों के विषय में आचरण का मार्गदर्शन करना।
  • विभिन्न तरीकों से जागरूकता उत्पन्न करना।
  • ऐसे बाल गृहों एवं अन्वेषण गृहों की छानबीन करना जहाँ बालकों को हिरासत में रखा गया है।
  • मानवाअधिकारों के हनन अथवा मानवाधिकारों के हनन को रोक पाने में राज्य तथा अन्य संगठनों की असफलता की जाँच-पड़ताल करना।

चाइल्ड बजटिंग (Child Budgeting)

  • 18 वर्ष की आयु तक के बालक भारत की कुल जनसंख्या के 40 प्रतिशत हैं। वे न केवल भारत का भविष्य हैं बल्कि इसके वर्तमान के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि विकास संकेतक उनके कल्याण तथा मूलभूत अधिकारों की प्राप्ति में धीमी प्रगति दर्शाते हैं। देश में प्रति वर्ष जन्म लेने वाले दस लाख से अधिक नवजात शिशुओं का प्रारंभिक स्तर पर जीवित रहना अब भी खतरे में हैं। विशेष बालिका शिशुओं के संबंध में तो यह स्थिति और भी बदतर है, और इसका सबूत निरंतर गिरता लिंगानुपात हैं।
  • चाइल्ड बजटिंग एक ऐसा उपकरण है जिसके माध्यम से किसी वित्त वर्ष में बाल कल्याण एवं बाल संरक्षण के प्रति सरकार की वचनबद्धता का परीक्षण किया जा सकता है। इसके माध्यम से किसी देश की विकास रणनीति तथा उसकी पूर्ति हेतु उपलब्ध संसाधनों के मध्य विद्यमान अंतर को भी स्पष्टत: देखा जा सकता है।

किशोर न्याय न्यायालय और किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Court and Juvenile Justice Board)

  • किसी अपराध के दोषी अथवा अपराध के लिए हिरासत में बंद बाल अपराधी वे होते हैं, जिन्हें बाल अपराध न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2000 (संशोधित 2006) के तहत बाल अपराध न्याय बोर्ड के समक्ष लाया गया है। इस अधिनियम तथा अपराध प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत बालकों को किसी नियमित न्यायालय में नहीं ले जाया जा सकता है। अत: बालकों के लिए पृथक न्यायालय बनवाने का उद्देश्य आपराधिक कार्यों के दोषी बालक को दंडित करना नहीं है बल्कि बालक को उसके दव्ारा किए गए कार्यों के बारे में समझाना है और भविष्य में उसके दव्ारा कोई अन्य अपराध न करने के लिए उसे सहमत करना है।
  • बाल अपराध न्याय बोर्ड में एक मैट्रोपालिटन न्यायाधीश अथवा प्रथम श्रेणी का एक न्यायाधीश तथा दो सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं, जिनमें कम से कम एक महिला अवश्य होनी चाहिए। एक पीठ के इन तीनों सदस्यों को एक इकाई के रूप में कार्य करना होता है। यद्यपि उनकी भूमिकाएँ भिन्न-भिन्न होती हैं लेकिन बालकों के हितों में उन्हें परस्पर सामंजस्य बनाकर कार्य करना होता है। जब कोई बालक किसी अपराध का दोषी पाया जाता है तो बालक के साथ बेहतर बर्ताव व उसके पुनर्वास में सामाजिक कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बाल अपराध न्याय को ऐसे मामले चार महीने की समयावधि में समाप्त करने होते हैंंं।

राष्ट्रीय जन सहयोग और बाल विकास संस्थान (National Institute of Public Cooperation and Child Development)

