Public Administration: Details of TAC Constituted by the States

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केन्द्र व राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

राज्यों दव्ारा निर्मित TAC का निवारण (Details of TAC Constituted by the States)

जनजातीय सलाहकार परिषद आंध्रप्रदेश, छत्तीसढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, उड़ीस और राजस्थान के 9 अनुसूचित क्षेत्रों में और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल के दो अनुसूचित क्षेत्रों में बनाई गई है। उत्तराखंड के गैर-अनुसूचित क्षेत्र में TAC के गठन हेतु राष्ट्रपति के निर्देश भी दे दिये गये हैं।

एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी/प्रोजेक्ट (Integrated Tribal Development Agency/Projects)

  • पाँचवीं पंचवर्षीय योजना की पूर्व संध्या पर जनजातीय लोगों की समस्याओं का विस्तृत एवं व्यापक स्तर पर पुनर्विलोकन किया गया था। ITDA का मुख्य उद्देश्य आय उत्पादक गतिविधियों (जिसमें अवसरंचनात्मक विकास भी हो) के दव्ारा जनजातीय लोगों का सामाजिक आर्थिक विकास करना है तथा शोषण के विरुद्ध इनकी सुरक्षा भी करनी है।
  • ITDA प्रोजेक्ट के क्षेत्र सामन्यत: तहसील या ब्लॉक के आकार के होते हें निमें 50 प्रतिशत या अधिक जनसंख्या होती है। जनजातीय लोगों के जनांकिकीय संस्तर (Profile) के कारण असम, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में ITDPs छोटे या सन्निहित होते हैं। आंध्र प्रदेश और उड़ीसा ने रजिस्ट्रेशन ऑफ सोसाइटीज एक्ट के तहत एजेंसी मॉडल को अपनाया है और यहाँ ITDPs को ITD एजेंसी कहा जाता है।
  • जम्मू-कश्मीर में हालाँकि अब तक कोई ITDP चिन्हित नहीं किया गया है, परन्तु ST जनसंख्या वाले क्षेत्रों को राज्य TSP में रणनीति के अधीन लाया गया है। 8 राज्य जिनमें अनुसूचित क्षेत्र हैं, ITDAs/ITDPs सामान्त: TSP क्षेत्रों के साथ ITDPs/ITDAs की अध्यक्षता प्रोजेक्ट अधिकारियों दव्ारा की जाती है, जिन्हें प्रोजेक्ट प्रशासक या प्रोजेक्ट निर्देशक के रूप में निर्दिष्ट किया जाता है।
  • एकीकृत जनजातीय विकास प्रोजेक्ट/ ITDAs/ITDPs देश के 19 राजय/संघ राजय क्षेत्रो में फेले हैं। जनजातीय मामलों का मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु कार्यक्रमों को लागू करने के लिए राज्य सरकारों को अनुदान देता है। संबंधित राज्य सरकारें अपनी प्रशासकीय इकाइयों ITDAs/ITDPs को योजनायें लागू करने के लिए धनराशी आवंटित करती है और इन योजनाओं के लिए आवंटित धन ओर लागू कराने का ब्यौरा इन राज्य सरकारों दव्ारा प्रबंधित किया जाता है।

Modified Area Development Approach (MADA) Pockets

यह अनुसूचित जनसंख्या के संकेन्द्रण वाले संकुल होते हैं जिनमें न्यूनतम 10000 जनसंख्या का 50 प्रतिशत या अधिक अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या होती है। आज तक विभिन्न TSP राज्यों में कुल 259 MADAs चिन्हित किये गये है। सामन्यत: MADA संकुलों के पास विकास योजनाओं को लागू करने के लिए पृथक प्रशासनिक संरचनाएँ होती है।

भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (Tribal Cooperative Marketing Development Federation of India Ltd. (TRIFED) )

  • भारतीय जनजाति सहकारी विपणन विकास संघ की स्थापना 1987 में एक राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था के रूप में मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट 1984 के तहत की गई थी।
  • इसके संशोधित आदेश के अनुसार, ट्राइफेड ने जनजातियों के लघु वन उत्पाद (MFP) ओर अतिरेक कृषि उत्पादों (Surface Agricultural Product-SAP) की सरकारी खरीद बंद कर दी है। (खरीद अब राज्य स्तरीय जनजातीय सहकारी संघों दव्ारा की जाती है) । ट्राइफेड अब जनजातीय उत्पादों लिए ‘बाजार विकसित करने वाले’ के रूप में और अपने सदस्यों के लिए “सेवा प्रदाता” की तरह कार्य करता है। इस प्रकार ट्राइफेड, समाज के इस असंगठित क्षेत्र के बड़े तबके को आर्थिक लाभ पहुँचाता हैं।
  • ट्राइफेड अपने स्वयं की दुकानों (Tribes India) और माल प्राप्ति के आधार पर उत्पादों को बेचने वाली दुकानों के दव्ारा जनजातीय उत्पादों के विपणन से जुड़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर ट्राइफेड भारत सरकार की एकमात्र संस्था जो प्रत्यक्षत: जनजाती: उत्पादों, जिनमें जनजातीय हस्तशिल्प और कला शामिल हो के विपणन से जुड़ी है। ट्राइफेड जनजातीय उत्पादों का विक्रय, उसकी अपनी दुकानों, ′ ट्राइब्स इंडिया दव्ारा और माल प्राप्ति के आधार पर स्टेट एम्पोरिया के केंद्रों दव्ारा करती है।

