Public Administration 1: Department of Space: Objectives and Functions

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अंतरिक्ष विभाग (Department of Space)

अंतरिक्ष विभाग का गठन अंतरिक्ष विज्ञान के अनुसंधान और ग्रहीय अन्वेषण को जारी रखते हुए राष्ट्र के विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुटे रहने के लिए किया गया।

लक्ष्य (Aims)

  • अंतरिक्ष पर पहुँचने की दिशा में प्रमोचन वाहनों का डिजाइन तथा विकास और संबंधित तकनीकी।
  • भू-प्रेक्षण, संचार, नौसंचालन, मौसम विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान हेतु उपग्रहों का डिजाइन और विकास।
  • दूरसंचार, दूरदर्शन प्रसारण और विकासीय उपयोग हेतु भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट) कार्यक्रम।
  • उपग्रह आधारित प्रतिबिम्ब का उपयोग करते हुए प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन और पर्यावरणीय मॉनीटरिंग के लिए भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आई. आर. एस.) कार्यक्रम।
  • सोसाइटल विकास हेतु अंतरिक्ष आधारित उपयोग।
  • अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रहीय अन्वेषण क्षेत्र में अनुसंधान तथा विकास कार्य।

इन उद्देश्यों के समर्थन हेतु विधायी और विनियात्मक उपायों का एक सेट है, जिसके पीछे लक्ष्य पर्यावरण का संरक्षण, परिक्षण और रक्षण करना है। विधायी उपायों के अलावा, पर्यावरण और विकास पर राष्ट्रीय संरक्षण रणनीति और नीति कथन, 1992 वन नीति, 1988; प्रदूषण उपशमन संबंधी नीति कथन, 1992; और राष्ट्रीय पर्यावरण नीति, 2006 से भी मंत्रालय के कार्य मार्गनिर्देशित होते हैं।

उद्देश्य (Objectives)

  • ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन रॉकेट (पी. एस. एल. वी.) के प्रचालनात्मक उड़ान।
  • भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचक रॉकेट (जी. एस. एल. वी. मार्क 2) के विकासीय उड़ान।
  • भू उत्थापन भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचक रॉकेट (जी. एस. एल. वी. मार्क 3) के विकासीय उड़ान।
  • संचार उपग्रहों का डिजाइन विकास तथा प्राप्ति।
  • भू-प्रेक्षण उपग्रहों का डिजाइन, विकास तथा प्राप्ति।
  • नौ वहन उपग्रह प्रणाली।
  • अंतरिक्ष विज्ञान और खगोलीय अन्वेषण हेतु उपग्रहों का विकास।
  • भू-प्रेक्षण उपयोग।
  • सामाजिक उपयोग के लिए अंतरिक्ष आधारित प्रणाली।
  • उन्नत प्रौद्योगिकी तथा नये पहलू।
  • प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा शिक्षा।
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन।
  • अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए अवसंरचना तथा सुविधा विकास।
  • अंतरराष्ट्रीय सहकारिता।

प्रकार्य (Functions)

  • अंतरिक्ष आयोग के निर्णयों और निर्देशों का अनुपालन।
  • उपग्रह और रॉकेट हेतु डिजाइन विकास तथा प्रमोचन सुविधा प्रदान करना।
  • दूरसंचार, दूरदर्शन प्रसारण, सुरक्षा आवश्यकताएँ और सामाजिक उपयोग हेतु उपग्रह पेषानुकर उपलब्ध कराना।
  • प्राकृतिक संसाधन और आपदा प्रबंधन समर्थन के मानचित्रण व मॉनीटरन हेतु भू-प्रेक्षण क्षमताएँ उपलब्ध कराना।
  • नौसंचालनात्मक आवश्यकताएँ तथा मौसम विज्ञानीय सेवाओं हेतु अंतरिक्ष प्रणाली उपलब्ध कराना।
  • अंतरिक्ष विज्ञान में अनुसंधान तथा विकास और खगोलीय अन्वेषण हेतु अंतरिक्ष प्रणाली उपलब्ध कराना।
  • उपभोक्ता समुदाय को अंतरिक्ष आधारित उत्पाद और सेवाएँ उपलब्ध कराना।
  • प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण दव्ारा पर्याप्त मानव शक्ति सहित अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र को अधिक अनुंसधान के लिए सहायता प्रदान करना।
  • बाह्य अंतरिक्ष का शांतिपूर्ण उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय सहकारिता।

कार्यक्रम (Programmes)

अंतरिक्ष विभाग (अं. वि) का प्राथमिक उत्तरदायित्व आत्म-निर्भरता हासिल करने और राष्ट्र के सर्वोतोमुखी विकास को साध्य बनाने हेतु अंतरिक्ष उपायों की दिशा में अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देना है। इस मूल उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, अंतरिक्ष विभाग ने निम्नांकित कार्यक्रम तैयार किए हैं-