  • इसे NIPCCD के नाम से जाना जाता है यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के संरक्षण में एक स्वायत संगठन है। यह महिला एवं बाल विकास के संपूर्ण विषय के संबंध में स्वैच्छिक क्रियाओं तथा शोध, प्रशिक्षण तथा प्रलेखन कार्य के लिए समर्पित एक प्रमुख संगठन है। इस संगठन के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार है। सामाजिक विकास में सरकारी एवं स्वैच्छिक विकासपरक उपायों में सामंजस्य स्थापित करना, बाल विकास के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाना तथा राष्ट्रीय बाल नीति के अनुसरण में प्रासंगिक एवं आवश्यकता आधारित कार्यक्रमों को प्रोत्साहन देना, सामाजिक विकास में स्वैच्छिक क्रियाओं को प्रोत्साहित करना, सरकारी एवं स्वैच्छिक प्रयासों के माध्यम से बाल कार्यक्रामों को संगठित करने के लिए रूपरेखा एवं नजरिया विकसित करना तथा अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय एजेंसियों, शोध संस्थाओं, विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी निकायों से संपर्क स्थापित करना।
  • एकीकृत बाल विकास सेवाओं के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के क्षेत्र में NIPCCD वर्ष 1975 से एक शीर्षस्थ संस्था के रूप में कार्यरत है। इसका मुख्य बल गुणवत्ता सुधार पर रहता है। इस क्षेत्र में अन्य महत्वपूर्ण पहलों के अंतर्गत ‘सबला’ तथा ‘इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना’ तथा माँ एवं शिशु संरक्षण कार्ड के प्रयोग के संबंध में प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण शामिल हैं।

भारत में बाल अधिकारों की निगरानी के लिए अन्य महत्वपूर्ण संस्थान हैं (Other Important Institutions to Monitor the Child Rights in India Are)

  • चाइल्ड लाइन फाउण्डेशन
  • भारतीय बाल कल्याण परिषद
  • केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड
  • खाद्य एवं पोषण बोर्ड

जनसंख्या के असुरक्षित समूहों के लिए केन्द्र एवं राज्य की कल्याणकारी योजनायें (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

महिला एवं बाल विकास (Women and Child Development)

महिला सशक्तीकरण हेतु राष्ट्रीय नीति (National Policy for the Empowerment of Women)

लक्ष्य एवं उद्देश्य (Goal and Objectives)

  • इस नीति का उद्देश्य महिलाओं का आधुनिकीकरण विकास और सशक्तीकरण करना है। नीति को व्यापक रूप से विस्तार दिया जायेगा ताकि इसके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सभी हिस्सेदारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
  • महिलाओं के पूर्ण विकास एवं भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए सकारात्मक आर्थिक और सामाजिक नीतियों दव्ारा अनुकूल वातावरण का निर्माण करना।
  • राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और नागरिक क्षेत्रों में महिलाओं के लिए विधिक रूप में वस्तुत: पुरुषों के समान सभी मानवाधिकारी एवं मौलिक स्वतंत्रताओं की प्राप्ति सुनिश्चित करना।
  • राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक जीवन में निर्णयन प्रक्रिया में महिलाओे की समान भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • स्वास्थ्य सुविधाओं सभी स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यवसाय और व्यावसायिक निर्देशन रोजगार, समान वेतन, व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सामाजिक सुरक्षा तथा सार्वजनिक कार्यालयों तक महिलाओं की समान पहँच सुनिश्चित करना।
  • महिलाओं के प्रति सभी प्रकार के भेदभाव को दूर करने के लिए कानूनी विधायी तंत्र को मजबूत करना।
  • महिलाओं व पुरुषों की सक्रिय भागीदारी दव्ारा सामाजिक व्यवहार एवं सामुदायिक क्रियाओं में परिवर्तन लाना।
  • विकास प्रक्रिया में लैंगिक परिप्रेक्ष्य को मुख्य धारा में शामिल करना।
  • महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध होने वाली सभी प्रकार की हिंसा और भेदभाव का अंत।
  • नागरिक समाज, विशेषकर महिला संगठनों के साथ मजबूत साझेदारी का निर्माण करना।