नई योजना के अनुसार ट्राइफेड अब 2007 - 12 के दौरान निम्नलिखित 4 गतिविधियों पर ध्यान देगी-

  • खुदरा विपणन विकास गतिविधि।
  • MFP विपणन विकास गतिविधि।
  • ST हस्तशिल्पियों और (MFP) एकत्र करने वालों को व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण।
  • अनुसंधान विकास/बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) गतिविधि।

राष्ट्रीय जनजातीय नीति (2006) [National Tribal Policy 2006 (Draft) ]

हालाँकि भारतीय संविधान में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास हेतु अनेक प्रावधान किय गये हैं, और अनुसूचित जनजातियो और राज्य वंचित तबकों के लिए समान विकास का स्तर सुनिश्चित किया गया है तथा इसके साथ ही ऐसे ही उद्देश्य वाले अनेक केंद्रीय व राज्यों के अधिनियम भी अस्तित्व में हैं, परन्तु ऐसी एक भी नीति नहीं है जो एकीकृत तरीके से अनुसूचित जनजाति के सरंक्षण एवं विकास के मुद्दे को समझे। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय जनजातीय नीति, 2006 लाया गया।

नीति के निर्देशित करने वाले सिद्धांत (Guiding Principles of the Policy)

अनुसचित जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक ओर राजनीतिक विकास के लिए सिद्धांत दिये गये हैं (अनुच्छेद 14,15 (4) , 16 (4) , 16 (4ंए) , 46,243 (डी) , 244 (1) , 244 (2) , 275 (1) , 330,332, 338ए, 339 (1) , 340,342, PESA के दव्ारा 73वें और 74वें संविधान संशोधन का अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार आदि।

नीति के उद्देश्य (Objectives of the Policy)

राष्ट्रीय जनजातीय नीति के निम्न उद्देश्य हैं-

  • ऐसा वातावरण प्रदान करना जो पारंपरिक और रीति-रिवाजों वाले तंत्र को संरक्षित करे, अनुसचित जनजातियों को प्राप्त लाभों को बनाये रखे और इस वर्ग का सामाजिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करे।
  • STs की भूमि का अधिग्रहण रोकना और गलत तरीके से अधिग्रहित भूमि पर न्याय करना।
  • पेसा अधिनियम, 1996 के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जनजातियों में स्वप्रशासन हेतु सशक्तीकरण।

सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण (Socio-Economic Empowerment)

  • जनजातीय जनसंख्या और सामान्य जनसंख्या के मानव विकास सूचकांक (HDI) में व्याप्त असमानता को दूर करना और इसे 2020 तक संतुलित करना।
  • 11वीं योजना के अंत तक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता सुनिश्चित करना।
  • अनुसूचित जनजाति के सभी BPL परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना, प्रत्येक ST परिवार को 25किग्रा. अनाज प्रति माह देना और PDS का प्रबंधन और स्वामित्व समुदाय को सौंपना।
  • 100 दिन के गारंटीयुक्त रोजगार के साथ-साथ, आजीविका के अवसर प्रदान करना ताकि गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली अनुसूचित जनजातियों की संख्या प्रति वर्ष 2 प्रतिशत के हिसाब से घटे और 2020 तक अनुसूचित जनजातियाँ सामान्य स्तर पर आ जाये।
  • 2020 तक जनजातीय क्षेत्रों की कुल सिंचाई क्षमता को सौ प्रतिशत और 11वीं योजना के अंत तक कुल सिंचाई क्षमता का 50 प्रतिशत प्राप्त करना।

सांस्कृतिक और पारंपरिक अधिकार (Cultural and Traditional Rights)

जनजातीय हस्तशिल्प और कार्बनिक एवं जनजातीय उत्पादों का मानकीकरण सहयोग ब्रांड संगठित विपणन और स्थानीय बाजारों की स्थापना दव्ारा 2020 तक प्रचार एवं विकास करना।

लाभ तक पहुँच (Access to Privileges)

  • कुछ STs को अनुसूची से हटाने के लिए निरीक्षण करना और मौजूदा के उप-वर्ग बनाना ताकि 2020 तक ये सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ जनजातियों में समान रूप से वितरित हो।
  • आदिम जनजातीय समूहों (PTGs) को विशिष्ट वंचित जनजातीय समूहों के रूप में नामित करने पर जोर देना। ऐसे समूहों की जरूरत के अनुसार, इनके सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए संरक्षण -सह -विकास सूक्ष्म योजनायें बनाना और इन्हें अन्य अनुसूचित जनजातियों के साथ 2020 तक सामान्य स्तर पर लाना।

बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights)

STs के बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण और इनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए वाणिज्यिक आधार पर इनका उपयुक्त/उचित प्रयोग।

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