  • दूरसंचार, दूरदर्शन प्रसारण, मौसम विज्ञान, विकासात्मक शिक्षा, सामाजिक उपयोग जैसे कि दूर-चिकित्सा, दूर-शिक्षा, दूरस्थ सलाहकारिता के लिए भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट) कार्यक्रम राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट) कार्यक्रम।
  • देश भर में प्राकृतिक संसाधनों एवं विकासात्मक परियोजनाओं के प्रबंधन में अंतरिक्ष आधारित प्रतिबिंबकियों का उपयोग करने के लिए भारतीय सुदूर संवेदन (आई. आर. एस.) कार्यक्रम।
  • अंतरिक्षयान तथा संचार, नौवहन सुदूर संवेदन एवं अंतरिक्ष विज्ञान के लिए संबंधित प्रौद्योगिकी का डिज़ाइन एवं विकास।
  • अंतरिक्ष में पहुँचने और इनसेट, आई. आर. एस. , अंतरिक्षयान तथा अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों को कक्षा में स्थापित करने हेतु प्रमोचक रॉकेटों का डिज़ाइन एवं विकास।
  • अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं विकास और राष्ट्रीय विकास हेतु प्रयोग कार्यक्रमों को उत्प्रेरित करना।

अंतरिक्ष विभाग की प्रतिबद्धता (Commitments of Department of Space)

  • आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लक्ष्य से उपग्रह तथा प्रमोचक रॉकेट में अनुसंधान व विकास कार्य आयोजित करना।
  • देश की दूरसंचार, और प्रसारण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय अंतरिक्ष अवसरंचना उपलब्ध कराना।
  • मौसम पूर्वानुमान, मानीटरन आदि के लिए अपेक्षित उपग्रह सेवा उपलब्ध कराना।
  • देश में प्राकृतिक संसाधन सर्वेक्षण, प्राकृतिक आपदा का प्रबंधन, सार्वजनिक के लिए बेहतर सेवाएँ एवं पर्यावरण का मानीटरन संबंधी जरूरतों के लिए अपेक्षित उपग्रह प्रतिबिंबकी उपलब्ध कराना।
  • केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, अर्ध सरकारी संगठन, गैर सरकारी संगठन तथा निजी क्षेत्रों के दव्ारा विकासात्मक उद्देश्यों हेतु अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए।
  • अंतरिक्ष उपयोग के प्रदर्शन की संकल्पना का प्रमाण प्राप्त करना।
  • राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुसार, अंतरिक्ष विज्ञान और उपयोग कार्यक्रम के विकास कार्य में अनुसंधान को बढ़ावा देना।

संगठनात्मक चार्ट (Organizational Chart)

Organizational Chart
  • NRSE-राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केन्द्र, PRL- भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, NARC- राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला, NE-SAC-उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र, SCL-सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला, ISRO- भारतीय अंतरिक्ष अनुनंसधान संगठन, Antrix- अंतरिक्ष निगम लिमिटेड, VSSC-विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र, LPSC-द्रव प्रकोट सिस्टम केन्द्र, SDSC-सतीश ध्वन अंतरिक्ष केन्द्र, ISAC- इसरो उपग्रह केन्द्र, SAC-अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र, IISU-इसरो अंतरिक्ष सिस्टम इकाई, DECU- शिक्षा व विकास संचार इकाई, MCF- मास्टर नियंत्रण सुविधा, ISTRAC-इसरो दूरसंचार ट्रेकिंग व निर्देश केन्द्र, LEOS-इलेक्ट्रो-ऑप्टिक तंत्र के लिये प्रयोगशाला, IIST- भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान व तकनीकी संस्थान, IIRS-भारतीय इर संवेदन संस्थान।
  • भारत में प्रमोचन यानों के विकास कार्यक्रम की शुरूआत 1970 दशक के प्रारंभ में हुई। प्रथम प्रायोगिक प्रमोचन यान (एसएलवी-3) 1980 में विकसित किया गया। इसके एक संवर्धित संस्करण एएसएलवी का प्रमोचन 1992 में सफलतापूर्वक किया गया। उपग्रह प्रमोचन यान कार्यक्रम में आत्मनिर्भता प्राप्त करने के लिए ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान (पीएसएलवी) और भूतुल्यकारी उपग्रह प्रमोचन यान (जीएसएलवी) के प्रचालनीकरण के साथ भारत ने प्रमोचन यान प्रौद्योगिकी में जबरदस्त प्रगति की है।
  • इसरो वायुमंडलीय अनुसंधान और अन्य वैज्ञानिक खोजों के लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय दव्ारा नीतिभारों के प्रमोचन के लिए प्रयुक्त रोहिणी श्रृंखला के परिज्ञापी रॉकेटों का भी निर्माण करता है। ये रॉकेट उन्नत प्रमोचन यानों में प्रयुक्त कुछ महत्वपूर्ण प्रणालियों को बनाने में भी प्रयोग किए जाते हैं।

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