किशोर बालिकाओं के सशक्तीकरण हेतु राजीव गांधी योजना – SABLA (Rajiv Gandhi Scheme for Empowerment of Adolescent Girls- (RGSEAG) -SABLA)

  • केन्द्र दव्ारा प्रायोजित एक नई योजना है जिसे 2010 में प्रायोगिक तार पर देश के 200 जिलों में शुरू किया गया। यह योजना ICGS प्रोजेक्ट के अंतर्गत चिन्हित उन सभी 200 जिलों में 11 से 18 वर्ष तक की उन सभी किशोर बालिकाओं पर केन्द्रित है जो विद्यालय नहीं जा पातीं।
  • योजना के मुख्यत: दो घटक हैं-पोषण और गैर पोषण। पोषण घटक के अंतर्गत 11 से 14 वर्ष की विद्यालय न जाने वाली लड़कियों को घर ले जा सकने वाले राशन या गर्म पके भोजन के रूप में पोषण दिया जाता है और 14 - 18 आयु वर्ग की सभी लड़कियों (विद्यालय न जाने वाली एवं विद्यालय जाने वाली) को भी इसी रूप में दिया जाता हैं। गैर-पोषण घटक के अंतर्गत 11 - 18 आयु वर्ग की विद्यालय न जाने वाली किशारियों को आयरन फॉलिक एसिड का पूरक देना, स्वास्थ्य जाँच सुविधा, पोषण व स्वास्थ्य शिक्षा, परिवार कल्याण पर परामर्श/दिशा-निर्देश, किशोर प्रजनन यौन स्वास्थ्य (ARSH) , बाल देखभाल क्रियायें, जीवन कौशल शिक्षा और सार्वजनिक सेवाआंे तक पहुँच सुनिश्चित की जाती है।
  • योजना के तहत 16 - 18 वर्ष की किशोरियों को व्यवसायिक शिक्षा भी दी जाती है। इसका उद्देश्य विद्यालय न जाने वाली किशोरियों को औपचारिक/गैर-औपचारिक शिक्षा की मुख्य धारा की ओर मोड़ना है। सबला (SABLA) योजना को लागू करने के लिए गाँव के आँगनवाड़ी केन्द्र को केन्द्र बिंदु बनाया गया है।
  • पोषण प्रावधान के अतिरिक्त, योजना के सभी प्रावधान केन्द्र की 100 प्रतिशत वित्तीय मदद के दव्ारा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के माध्यम से लागू किये जाते हैं, जबकि पोषण प्रावधान के लिए 50 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता राज्यों/संघ क्षेत्रों को दी जाती है। योजना के तहत लगभग 100 लाख किशोरियों को प्रतिवर्ष लाभ मिलने की संभावना है।

इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना (IGMSY) सर्शत मातृत्व लाभ (CMB) योजना (Indira Gandhi Matritva Sahyog Yojana) (IGMSY) -Conditional Maternity Benefit (CMB) Scheme)

2010 - 2011 में भारत सरकार दव्ारा एक नई योजना गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए 52 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई। यह एक सर्शत नकद हस्तांतरण योजना है, जिसमें 19 वर्ष या उससे अधिक की गर्भवती महिलाओं को विशिष्ट मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य दशाओं की पूर्ति हेतु, उनके दव्ारा प्रथम दो जीवित बच्चों को जन्म देने के लिए गर्भावस्था की दूसरी तिमाही से लेकर शिशु के 6 महिने का हो जाने की अवधि के दौरान तीन किस्तों में 4000 रुपये की नकद राशी प्रदान की जाती है। गर्भावस्था के अंतिम दिनों में तथा प्रसव के तुरंत बाद की अवधि में आर्थिक बाध्यताओं के चलते महिलाओं को कार्य न करना पड़े, इसलिए इस दौरान काम न करने के कारण होने वाली वेतन क्षति की प्रतिपूर्ति के लिए योजना में मुआवजे की प्रावधान भी किया गया है।

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